Betel leaf भारत में पान खाने की परंपरा काफी पुरानी है। खासकर घर के बुजुर्ग अक्सर खाना खाने के बाद या खाली समय में पान खाना पसंद करते हैं। कई लोग स्वाद के लिए पान खाते हैं तो कुछ इसे पाचन बेहतर करने या मुंह की बदबू दूर करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। पान का पत्ता अपने आप में कई गुणों से भरपूर माना जाता है, लेकिन जब इसमें तंबाकू, सुपारी, गुटखा और चूना जैसी चीजें मिलाई जाती हैं, तब यही पान गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है।
क्या पान का पत्ता नुकसान करता है ? Betel leaf

सिर्फ पान का पत्ता चबाना आमतौर पर कैंसर का कारण नहीं माना जाता। इसमें कुछ ऐसे प्राकृतिक तत्व होते हैं जो पाचन में मदद कर सकते हैं और मुंह को ताजगी देते हैं। असली खतरा तब शुरू होता है, जब पान में तंबाकू, सुपारी, गुटखा या दूसरे तंबाकू वाले मसाले मिलाए जाते हैं।
पान में मिलाई जाने वाली चीजें क्यों हैं खतरनाक ?
तंबाकू और सुपारी को मुंह के कैंसर के सबसे बड़े जोखिम कारकों में माना जाता है। तंबाकू में निकोटिन होता है, जो तेजी से दिमाग पर असर डालता है और इसकी लत लगा देता है। वहीं चूना मुंह की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचाता है, जिससे तंबाकू के हानिकारक रसायन शरीर में आसानी से पहुंचने लगते हैं। बार-बार इन चीजों का सेवन करने से मुंह के अंदर घाव बनने लगते हैं। समय के साथ ये घाव ठीक नहीं होते और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का रूप ले सकते हैं।

शरीर में कैसे बढ़ता है कैंसर का खतरा ?
तंबाकू और सुपारी में मौजूद हानिकारक रसायन मुंह की कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान पहुंचाते हैं। डीएनए का काम यह तय करना होता है कि कोशिकाएं कब बनें और कब खत्म हों। जब डीएनए खराब हो जाता है, तो शरीर का नियंत्रण कमजोर पड़ने लगता है। खराब कोशिकाएं खत्म होने के बजाय तेजी से बढ़ने लगती हैं। यही अनियंत्रित कोशिका वृद्धि आगे चलकर कैंसर का कारण बन सकती है।
निकोटिन कैसे बनाता है लत ?
तंबाकू में मौजूद निकोटिन कुछ ही सेकंड में दिमाग तक पहुंच जाता है। इससे डोपामाइन नाम का रसायन निकलता है, जिससे कुछ समय के लिए खुशी और आराम महसूस होता है। लेकिन इसका असर जल्दी खत्म हो जाता है और फिर दोबारा तंबाकू खाने की इच्छा होती है। यही आदत धीरे-धीरे लत में बदल जाती है।
वैज्ञानिक क्या कहते हैं ?
20वीं सदी में भारत, ताइवान और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों के डॉक्टरों ने देखा कि इन क्षेत्रों में मुंह के कैंसर के मामले ज्यादा हैं। जांच में पाया गया कि इन मरीजों में नियमित रूप से पान, सुपारी और तंबाकू चबाने की आदत आम थी। बाद में वैज्ञानिक शोधों में यह भी सामने आया कि सुपारी में पाया जाने वाला एरेकोलिन नाम का रसायन, जब चूने और लार के संपर्क में आता है, तो मुंह की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। लंबे समय तक इसका सेवन कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है।

