मां लक्ष्मी ने भगवान गणेश को क्यों बनाया अपना दत्तक पुत्र?

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ अवसर पर भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शुभ और मांगलिक कार्यों में गणेश पूजन करने से काम में कोई बाधा नहीं आती है और शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।

इसके अलावा दिवाली के दिन धन की देवी मां लक्ष्मी और विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश की एक साथ पूजा करने का विशेष महत्व है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मां लक्ष्मी से भगवान श्री गणेश का क्या संबंध है? पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां लक्ष्मी ने भगवान गणेश को अपना दत्तक पुत्र क्यों बनाया।

अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि देवी लक्ष्मी ने गणेश जी को अपना दत्तक पुत्र क्यों चुना? इसके पीछे का रहस्य पद्म पुराण और गणेश पुराण में देखने को मिलता है। आइए आपको बताते हैं इससे जुड़ी कथा के बारे में।

कैसे बने गणेश जी मां लक्ष्मी के दत्तक पुत्र?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार मां लक्ष्मी को खुद पर अधिक अभिमान हो गया था। देवी को लगता था कि सारा जगत उन्हें पाने के लिए लालायित रहता है। उनकी कृपा से ही लोगों को सुख-सुविधाएं और समृद्धि मिलती है। जब मां लक्ष्मी के इस अहंकार के बारे में भगवान विष्णु को पता चला, तो उन्होंने मां लक्ष्मी के अहंकार को दूर करने का फैसला लिया।

श्रीहरि ने देवी लक्ष्मी से कहा कि सारा संसार आपकी पूजा-अर्चना करता है, लेकिन आप अभी भी अपूर्ण हैं। ऐसे में जब माता लक्ष्मी ने इस कमी का कारण पूछा, तो भगवान विष्णु ने जवाब दिया कि जब तक कोई स्त्री मां नहीं बनती, तब तक उसे पूर्ण नहीं माना जाता। प्रभु की इस बात को सुनकर मां लक्ष्मी अधिक दुखी हो गईं। उन्होंने अपना दुख दूर करने का फैसला लिया और माता पार्वती के पास पहुंचीं।

उन्होंने माता पार्वती को अपने दुख के बारे में बताया। साथ ही देवी ने मां पार्वती से आग्रह किया कि वे श्री गणेश को उन्हें गोद दे दें, जिससे उन्हें माता होने का सुख प्राप्त हो सके। माता पार्वती ने मां लक्ष्मी के इस दुख को दूर करने के लिए अपने पुत्र भगवान गणेश को उन्हें गोद देने की बात स्वीकार कर ली। इस तरह से भगवान गणेश माता लक्ष्मी के दत्तक-पुत्र बन गए, जिससे मां लक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न हुईं।