Dhumavati Jayanti आज आपकी किस्मत खोलेंगी धूमावती माता  

Dhumavati Jayanti हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन धूमावती जयंती मनाई जाती है. धूमावती माता उन 10 महाविद्याओं में से सातवीं देवी मानी जाती हैं, जिनकी पूजा गुप्त नवरात्रि के दौरान की जाती है. मान्यताओं के अनुसार, माता धूमावती की उपासना से दुख, शारीरिक कष्ट और हर प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिल जाया करती है.यही नहीं मान्यता ये भी है कि माता की पूजा करने से केतु ग्रह दोष से छुटकारा मिल जाता है. इस दिन पूजन के साथ-साथ कुछ विशेष उपाय करने केतु की महादशा से भी मुक्ति प्राप्त होती है. दृक पंचांग के अनुसार, इस साल धूमावती जयंती ज्येष्ठ मास में 22 जून को मनाई जाने वाली है. आइए जानते हैं कि धूमावती माता कौन हैं और जानते हैं उनकी पूजा विधि.

माता धूमावती रहस्य कथा और साधना Dhumavati Jayanti

स्वयं की की माया से ग्रसित हो गई

एक कथा आती है जब हम माता धूमावती को प्रत्यक्ष रूप में देखते हैं। कहा जाता है एक बार भगवान शिव और माता पार्वती दोनों कहीं विचरण कर रहे थे और उस वक्त एक भक्त की पुकार उसकी रक्षा के लिए खड़ी हो जाती है। लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनती हैं कि भगवान शिव और माता पार्वती को एक दूसरे के विरुद्ध खड़ा होना पड़ता है। तब देवी क्रोधित अवस्था में भगवान शिव को भक्षण कर लेती हैं यानी कि उन्हें खा जाती है ताकि वह अपने भक्तों की रक्षा कर सके जिस स्वरुप में उन्होंने भगवान शिव का भक्षण कर लिया था, अर्थात उन्हें खा लिया था। उन्हें निगल लिया था यही स्वरुप भगवती धूमावती के नाम से प्रसिद्ध होता है। जब माता को यह एहसास होता है कि उन्होंने अपने ही पति को निगल लिया है तब वह बहुत दुखी हो जाती हैं। विधवा का रूप धारण कर लेती हैं। शरीर पर सफेद वस्त्र आ जाते हैं। बूढ़ा स्वरूप हो जाता है और बहुत विलाप करने लगती है। भगवान शिव बाहर निकल कर आते हैं और कहते हैं देवी! तुम स्वयं की की माया से ग्रसित हो गई हो। स्वयं को जानो तुम पार्वती हो और अपनी वास्तविक रूप को ग्रहण करो तुमने अपने ही पति को निगल लिया था इसलिए तुम विधवा हो गई थी।

जगत में तुम्हारा यह रूप प्रसिद्ध होगा और तुम धूमावती महाविद्या के नाम से इस संसार में पूजित रहोगी। जेष्ठा देवी, डुमिनी, धूमावती इत्यादि नामों से तुम्हें लोग तो करेंगे। तुम्हारी साधना से बहुत लाभ लोगों को प्राप्त होगा। देवी तुम दुर्भाग्य की देवी, मां लक्ष्मी की बड़ी बहन! पीपल वृक्ष में निवास करने वाली। दरिद्रता, अलक्ष्मी और ज्येष्ठा के नामों से जानी जाओगी।तुम कौवे पर सवार होगी। मनुष्य के जीवन से साधना करने पर उसके दुर्भाग्य दरिद्रता को दूर करोगी।तुम्हारी ध्वनि हजार गीदड़ों के चिल्लाने के जैसे उत्पन्न होगी जो मन में भय उत्पन्न करने वाली होगी। तुम्हारा संबंध भूख से है इसलिए जो भी आत्माएं अतृप्त और भूखी रहेगी वह सभी तुम्हारी सेवा में तत्पर रहेंगे।

तुम्हारी साधना करने वाला विपक्षियों का नाश करेगा और समस्त रोगों से छुटकारा पाएगा।तुम्हारा मूल मंत्र ॐ धूम धूम धूमावती देवी स्वाहा होगा। जो भी तुम्हारी साधना, पूजन इत्यादि करेगा उसे अद्भुत लाभ देखने को मिलेगा। तुम हर प्रकार की दुख दरिद्रता का नाश करने वाली देवी के रूप में जानी जाओगी और अपने कार्यों में स्वयं अपने पति को भी किनारे रखकर तत्पर रहने वाली होने के कारण। हर प्रकार से किसी भी अवस्था में जाकर अपने भक्तों का कल्याण अवश्य करोगी। इसके बाद देबी भगवती की उपासना के लिए बहुत सारे देवी देवता और ऋषि मुनियों ने इनकी साधना की।