यूपी में पूरब से पश्चिम तक बढ़ेगा सांस्कृतिक पर्यटन का दायरा, सृजित होंगे रोजगार के नए अवसर

देश के 15 पुरातात्विक महत्व के स्थलों में यूपी के सारनाथ और हस्तिनापुर भी शामिल होंगे। ये विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र बनेंगे। बजट घोषणा से प्रदेश के सांस्कृतिक पर्यटन को रफ्तार मिलेगी। पुरातत्व, आध्यात्म और तकनीक के संगम से अनुभव बदलेगा। 10 हजार युवाओं के कौशल विकास से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

केंद्रीय बजट ने यूपी के सांस्कृतिक पर्यटन को नई पहचान देने की पहल की है। पूरब में सारनाथ (वाराणसी) से लेकर पश्चिम में हस्तिनापुर (मेरठ) तक, प्रदेश के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थलों को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई है। देश के 15 पुरातात्विक महत्व के स्थलों के विकास, डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन और गाइड के रूप में 10 हजार युवाओं के कौशल विकास के जरिये जहां पर्यटन अनुभव समृद्ध होगा। वहीं यूपी के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। हालांकि, बौद्ध सर्किट जैसी अहम योजनाओं से यूपी का बाहर रहना मायूस करने वाला रहा।

बजट में आध्यात्मिक और विरासत से जुड़े सभी स्थलों की राष्ट्रीय स्तर पर मैपिंग और दस्तावेजीकरण की घोषणा से सारनाथ के स्तूपों व हस्तिनापुर में पांडवों और कौरवों के वैभव, राजसी संघर्षों व गाथाओं आदि से जुड़ी चीजों का बेहतर संरक्षण होगा। डिजिटल तकनीक के प्रयोग से देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने में भी मदद मिलेगी।

यहां व्याख्यान केंद्र व गाइड की सहायता से पर्यटकों को इससे जुड़ी जानकारी आसानी से मिल सकेगी। यहां विश्वस्तरीय पर्यटक सुविधाएं, क्यूरेटेड वॉकवे, इंटरपटेशन सेंटर व तकनीक आधारित स्टोरी टेलिंग की सुविधाएं होंगी। इससे पर्यटक सारनाथ व हस्तिनापुर के आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व को आसानी से समझ सकेंगे।

आईआईएम की मदद से निखारेंगे युवाओं का कौशल

बजट में होटल मैनेजमेंट और कैटरिंग टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए नए प्रशिक्षण और मानक तय करने की घोषणा की गई है। देश भर के 20 प्रतिष्ठित पर्यटन स्थलों पर 10 हजार गाइड को 12 हफ्तों का हाइब्रिड कोर्स का प्रशिक्षण इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) के सहयोग से दिलाया जाएगा। यह योजना भी प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोलेगी।

अयोध्या, वाराणसी समेत कुछ स्थलों पर ट्रायल के रूप में युवाओं को गाइड के रूप में प्रशिक्षित कर रोजगार से जोड़ा गया है। यही नहीं पर्यटन विभाग नाविकों, ई रिक्शा व ऑटो चालकों आदि को भी प्रशिक्षण दे रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार की इस योजना का लाभ यूपी को और बेहतर करने में मिलेगा। इससे पर्यटकों को और बेहतर जानकारी व सुविधाएं मिल सकेंगी।

डिजिटल डाक्यूमेंटेशन योजना से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

राज्य सरकार ने अपने यहां ऐतिहासिक महत्व के स्थलों से जुड़ी पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण कराने की शुरुआत की है। केंद्रीय बजट में सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों का डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन कर स्थानीय शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और कंटेंट क्रिएटरों के लिए भी रोजगार सृजित किए जाने की घोषणा की गई है। इसका भी लाभ यूपी को मिलेगा। छोटे शहरों में तीर्थ स्थल विकसित करने की योजना पर यूपी में पहले से काम चल रहा है। ऐसे में केंद्र का सहयोग इसे गति देगा।

बुद्धिस्ट सर्किट में खाली हाथ रहा यूपी

केंद्रीय बजट में बौद्ध पर्यटन स्थलों के विकास के लिए पूर्वोदय योजना की घोषणा की गई है। इसमें पूर्वोत्तर के पांच राज्यों अरुणाचल, असम, सिक्किम, मिजोरम और त्रिपुरा में बौद्ध सर्किट का विकास किया जाएगा। इस मामले में यूपी के हिस्से कुछ नहीं आया। प्रदेश में बौद्ध सर्किट में सारनाथ, कुशीनगर, संकिसा, कौशाम्बी आदि शामिल हैं। यहां विकास की काफी संभावनाएं हैं।

इसके लिए केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय को पूर्व में प्रस्ताव भी भेजा गया था लेकिन केंद्रीय बजट में कुछ नहीं मिला। वाइल्डलाइफ पर्यटन में ओडिशा, कर्नाटक और केरल में कछुआ ट्रेल्स और पुलिकट झील के आसपास बर्ड वॉचिंग ट्रेल्स बनाई जाएंगी, किंतु इसमें यूपी के हिस्से कुछ नहीं आया।