Char Dham Yatra 2026 यमुनोत्री से गंगोत्री मैया की यात्रा कैसे करें ?

Char Dham Yatra 2026 आज 19 अप्रैल से शुरू हो रही चार धाम यात्रा 2026 को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित बनाने के लिए जिला प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं. इस वर्ष यात्रा प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से आधुनिक तकनीक का सहारा लिया गया है. साथ ही आज, 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के अवसर पर विश्वप्रसिद्ध यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलने जा रहे हैं. यमुनोत्री धाम के कपाट दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर खुलेंगे, जबकि गंगोत्री धाम के कपाट खुलने का शुभ मुहूर्त 12 बजकर 15 मिनट है.

गंगोत्री-यमुनोत्री धाम की यात्रा की शुरुआत Char Dham Yatra 2026


यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने से पहले मां यमुना की उत्सव डोली खरसाली स्थित यमुना मंदिर से भाई शनि देव महाराज के साथ सुबह 8 बजकर 15 मिनट पर यमुनोत्री के लिए रवाना होगी. गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलते ही चारधाम यात्रा का आगाज हो जाएगा. कपाट खोलने को लेकर तैयारी पूरी कर ली गई है.


यमुनोत्री से गंगोत्री की दूरी और कैसे पहुंचे ?

यमुनोत्री और गंगोत्री मंदिर उत्तरकाशी जिले में स्थित उत्तराखंड प्रसिद्ध चार धाम के पहले दो पड़ाव हैं। चार धाम यात्रा की शुरुआत यमुनोत्री मंदिर से शुरू होती है जिसके बाद यात्री गंगोत्री मंदिर पहुंचते हैं। गंगोत्री के बाद केदारनाथ और बद्रीनाथ के दर्शन किये जाते हैं। यमुनोत्री और गंगोत्री मंदिर दोनों एक ही जिले में स्थित हैं।यमुनोत्री से गंगोत्री की दूरी लगभग 230 किलोमीटर है। यमुनोत्री से गंगोत्री की यह दूरी लगभग 7-8 घंटे में पूरी की जा सकती है। इसलिए अधिकतर लोग दोनों मंदिरों के दर्शन आसानी से कम समय में कर लेते हैं। यमुनोत्री, यमुना नदी का उद्गम स्थान है और यमुनोत्री जाने का सड़क मार्ग यमुना नदी के साथ होता हुआ यमुनोत्री मंदिर पहुंचता है, वहीँ गंगोत्री, गंगा नदी का उद्गम स्थान है और गंगोत्री जाने का रास्ता भागीरथी नदी के साथ होता हुआ गंगोत्री मंदिर तक पहुंचता है।

22 को खुलेंगे केदारनाथ धाम के कपाट

चार धाम यात्रा की शुरुआत के बाद 22 अप्रैल की सुबह 8 बजे 11वें ज्योतिर्लिंग बाबा केदारनाथ धाम के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे. 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट खोले जाएंगे. प्रशासन का दावा है कि इस बार यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी चीज की कमी नहीं होने दी जाएगी. यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य, पेयजल के साथ ही रहने और खाने की पर्याप्त व्यवस्था की गई है. प्रशासन द्वारा गौरीकुंड से केदारनाथ मंदिर तक पूरे यात्रा मार्ग की निगरानी के लिए एक हाई-टेक मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित किया गया है. इसके तहत एक विशेष कंट्रोल रूम बनाया गया है, जहां से यात्रा रूट पर हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी.