MiroFish AI इन दिनों एक 20 साल का चीनी स्टूडेंट छाया हुआ है। दरअसल गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसे दिग्गजों को पछाड़कर 20 साल के चीनी स्टूडेंट गुओ हांगजियांग ने भविष्य बताने वाला AI बना लिया है। यही वजह है कि इस समय वह दुनिया का नंबर 1 डेवलपर बन गया। बीजिंग यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले गुओ ने सिर्फ 10 दिनों में MiroFish नाम के AI इंजन को तैयार किया है।

यह कोई साधारण चैटबॉट नहीं बल्कि भविष्य बताने वाला चैटबॉट है। इस चैटबॉट की खासियत है कि यह हमारे समाज का आर्टिफिशियल मॉडल बनाकर संभावनाओं के आधार पर भविष्य बताता है। यह 10 लाख AI एजेंट्स की पूरी सोसायटी बना सकता है और उनके व्यवहार से निकलने वाले नतीजों के आधार पर बता सकता है कि असल दुनिया में क्या कुछ हो सकता है।

गुओ हांगजियांग के AI चैटबॉट के पीछे वाइब कोडिंग नाम की एक टेक्नोलॉजी है। इसमें AI की मदद से तेजी से कोडिंग की जाती है। उन्हें अपने कारनामे के लिए चीन के पूर्व सबसे अमीर व्यक्ति चेन तियानकियाओ से 24 घंटे के अंदर ही 4.1 मिलियन डॉल यानी कि लगभग 34 करोड़ रुपये की फंडिंग मिल चुकी है।गौर करने वाली बात है कि उनके चैटबॉट का पिछला वर्जन BettaFish पुरानी घटनाओं का विश्लेषण करता था, लेकिन नया सिस्टम भविष्य का अंदाजा लगाता है।

MiroFish एक OASIS नाम के इंजन पर काम करता है। इसके AI एजेंट्स का अपना व्यक्तित्व और याददाश्त होती है। यह किसी तय स्थिति को एजेंट्स के द्वारा वर्चुअल समाज में पैदा करता है और देखता है कि AI एजेंट्स किस तरह से बर्ताव करते हैं। इसे आप चीटियों की कॉलोनी की तरह समझ सकते हैं। यह वर्चुअल सिविक्स के नियमों पर आधारित है, जिससे यह समझना आसान हो जाता है कि कोई नई खबर या नीति समाज में किस तरह की प्रतिक्रिया पैदा करेगी।
इस AI ने अपनी ताकत दो उदाहरणों से दिखाई है। इन AI ने एक यूनिवर्सिटी के विवाद में इसका बिलकुल सही अनुमान लगाया कि लोगों का गुस्सा कब और कैसे बदलेगा। इसी तरह, इसने मशहूर उपन्यास ‘ड्रीम ऑफ द रेड चैंबर’ का वह अंत लिख दिया जो सदियों पहले खो गया था।हालांकि, ऐसा नहीं है कि इसकी कोई सीमा नहीं है। इस पर सिम्युलेशन चलाना काफी महंगा है और डिजिटल इंसानों की भूमिका में मौजूद AI एजेंट्स कभी-कभी असली इंसानों से ज्यादा आक्रामक व्यवहार करते हैं। फिर भी, इस तकनीक को देखकर एक्सपर्ट्स मानकर चल रहे हैं कि चीन के हाथ में भविष्य बताने वाली छड़ी लग गई है।

