Political Rakhi Stunt नेता जी की “रक्षा बंधन पॉलिटिक्स” से क्या मिलेगा वोट ?

Political Rakhi Stunt उत्तराखंड में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने है , लेकिन राजनीतिक सरगर्मियां बता रही है कि दिसंबर आते-आते उत्तराखंड चुनावी मोड में चला जाएगा। ऐसे में न सिर्फ सरकार के पास बल्कि विपक्ष के पास भी जनता के बीच अपनी मौजूदगी और सक्रियता बढ़ाने के लिए गिनती के दिन बचे हैं। ऐसे में अब त्यौहारों का सीजन शुरू हो रहा है , तो हमारे नेता जी भी अब इन त्योहारों का राजनीतिकरण करते हुए जमकर इमोशनल रिलेशन बनाने में लग गए हैं। इसकी शुरुआत बीते पूरे हफ्ते रक्षाबंधन के पॉलिटिकल इवेंट में जमकर दिखाई दिया।

चुनावी साल में सियासी हुई राखी – वोटबैंक की तैयारी Political Rakhi Stunt

क्या मंत्री , क्या विधायक क्या कांग्रेस क्या भाजपा , यहाँ तक कि खुद को दावेदार बताने वाले नेता वेडिंग हाल , होटल से दफ्तरों तक अपनी खर्चीली पॉलीटिकल रक्षा बंधन इवेंट को ऑर्गेनाइज करते हुए दिखाई दिए… इस पूरे हफ्ते में कहीं 2000 कहीं 5000 तो कहीं 25000 बहनों को जुटाने का दावा किया गया राखियां बंधवा कर सोशल मीडिया पर पोस्ट की गयी और खुद को महिलाओं क्वे पोलिटिकल भाई बनाकर राखी बंधवाई। ये अलग बात है कि इस इवेंट के बाद नेता जी और बहन जी का रिश्ता कितना बरकरार रहेगा ये दोनों ही नहीं जानते होंगे ठीक वैसे ही जैसे वो एक रोज पहले तक एक दूसरे के बारे में भी नहीं जानते होंगे।

लेकिन सवाल सबसे बड़ा यह है की ऐसे भव्य आयोजन रक्षाबंधन का भावुक त्यौहार भाई-बहन के रिश्ते का प्यार और वोट बैंक को समेटने का यह प्रयास कितना सफल होगा ? एक्सपर्ट्स कहते हैं कि राखी के बदले वोट मिलेगा या नहीं इसका नतीजा तो 2027 की वोटिंग के बाद जब EVM खुलेगा तो पता चलेगा लेकिन भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों में इस बात की होड़ लगी दिखाई दी कि किस नेता के रक्षाबंधन कार्यक्रम में कितनी बहने पहुंची और नेताजी की कलाई पर कितनी राखियां बांधी गई।

सबसे चर्चित पॉलिटिकल रक्षा बंधन इवेंट देहरादून के मसूरी विधायक और कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के हाई प्रोफाइल इवेंट में नजर आया जहां दावा किया गया की 20000 से ज्यादा महिलाओं ने नेताजी को राखी बांधी और उन्हें आशीर्वाद दिया। हालांकि नेताजी की दोनों कलाइयों को गौर से देखने पर बमुश्किल लगभग 100 राखियां ही आपको दिखाई देंगी लेकिन भीड़ मैनेजमेंट के माहिर कहे जाने वाले मंत्री गणेश जोशी इस पूरे कार्यक्रम में गदगद नजर आए और प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अपने मंच पर बुलाकर उन्होंने अपनी ताक़त और दावेदारी दोनों मजबूत कर लिया।

वहीँ अलग अलग जगह देहरादून में कई विधायकों और टिकट के दावेदारों के बीच रक्षाबंधन पर महिलाओं की भीड़ जुटाने की जैसे होड़ मच गई। कैंट विधानसभा में भी कई राखी के इवेंट दोनों ही पक्ष के नेताओं ने आयोजित किया। भाजपा प्रवक्ता और मजबूत दावेदार कुंवर जपेन्द्र ने जहाँ होटल में राखियां पहनने के लिए बहनों को जमा किया तो वही एक और दावेदार सिद्धार्थ अग्रवाल ने पार्टी कार्यालय में पार्टी संगठन से जुडी बहनों से राखियां बंधवा कर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। वही कांग्रेस के एक नेताजी के रक्षाबंधन कार्यक्रम में तो जमकर साड़ियां बांटी गई और पकवान परोसे गए। यहाँ कांग्रेस के कई बड़े नेता भी जुटे थे और भीड़ भी उनकी उम्मीद से ज्यादा पहुंच गई थी।

यानी आप कह सकते हैं कि चुनावी साल में त्यौहार भी राजनीति के रंग में रंगने लगे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में कृष्ण जन्माष्टमी , नवरात्रि , दशहरा और दीपावली का त्यौहार आने वाला है। ऐसे में प्रदेश की जनता को और खासकर अपने अपने वोटर को इन नेताओं के अलग-अलग रूप भी दिखाई देंगे। जहां मकसद जनता के बीच त्यौहार के सहारे अपने वोट बैंक को मजबूत बनाना है , लेकिन जनता सब समझती और जानती है। ऐसे में नेताओं के यह हथकंडे उनके लिए कितने चुनावी फायदेमंद साबित होंगे यह तो नतीजे ही बताएंगे , लेकिन ऐसे आयोजन से कहीं ना कहीं जनता को अल्पकालिक थोड़ा बहुत फायदा तो जरूर हो गया है….