El Nino Effect भारत में इन दिनों भीषण गर्मी के बीच नौतपा चल रहा है. सुबह की धूप से शुरू होने वाली गर्मी रातभर लोगों के पसीने छुटवाती है. तपती गर्मी के बीच हर कोई बारिश का इंतजार कर रहा है. मौसम विभाग के मुताबिक, भारत में मानसून के मौसम में अल नीनो के आने की पुष्टि हो चुकी है. इसके चलते देश में पिछले 3 सालों में सबसे कम बारिश होगी. इसके चलते किसानों पर काफी प्रभाव पड़ सकता है.
अल नीनो का बढ़ेगा प्रभाव El Nino Effect

अल नीनो प्रशांत महासागर में पैदा होने वाली एक प्राकृतिक घटना है, जिसमें समुद्र की सतह का तापमान तेजी से बढ़ जाता है, जो पूरी दुनिया में हवाओं का रुख और बारिश के पैटर्न को बदलकर भीषण गर्मी और सूखे का कारण बनता है. इससे एशिया का मौसम भी प्रभावित होता है. अनुमान लगाया जा रहा है कि यह जून 2026 की शुरुआत में आएगा. बताया जा रहा है कि आने वाले महीनों में ये और भी ज्यादा मजबूत होगा. बता दें कि अल नीनो के असर से गर्मियों-सर्दियों के मौसम में गड़बड़ी हो सकती है, जिससे चीन जैसे देशों में बाढ़ तो भारत में सूखे की स्थिति बढ़ सकती है.

पिछले 3 सालों में सबसे कम बरसेंगे मेघ
मौसम विभाग के मुताबिक जून के महीने में अल नीनो के कमजोर अवस्था में आने की संभावना है. जुलाई-अगस्त के मध्य में यह तेजी से आ सकता है. वहीं सितंबर में अल नीनो पूरी तरह मजबूत हो जाएगा, जिससे भारत समेत दुनियाभर में इसका प्रभाव देखने को मिलेगा. ऐसे में इसको लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं. ऑस्ट्रेलिया के मौसम विज्ञान ब्यूरो (BOM) ने हाल ही में अनुमान लगाया है कि अल नीनो की स्थिति जून 2026 की शुरुआत में ही उभर सकती है, जबकि चीन के नेशनल क्लाइमेट सेंटर ने भी बताया कि प्रशांत महासागर में बढ़ता तापमान अल नीनो स्टेज में एंटर कर चुका है और आने वाले महीनों में यह और मजबूत हो सकता है.
चिंता की बात ये है कि NASA की ओर से एनलाइज किए गए सैटेलाइट ऑब्जर्वेशन से प्रशांत महासागर की सतह के नीचे गर्म पानी के बड़ा स्टोरेज का पता चला है. साइंटिस्ट इस अंडरवॉटर हीट स्टोरेज को अल नीनो के बनने का प्रमुख संकेत मानते हैं, क्योंकि यहां फंसी हुई गर्मी धीरे-धीरे ऊपर उठती है और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में फैल जाती है. भारत के लिए यह घटनाक्रम खासतौर पर इसलिए अहम है क्योंकि अन नीनो एतिहासिक रूप से कमजोर मानसून रेन, बार-बार आने वाली लू और एग्रीकल्चर समेत जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव से जुड़ा रहा है. इसके आने से देशभर का मौसम प्रभावित होने की चिंता लगातार बढ़ रही है.

