kurinji andavar temple : अंग्रेजन मेम की देसी मोहब्बत !

kurinji andavar temple गोरी अंग्रेज़न मेम लिलियन कैसे हिंदुस्तानी संस्कृति में रम कर लीलावती बन गईं ? कैसे आस्ट्रेलिया से आकर वह एक एक हिंदू तमिल के प्यार में बंधी और उन्हें जीवनसाथी बनाया. फिर कैसे एक प्रसिद्ध मंदिर बनवाया, इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी है. इस मंदिर का नाम है कुरिंजी अंदावर मंदिर. ये भगवान मुरुगन यानि कार्तिकेय का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है. दूर दूर से लोग इस मंदिर में दर्शन करने आते हैं. कोडाईकनाल आने वाले सैलानियों की यात्रा भी बगैर इस मंदिर में आए पूरी नहीं मानी जाती. ये मंदिर जिस जगह है, वहां चारों ओर खूबसूरत हरी-भरी वैली है. जहां 12 साल में एक बार कुरिंजी नाम का फूल जब खिलता है तो पूरी वैली और आसपास का इलाका नीले रंग में चहकने लगता है.

लिलियन से लीलावती बनीं युवती की कहानी kurinji andavar temple


अब आइए लिलियन से लीलावती की दिलचस्पी कहानी बताते हैं और ये भी कैसे एक अंग्रेज महिला हिंदू बनी और उसने एक प्रसिद्ध मंदिर बनवाया. लोग दक्षिण भारत और श्रीलंका में उन्हें लेडी रामनाथन के नाम से जानते हैं. लेडी रामनाथन का जन्म ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया में रोजा लिलियन हैरिसन के रूप में हुआ था. उनके माता-पिता, फ्रेडरिक ड्रेक हैरिसन और मैरी लॉयड पूल, दोनों ही बचपन में इंग्लैंड से ऑस्ट्रेलिया चले गए थे. उनके पिता सोने की खदान में काम करते थे

आध्यात्मिक गुरु ही फिर पति बन गए

एक युवा महिला के रूप में वह थियोसोफिकल आंदोलन से आकर्षित हुईं. आध्यात्मिक ज्ञान की खोज में श्रीलंका पहुंचीं, जो तब सीलोन के नाम से जाना जाता था. ओन्नम्बलम रामनाथन उनके गुरु बने. वह सीलोन में सॉलिसिटर जनरल भी थे. कई सालों से विधुर थे. श्रीलंका आने के बाद वह धीरे-धीरे हिंदू धर्मग्रंथों की ओर आकर्षित होने लगीं. उन्होंने हिंदू धर्म और संस्कृति को अपनाने का फैसला किया. उनका समय आमतौर पर रामनाथन के साथ ही गुजरता था. दोनों को एक दूसरे से प्यार हो गया. तब उन्होंने आपस में शादी करने का फैसला किया. उनसे 22 साल बड़े रामनाथन जाफ़ना प्रायद्वीप में जन्मे देशी सिविल सेवकों के एक धनी परिवार से थे. शादी के बाद वह ईसाई से हिंदू बन गईं. लीलावती नाम अपना लिया. हिंदू धर्म से जुड़ाव के बाद उनका काफी समय कोडईकनाल में गुजरने लगा. यहां उनके तीन घर थे.जब 1930 में उनके पति सर रामनाथन की मृत्यु हुई तो उन्होंने हिंदू विधवा का सफेद वस्त्र पहनना शुरू कर दिया. पति की याद में कुरिंजी अंदावर मंदिर बनवाया. वह हर दोपहर उसमें पूजा -अर्चना करती थीं.


दो हिंदू मंदिर बनवाए थे

31 जनवरी 1953 के दिन अखबार में लीलावती रामनाथन के निधन की खबर छपी. कोलंबो में संवाददाता के हवाले से छपी खबर में कहा गया कि लेडी रामनाथन का निधन श्रीलंका के जाफना स्थित रामनाथन कॉलेज के परिसर में हो गया. वह 83 वर्ष की थीं. 1942 में सीलोन विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें डॉक्टर ऑफ लॉ की मानद उपाधि प्रदान की गई. लेडी रामनाथन ने कई किताबें लिखीं, जिनमें रामायण का अंग्रेजी संस्करण भी शामिल है.श्रीमती रामनाथन ने दो कॉलेज के साथ दो हिंदू पूजा मंदिर बनवाए थे. एक कोलंबो में और दूसरा कोडईकनाल में. कोड़ाईकनाल में उन्होंने कुरिंजी अंदावर मंदिर बनवाने का फैसला इसलिए किया क्योंकि उनके धार्मिक गुरु यहीं रहते थे. उन्होंने कोडाईकनाल में जहां मंदिर बनवाया, वो जगह बहुत खूबसूरत और पवित्र लगी थी.

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