गंगा के तट पर बसा उत्तरप्रदेश का कानपुर नगर ऐतिहासिक होने के साथ-साथ धार्मिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। यहां कई ऐसे मंदिर और धार्मिक स्थल हैं, जिनका संबंध त्रेता और द्वापर युग से है। ऐसा ही एक मंदिर है बाबा आनंदेश्वर का। यहां पर मौजूद शिवलिंग का अपना एक अलग पौराणिक महत्व है।
मान्यता है कि इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग की पूजा महाभारत काल में कर्ण किया करते थे। इस मंदिर का जिक्र स्कंद पुराण और शिव पुराण में भी मिल जाता है। चलिए हम आपको इस मंदिर की पौराणिक कथा और प्रसिद्धि के बारे में बताते हैं।
महाभारत काल से कैसे है मंदिर का संबंध ?
महाभारत के युद्ध के समय कौरवों की ओर से युद्ध लड़ रहे कण ने इस स्थान पर शिवलिंग स्थापित किया था। वह रोज यहां शिवलिंग की पूजा करने आते थे। युद्ध को जब वर्षों बीत गए, तब शिवलिंग टीले में दब गया। स्थानीय लोग कहते हैं, एक ग्वाले की आनंदी नाम की गाय रोज यहां आती और अपना सारा दूध उस टीले को अर्पित कर दिया करती। ऐसा जब रोज होने लगा, तो स्थानीय लोगों ने उस टीले की खुदाई शुरू की। खुदाई में एक पौराणिक शिवलिंग निकलकर बाहर आया, तब से इस शिवलिंग को बाबा आनंदेश्वर के नाम से पुकारा जाने लगा।
क्यों कहा जाता है इसे छोटा काशी?
इस मंदिर को लेकर लोगों में इतनी आस्था है कि केवल सावन मास, सोमवार या फिर महाशिवरात्री जैसे विशेष दिनों में नहीं बल्कि हर दिन यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। यहां पर शिवलिंग की एक झलक पाने के लिए लोग लंबी-लंबी कतारों में घंटो खड़े रहते हैं और बिना जल अर्पित किए नहीं जाते हैं। खासतौर पर सावन के महीने में तो यहां पर बाबा आनंदेश्वर के विशेष दर्शन होते हैं।
शिव जी के दर्शन के साथ होती है गंगा आरती
ऋषिकेश, हरिद्वार और वाराणसी की तर्ज पर यहां भी हर दिन गंगा माता की आरती होती है। यह आरती इतने विराट स्वरूप में होती है कि लोग इसे न केवल कानपुर बल्कि आस-पास के गांव और कस्बों से भी आते हैं।
अत: आप भी अगर कानपुर में रहते हैं या फिर कानपुर के आस-पास रहते हैं, एक बार सावन के महीने में बाबा आनंदेश्वर के दर्शन करने जरूर जाएं।

