देहरादून से अनीता आशीष तिवारी की रिपोर्ट
Joshimath Disaster News सबसे पहले बड़े बयान की बात करेंगे जिसको सुनकर सियासत हैरान है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कहा कि विकास और विनाश साथ-साथ नहीं चल सकते क्योंकि वह ऐसे समय में जोशीमठ पहुंचीं जब उत्तराखंड के पहाड़ी शहर में 700 से अधिक घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं और भूस्खलन की अभूतपूर्व चुनौती का सामना कर रहे हैं। उमा भारती ने नई दिल्ली स्थित नीति निर्माताओं की आलोचना की, जो पहाड़ों, गंगा को ‘कम लटका हुआ फल’ मानते हैं, उन्होंने कहा कि उन्हें डर है कि ये नीति निर्माता एक दिन उत्तराखंड, गंगा और हिमालय को खा जाएंगे।

Joshimath Disaster News भारत के जोशीमठ की खबरों को सुनकर लोग सोच रहे होंगे कि ये अनोखा शहर है जिसे प्रकृति अपना रौद्र रूप दिखा रही है पर ऐसा नहीं है। दुनिया में एक ऐसा भी शहर है जिसकी आबादी एक करोड़ से ज्यादा है और वह इतनी तेजी से धरती में समा रहा है कि आने वाले कुछ समय में पूरी तरह से जमीनी दल-दल के अंदर होगा। इसके बाद समुद्र इसे अपने आगोश में ले लेगा। हम बात कर रहे हैं इंडोनेशिया की राजधानी और सबसे बड़े शहर जकार्ता के बारे में, जहां आने वाला भविष्य निश्चित ही संकट में है।
Joshimath Disaster News नहीं चाहिए ऐसा विकास जो हमारा करे विनाश

- Joshimath Disaster News वैज्ञानिक बताते हैं कि उत्तरी जकार्ता में हर साल 25 सेंटीमीटर की दर से जमीन नीचे धंस रही है। इसकी वजह से मकान क्षतिग्रस्त हो रहे हैं और नदियों व समुद्र का पानी शहर को डुबाने लगा है। समुद्र का पानी तेजी से आने पर यहां बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं। सबसे बड़ी समस्या ये है कि जमीन धंसने से पानी वही ठहर जाता है, जिसने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है।

- Joshimath Disaster News अब बात करते हैं आदि जगतगुरु शंकराचार्य की तपोभूमि और कत्यूरी राजाओं की राजधानी रहा जोशीमठ की जो आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। सातवीं शताब्दी के उत्तराखंड का प्राचीन नगर जोशीमठ भू-धंसाव की चपेट में है। यहां के लोग दहशत में हैं। न उनका घर है और न ठिकाना। इस डरावने मंजर में यहां के लोगों को न भूख लग रही है न प्यास और न ही नींद आ रही है। उन्हें केवल अपने जीवन को बचाने के लिए सुरक्षित जमीन और छत चाहिए।

Joshimath Disaster News कुछ महीने पहले जो जोशीमठ बाहरी पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की आवाजाही के कारण गुलजार रहता था, आज यह अजीब सी खामोशी ओढ़े हुए है जिसमें केवल सिसकियां ही सुनाई दे रही हैं। जानकारों का कहना है आधा जोशीमठ असुरक्षित है और इसके लिए वे विकास की खातिर बड़ी परियोजनाओं को जिम्मेदार ठहराते हैं। अब इन परियोजनाओं पर काम रोक दिया गया है। गैर सरकारी आंकड़ों के अनुसार एक हजार से ज्यादा भवन ढहने की स्थिति में हैं। विशेषज्ञों की अगुआई में बनी कमेटियों ने विकास को खतरे की घंटी ठहराने वाली कई रिपोर्ट दीं थीं, लेकिन सरकारों के कानों पर जू तक नहीं रेंगी।

- Joshimath Disaster News अध्यात्म के जरिए आत्म शांति का संदेश देने वाला जोशीमठ आज खुद अशांत है। यहां के घर हों या मंदिर या सरकारी अधिष्ठान या व्यापारिक प्रतिष्ठान सभी भू-धंसाव की जद में हैं। 2500 साल पहले आदि जगतगुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित ज्योतिष मठ और नरसिंह मंदिर में भी दरारें पड़ चुकी हैं। एक मंदिर ढह चुका है। 14 जनवरी मकर संक्रांति के बाद जोशीमठ के कई परिवारों ने उत्तरायणी में शुभ कार्य जनेऊ, मुंडन और विवाह करवाने की तैयारी कर रखी थी।

- Joshimath Disaster News जोशीमठ के दौरे पर गए विशेषज्ञों के दल का जोशीमठ की महिलाओं ने घेराव किया था और उन्हें अपने खेत-खलिहान-मकान दिखाए और कहा कि उन्हें ऐसा विकास नहीं चाहिए जो हमारा विनाश करें। रोते हुए एक वृद्ध महिला ने कहा कि ऐसे विकास का क्या फायदा जो जिंदगी के अंतिम मुहाने पर बैठे बुजुर्गों के लिए मौत से भी बदतर हो और इतिहास ये कहे कि देवभूमि में “एक था जोशीमठ”
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