Amazing Police Case गजब केस – पुलिसवाले ने पुलिसवाले से मांगी रिश्वत

Amazing Police Case पुलिस परेशान दुखियारे लोगों की मदद करती है , पुलिस वर्दी में मसीहा होती है , और भी न जाने क्या क्या कहते हैं लेकिन अब इस स्टोरी को भी गौर से पढ़ लीजिये हुजूर जहाँ पुलिसवाले से साइबर ठगी के एक मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर ही गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। आरोप है कि 60 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी के शिकार परिवार से फ्रीज हुई रकम अदालत के आदेश के बाद वापस कराने के नाम पर विवेचक और एक सिपाही ने रिश्वत मांगी। पीड़ित परिवार का दावा है कि विवेचक को करीब 4.20 लाख रुपये दिए गए, लेकिन इसके बावजूद खाते में पूरी रकम वापस नहीं आई।बाद में अन्य पुलिसकर्मियों पर भी रकम वापस कराने के बदले 20 प्रतिशत कमीशन मांगने का आरोप लगाया गया। शिकायत के बाद सब इंस्पेक्टर और सिपाही के खिलाफ रिश्वतखोरी की एफआईआर दर्ज की गई है।

60 लाख की ठगी के बाद 33 लाख रुपये हुए थे फ्रीज Amazing Police Case


मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रयागराज में तैनात एक महिला कांस्टेबल के भाई के साथ साइबर ठगी कर करीब 60 लाख रुपये की रकम ऑनलाइन ट्रांसफर कर ली गई थी। मामले की शिकायत साइबर क्राइम थाने में दर्ज कराई गई। पुलिस की कार्रवाई के दौरान ठगी की रकम में से करीब 33 लाख रुपये ऐसे खातों में मिले, जिन्हें पुलिस ने फ्रीज करा दिया।इसके बाद अदालत ने फ्रीज की गई रकम को पीड़ित के खाते में रिलीज करने का आदेश दिया। आरोप है कि अदालत के आदेश के बाद रकम वापस कराने के लिए केस के विवेचक उप निरीक्षक ओमनारायण गौतम और सिपाही अभिषेक कुमार ने पीड़ित परिवार से कथित तौर पर पैसे की मांग की।

4.20 लाख देने का आरोप, फिर भी सिर्फ 24 लाख लौटे

पीड़ित परिवार का आरोप है कि रकम रिलीज कराने के नाम पर विवेचक को अलग-अलग माध्यमों से कुल करीब 4.20 लाख रुपये दिए गए। इसके बावजूद फ्रीज रकम में से सिर्फ 24 लाख रुपये ही खाते में वापस आए।जब महिला कांस्टेबल दोबारा साइबर क्राइम थाने पहुंची और शेष रकम के बारे में जानकारी मांगी तो आरोप है कि वहां मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने भी रकम वापस कराने के एवज में 20 प्रतिशत कमीशन की मांग की। लगातार कथित मांगों से परेशान होकर महिला कांस्टेबल और उसके भाई ने मामले की शिकायत पुलिस कमिश्नर से की।

शिकायत के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप

पुलिस कमिश्नर से शिकायत के बाद मामले की जांच कराई गई। आरोपों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई और सब इंस्पेक्टर ओमनारायण गौतम तथा कांस्टेबल अभिषेक कुमार के खिलाफ रिश्वतखोरी के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई। मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि साइबर अपराध के मामलों में पीड़ित पहले ही आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान होता है। ऐसे में यदि पुलिस स्तर पर ही रकम वापस कराने के नाम पर अवैध वसूली के आरोप सामने आते हैं तो यह साइबर अपराध से निपटने की व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब पुलिस की जांच में यह स्पष्ट होगा कि कथित रिश्वत की रकम किस तरह ली गई, इसमें और कौन-कौन लोग शामिल थे और अदालत के आदेश के बावजूद पूरी रकम पीड़ित को क्यों नहीं मिल सकी।खबर मीडिया रिपोर्ट पर आधारित है हम इसके तथ्यों की पुष्टि नहीं करते हैं।