Gangaur Vrat Kahani उत्तर भारत के कई हिस्सों में गणगौर का पर्व बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है. लेकिन आपको शायद यह जानकर हैरानी होगी कि इस दिन पति से छिपकर पूजा की जाती है. इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और भगवान शिव व माता पार्वती का पूजन करती हैं. इतना ही नहीं, कुंवारी लड़किया भी गणगौर का व्रत रखती हैं और अच्छे जीवनसाथी की कामना करती हैं. यह व्रत अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखा जाता है आइए जानते हैं आखिर क्यों पति से छिपकर की जाती है गणगौर की पूजा?
Gangaur Vrat Kahani गणगौर की पूजा पति से छिपकर क्यों?

- Gangaur Vrat Kahani गणगौर के दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी की कामना से व्रत रखती हैं. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर उसका विधि-विधान के साथ पूजन किया जाता है. लेकिन गणगौर का व्रत और पूजा पति से छिपकर की जाती है तभी यह फलदायी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणगौर के दिन महिलाएं अपने पति को यह नहीं बताती कि उनका व्रत है और यह बात उनसे छिपाकर रखी जाती है. इसके अलावा गणगौर की पूजा में भगवान को चढ़ाया गया प्रसाद भी पति को नहीं दिया जाता. कहते हैं कि इस व्रत का छिपाकर रखने से ही यह पूरा होता है और माता पार्वती अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देती हैं.

Gangaur Vrat Kahani गणगौर की पूजा में गुनों का महत्व
- Gangaur Vrat Kahani राजस्थान में गणगौर की पूजा में गुने यानि गहने बनाए जाते हैं और माता पार्वती को प्रसाद के तौर पर अर्पित किए जाते हैं. यह गुने मैदा, बेसन और हल्दी मिलाकर बनते हैं और इन्हें गहनों के आकार में बनाया जाता है. मान्यता है कि माता पार्वती को जितने गुने यानि गहने अर्पित किए जाते हैं घर में उतनी ही सुख-समृद्धि आती है. सबसे महत्वपूर्ण है कि गणगौर की पूजा करने के बाद ये जो महिला व्रत रखती है वह गुने अपनी सास, ननद या जेठानी को देती हैं और बड़ों से आशीर्वाद लेती है.
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