Mughal Harem Secret करीब 200 साल पहले यह उन दिनों की बात है, जब हिंदुस्तान में ईस्ट इंडिया कंपनी मजबूत हो रही थी और मुग़ल साम्राज्य कमजोर हो बिखरने लगा था। प्लासी युद्ध में मिली जीत की वजह से ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल और बिहार में राजस्व एकत्रित करने का अधिकार मिल गया। कंपनी समृद्ध होने लगी। उसके अधिकारी मुग़लों की जीवनशैली से प्रभावित हो उनकी ही तरह दरबार लगाने लगे थे। मुग़लों की तरह कई-कई हिंदुस्तानी औरतों से शादी करने, रखैल बनाने लगे थे।
Mughal Harem Secret भारतीय महिलाओं के दीवाने क्यों थे अंग्रेज़ अफसर

- Mughal Harem Secret ऐसा ही एक ब्रिटिश अधिकारी था सर डेविड ऑक्टरलोनी। अपनी जीवनशैली की वजह से वह दिल्ली के लोगों के बीच लूनी अख़्तर और वाइट मुग़ल के नाम से मशहूर था। उसने 13 हिंदुस्तानी औरतों से शादी कर रखी थी। उन दिनों दिल्ली में मुग़ल बादशाह शाह आलम की हुकूमत थी। 1804 में ऑक्टरलोनी ने मराठों के प्रमुख जसवंत राव होल्कर के हमले से दिल्ली की हिफाजत की थी। ख़ुश होकर शाहआलम ने उसे ‘नासिर उद-दौला’ यानी राज्य के रक्षक की मुग़ल उपाधि से सम्मानित किया। उसे मुग़ल दरबार में ब्रिटिश रेजिडेंट नियुक्त किया। दिन में तो वह एक सख्त अधिकारी की तरह सारे कामकाज निबटाता, लेकिन शाम होते ही वह बिलकुल बदल जाता। उसका कायांतरण मुग़लों की तरह हो जाता।

- Mughal Harem Secret हर शाम जब लाल क़िले की दीवार पर ढलती शाम की फीकी सुनहली आभा उतर रही होती, वह अपनी 13 बीवियों के साथ हाथी पर सवार हो यमुना और क़िले के बीच सैर को निकल पड़ता। उसकी 13 बीवियां 13 अलग-अलग हाथियों पर सवार रहतीं। वह ख़ुद सबसे आगे अपने हाथी पर सवार रहता। मुग़लों का लिबास पहनना, हुक्का पीना और उन्हीं की तरह नाच देखना – यह सब दिनचर्या में शामिल था उसकी कलकत्ता का बिशप हेबर जब ऑक्टरलोनी से मिला, तो वह उसकी मुग़लों वाली जीवनशैली देख विस्मित हो गया। उसने बदन पर हिंदुस्तानी जामा था और सिर पर पगड़ी। नौकर मोर के पंखों वाला पंखा झल रहे थे। हेबर लिखता है, ‘ऑक्टरलोनी के तंबू के दूसरी ओर लाल रंग के रेशमी कपड़ों वाला दूसरा तंबू था, जहां उसकी औरतें सोती थीं।’

Mughal Harem Secret हरम में रहती थी अनेकों सुंदर महिलाये
- Mughal Harem Secret कुछ ऐसा ही तजुर्बा हिंदुस्तान के गवर्नर जनरल जॉर्ज ईडन की बहनें एमिली और फेनी को पटना में हुआ। वे अपने भाई के साथ शाही दौरे पर 1837 में पटना आई थीं। 6 नवंबर को पटना में विशाल तंबू के अंदर गवर्नर जनरल का दरबार लगाया गया। सैकड़ों की संख्या में लोग गवर्नर जनरल के दर्शन के लिए उपस्थित हुए। किसी जागीर के राजा ठोस सोने का हौदा उपहार में देने के लिए अपने हाथी के साथ आए थे। एक दूसरे राजा ने चांदी के बने हौदे को उपहार में दिया। कुछ राजाओं को दरबार की ओर से जरी के पोशाकों से भी सम्मानित किया गया। यह बिलकुल मुग़ल दरबार का दृश्य था, जिसे पटना में अंग्रेज़ों द्वारा प्रस्तुत किया गया था। दोनों बहनें परदे के पीछे खड़ी इस दृश्यों को कौतुक के साथ देख रही थीं।

- Mughal Harem Secret ईस्ट इंडिया कंपनी का एक अन्य अधिकारी जेम्स एच्लीस किर्कपैट्रिक भी अपनी मुग़ल जीवनशैली के लिए बहुत मशहूर हुआ। वह 1798 से 1805 के बीच हैदराबाद का रेजिडेंट था। हालांकि वह प्रेसीडेंसी आर्मी में कर्नल के पद पर था, लेकिन घर में वह मुग़लों की तरह रहता। उन्हीं की तरह कपड़े पहनता, हुक्का पीता, सुपारी चबाता और रात में नाच-गाने का आनंद उठाता। इतना ही नहीं, उसने अपना छोटा-सा हरम भी बना रखा था। कंपनी ने यह भी चेतावनी दे रखी थी कि वे उन लड़कियों के साथ वैवाहिक संबंध भी न बनाएं, जिसके लिए उन्हें जीवनभर का पछतावा हो। बावजूद इसके अधिकांश लोगों ने उस चेतावनी को नज़रअंदाज़ करते हुए स्थानीय लड़कियों से शादियां की, उनसे संबंध बनाए और रखैलों की तरह रखा भी।

- Mughal Harem Secret आमतौर पर ब्रिटिश पत्नियां ज़्यादा खर्चीली होतीं। उनके कपड़े, उनके नौकरों के खर्च इतने ज़्यादा होते थे कि उतने में हिंदुस्तान की आधा दर्जन पत्नियां रखी जा सकती थीं। लेकिन, ब्रिटिश लेखक और कामसूत्र के अनुवादक सर रिचर्ड बर्टन का मानना था कि इसका असली कारण निजता थी । सर रिचर्ड का मानना था कि भारतीय महिलाएं प्रेम और निजता के मामले में किसी भी ब्रिटिश महिला से ज़्यादा निपुण होती हैं। उस दौर में हिंदुस्तान में रह रहे कई अंग्रेज़ों ने अपनी अंग्रेज़ियत को त्याग दिया था। वे हिंदुस्तानियों की तरह पोशाक पहन उर्दू शेरो-शायरी कर रहे थे। मुग़लों की तरह हरम रख रहे थे।
खबर में – लालू प्रसाद यादव की कहानी https://shininguttarakhandnews.com/lalu-prasad-yadav-latest/

