Uttarakhand Election 2027 उत्तराखंड विधानसभा चुनाव दिसंबर से पहले !

Uttarakhand Election 2027 देश के पांच राज्यों में होने वाले प्रस्तावित विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी नेतृत्व और उत्तराखंड की धामी सरकार की तेजी इशारा कर रही है कि केंद्र सरकार वक्त से पहले सभी 5 राज्यों में  प्रस्तावित विधान सभा चुनाव कराने की पूरी तैयारी कर रही है। उत्तराखंड की बात करें तो जिस तरह से बीते दिनों राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का दौरा हुआ और उन्होंने लंबी मैराथन बैठक पार्टी संगठन ,विधायकों और सरकार के कैबिनेट मंत्रियों के साथ की है उसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी बड़ा दिल दिखाते हुए आनन फानन भारी संख्या में दायित्वधारियों की फौज उत्तराखंड में उतार दी है। हालांकि उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की तारीखें फरवरी या मार्च 2027 में तय हैं, लेकिन राज्य में बढ़ती चुनावी सरगर्मियों के चलते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी निर्माण कार्यों को 15 अक्टूबर से पहले पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

कांटे की टक्कर वाली विधानसभा सीटें होंगी निर्णायक Uttarakhand Election 2027

वहीं पहाड़ों से लेकर मैदान तक लगातार विधायकों और खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ताबड़तोड़ दौरे , घोषणाएं , शिलान्यास और लोकार्पण कर रहे हैं राजनीति को करीब से समझने वाले बताते हैं कि उत्तराखंड में लगने वाला आगामी महाकुंभ भी समय से पहले चुनाव कराने में एक बड़ा कारण हो सकता है ,  और जिस तरह से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हिंदुत्व के एजेंट को आगे बढ़ते हुए आगामी महाकुंभ को लेकर गंभीर दिख रहे हैं ऐसे में वो नहीं चाहेंगे कि चुनावी की तैयारी और भव्य कुम्भ का सफल संचालन आपस में उलझ कर रह जाए।

रिकॉर्ड बना गया था पिछला विधानसभा चुनाव (2022)  

उत्तराखंड के बारे में माना जाता रहा है कि यहाँ बारी बारी से भाजपा और कांग्रेस की सरकारें जनता बनती रही है लिहाज़ा मौजूदा भाजपा सरकार ने उस मिथक को तोड़कर दोबारा सत्ता पर कब्जा किया और मौजूदा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी अपना कार्यकाल आखिरी साल तक जोरदार नेतृत्व क्षमता से कायम रखते हुए सभी संभवनाओं को खत्म कर दिया है। 2022 के चुनाव में  भाजपा ने 47 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस 19 सीटों के साथ विपक्षी दल के रूप में सदन में पहुंची और इस तरह राज्य में हर पांच साल में सरकार बदलने की लंबे समय से चली आ रही परंपरा को तोड़ दिया था।

राहुल गांधी के अधूरे दौरे से जोश में कांग्रेस

बात विपक्ष की करते तो भले ही उनके बड़े नेता राहुल गांधी का दौरा अधूरा ही रह गया हो लेकिन मुख्य विपक्षी दल के रूप में पार्टी राज्य की अंदरूनी खींचतान को दूर कर चुनावी मोड में आ चुकी है। 2017 से तुलना करें तो कांग्रेस का वोट शेयर 2022 में  33.5% से बढ़कर 37.9% हो गया था। लिहाज़ा पार्टी बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर जनता का विश्वास जीतने की रणनीति पर काम कर रही है। पूर्व सीएम  हरीश रावत , प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल , नेता विपक्ष यशपाल आर्य , डॉ हरक सिंह रावत और सभी कांग्रेस के सीनियर लीडर सत्ता वापसी के लिए सड़कों पर तो एकजुट दिख रहे हैं लेकिन बात जब टिकट बटवारे और कौन किस सीट पर लड़ेगा इसके दावेदारी की होगीओ तो सर फुटौवल की भी प्रबल सम्भावना है।

SIR के साथ साथ सरकार और पार्टियां भी एक्शन में

श्रीनगर, टिहरी, गदरपुर, नरेंद्रनगर जैसी सीटों पर भाजपा की जीत का अंतर मात्र 587 से 1,798 वोटों तक रहा. इन सीटों पर थोड़ी सी भी एंटी-इंकम्बेंसी भाजपा को नुकसान पहुंचा सकती है. इसके अलावा हल्द्वानी, चकराता, बद्रीनाथ, धारचूला, किच्छा, बाजपुर और रुद्रप्रयाग जैसी सीटें भी भाजपा के लिए चिंता का विषय हैं. रुद्रप्रयाग केदारनाथ यात्रा मार्ग पर स्थित है, जहां पलायन, रोजगार और यात्रा सुरक्षा जैसे मुद्दे हमेशा गर्म रहते हैं.हरिद्वार जिले की मंगलौर सीट मुस्लिम बहुल क्षेत्र है. 2022 में बसपा प्रत्याशी ने कांग्रेस को हराया, जबकि उपचुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को 449 वोटों से हराया।

अल्मोड़ा जिले की द्वाराहाट सीट पर कांग्रेस के मदन बिष्ट ने भाजपा के अनिल शाही को मात्र 182 वोटों से हराया…हरिद्वार ग्रामीण सीट पर कांग्रेस की अनुपमा रावत (हरीश रावत की बेटी) ने भाजपा के स्वामी यतीश्वरानंद को 4,472 वोटों से हराया था। खटीमा सीट भाजपा के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन सकती है. 2022 में कांग्रेस के भुवन चंद्र कापड़ी ने 52% वोट पाकर धामी को हराया.2022 के नतीजों के बाद प्रदेश में एक ऎसी  रिकॉर्डतोड़ सरकार बनी जिसके मुखिया ने भी इतिहास रचते हुए मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। हांलाकि विकास और हिंदुत्व को अपना कवच बनाने वाले सीएम पुष्कर सिंह धामी के सामने कई चुनौतियां भी आज खड़ी है। इसमें सबसे बड़ी है पूरे कार्यकाल के बाद सत्ता में पार्टी की वापसी कराना , आगामी चुनाव में अंकिता भंडारी हत्याकांड से महिला सुरक्षा पर उठते सवाल , भर्ती घोटाले और पेपर लीक बेरोजगारी से युवाओं में बढ़ता रोष भी मुद्दा बन सकता है वहीँ पहाड़ों में तेजी से बढ़ता पलायन , अपराध और गांवों का सूना होना सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है. इन्हीं मुद्दों की बैसाखी पर सवार विपक्ष को सत्ता वापसी का रास्ता आसान नजर आ रहा है।