राज्य सरकार ने सीबीआरआई को वसुंधरा समेत अन्य संवेदनशील हिमनद झीलों पर अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने की अनुमति दे दी है। इसी महीने वसुंधरा झील पर अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने के लिए दल भेजा जाएगा।
केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) ने हिमनद झीलों के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम तैयार कर लिया है। राज्य सरकार ने संस्थान को इसका परीक्षण करने की अनुमति दे दी है। इसकी शुरुआत वसुंधरा झील से होगी। इसी माह सीबीआरआई का दल इस सिस्टम को लगाने के लिए जाएगा। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बताया कि सीबीआरआई की टीम इसी महीने उपकरण लगाएगी। अगले वर्ष अप्रैल व मई में अन्य झीलों पर इन्हें लगाया जाएगा।
तब तक वसुंधरा झील पर लगे सिस्टम की सूचनाओं के बारे में भी जानकारी मिल जाएगी। राज्य में 13 संवेदनशील हिमनद झीलें हैं, सभी में इन्हें लगाया जाएगा। सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन बताते हैं कि सीबीआरआई के अलावा सी-डैक संस्था के माध्यम से भी अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाया जाएगा। इससे दोनों सिस्टम की तुलना भी हो सकेगी।
13 संवेदनशील हिमनद झील
राज्य में 13 संवेदनशील हिमनद झीलें पांच जिलों में हैं। इनमें पांच ए श्रेणी, चार बी श्रेणी और चार सी श्रेणी की हैं। अभी तक चार हिमनद झीलों के सर्वे का काम हो चुका है। इस वर्ष केदारताल और सरस्वती ताल का भी अध्ययन करने की योजना है।

