Why are hands clapped during worship शिवजी कृपा प्राप्त करने के लिए भक्त नियमित शिवालय में जाकर शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। सोमवार के दिन विशेष रूप से शिवजी की पूजा की जाती है। इस दौरान आपने मंदिर में कुछ भक्तों को शिवलिंग के सामने ताली बजाते हुए अवश्य देखा होगा। जिससे मन में यह सवाल आता है कि आखिर ऐसा क्यों किया जाता है और इसके पीछे क्या मान्यता है। इसी के जवाब में ज्योतिष एक्सपर्ट ने बताया कि यह केवल उत्साह व्यक्त करने का माध्यम नही हैं, बल्कि भगवान के प्रति आनंद, श्रद्धा और पूर्ण सहभागिता का प्रतीक है। ऐसा करने से आसपास का वातावरण अधिक शुद्ध होता है। आइए ज्योतिषी से विस्तार से जानते हैं शिवलिंग के सामने ताली बजाने का महत्व, लाभ और शास्त्रीय नियम
शिवलिंग के सामने ताली क्यों बजाते है ? Why are hands clapped during worship

ज्योतिष एक्सपर्ट बताते हैं कि भारतीय सनातन परंपरा में ताली बजाना केवल उत्साह व्यक्त करने का माध्यम नहीं होता है। इसे आरती, भजन और कीर्तन के दौरान ईश्वर के प्रति आनंद, श्रद्धा और पूर्ण सहभागिता का प्रतीक माना गया है। जब भक्त ताली बजाते हुए भगवान का गुणगान करते हैं, तब उनका मन, वाणी और शरीर एक साथ उपासना में लग जाते हैं। इसीलिए सामूहिक भजन से लेकर आरती तक में ताली बजाने का विशेष महत्व होता है।

भगवान शिव को ध्यान, मौन और समाधि का देवता माना गया है। साथ ही, वो नटराज के रूप में सृष्टि की दिव्य लय और नाद के भी अधिष्ठाता हैं। ऐसे में भोलेनाथ की आराधना में ध्वनि का अपना अलग स्थान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आरती के दौरान बजने वाली घंटी, शंख और ताली की संयुक्त ध्वनि वातावरण को सात्विक बनाती है। साथ ही, यह भक्त के मन को एकाग्र करने में भी सहायक मानी गई है। शिवलिंग के सामने ताली बजाना का उद्देशय भगवान को जगाना नहीं है, बल्कि अपने भीतर सोई हुई भक्ति, जागरूकता और सकारात्मक चेतना को जगाना है।

शिवलिंग के सामने कितनी बार ताली बजानी चाहिए, इसकी कोई स्पष्ट और अनिवार्य संख्या शास्त्रीय विधान में देखने को नहीं मिलती है। किसी भी प्रमुख शैव ग्रंथ में यह बात निर्धारित नहीं की गई है। ऐसे में पूजा के समय ताली बजाना भाव प्रधान परंपरा है, न कि अनिवार्य धार्मिक नियम। हालांकि, लोक परंपराओं में तीन तालियों का प्रतीकात्मक उल्लेख मिलता है। अगर किसी मंदिर या परंपरा में शांत भाव के साथ ध्यान किया जाता है, तो वहां उसी मर्यादा का पालन करना उचित माना गया है।

