Viral Hanuman Mandir मध्य प्रदेश के उज्जैन में हनुमान जी ‘अंगद के पैर’ की तरह अचल खड़े हो गए हैं. उनकी 8 फीट ऊंची प्रतिमा को हिलाने में प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है. श्रीरामचरितमानस के लंकाकांड में एक प्रसंग आता है. जब अंगद जी ने रावण के भरे दरबार में उसे चुनौती देते हुए अपना पैर जमीन पर रोप दिया और कहा कि इसे हिलाकर दिखाओ. दरबार में मौजूद बड़े-बड़े राक्षस आए, लेकिन अंगद जी का पैर टस से मस नहीं हुआ. क्योंकि उसे स्वयं विधाता ने अचल कर दिया था.श्रद्धालुओं का मानना है कि बजरंगबली की प्रतिमा का न हिलना उनके इसी ‘अचल रूप’ को दर्शाता है. उज्जैन के सती गेट के पास एक मंदिर है, जहां से खड़े हनुमानजी की प्रतिमा को उठाकर सुरक्षित रूप से टंकी चौक स्थित एक मंदिर में शिफ्ट किया जाना है.
क्यों नहीं हिल पा रही हनुमान जी की मूर्ति ? Viral Hanuman Mandir

प्रशासन ने अगस्त के आखिरी सप्ताह में मंदिर हटाने का आधिकारिक नोटिस जारी किया था. भारी पुलिस बल की मौजूदगी में नगर निगम की टीम 4 सितंबर 2026 की सुबह पूरी तैयारी के साथ कार्रवाई करने के लिए मौके पर पहुंची. बुलडोजर, जेसीबी और पोकलेन मशीनों से कुछ ही घंटों में मंदिर का बाहरी ढांचा, शिखर, गुंबद और गर्भगृह की दीवारों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया. मलबा हटाए जाने के बाद केवल 8 फीट ऊंची मुख्य खड़े हनुमानजी की प्रतिमा अपने स्थान पर अकेली खड़ी रह गई.
हनुमान शक्ति के सामने विज्ञान भी हैरान
मजदूरों ने प्रतिमा के निचले हिस्से को बांधकर खींचने की कोशिश की, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली. लिहाजा, उस दिन काम रोक दिया गया. 5 सितंबर को सुरक्षा इंतजाम पुख्ता कर दोबारा जमीन के नीचे से प्रतिमा को धीरे-धीरे हिलाने की कोशिश शुरू की गई. आसपास ड्रिल किया जा रहा था. इसी दौरान प्रतिमा की परतों में हल्की दरारें आने लगीं, तो लोगों ने विरोध करना शुरू कर दिया. क्योंकि आसपास के हनुमान भक्तों ने मंदिर शिफ्ट करने की एक ही शर्त रखी थी कि बिना खंडित हुए विग्रह को दूसरी जगह स्थापित किया जाए. ऐसे में उस दिन भी प्रशासन की कोशिश असफल हो गई.

बजरंग विग्रह को शिफ्ट करने की नौबत क्यों आई?
फिलहाल हनुमान जी उसी जगह पर टेंट में विराजमान हैं. उनके भक्त वहां आ रहे हैं, पूजा-पाठ कर रहे हैं. कुछ लोगों का कहना है कि ये प्रतिमा पौने दो सौ साल पुरानी है, तो कुछ लोगों का मानना है कि ये हजार साल पुरानी प्रतिमा है. हनुमान भक्त जो कह रहे हैं, यही विधाता पर आस्था और विश्वास है. इन्हें विश्वास है कि हनुमान जी का ये सिद्ध विग्रह यहीं पर रहेगा. अब जरा समझिए कि मंदिर तोड़ने और हनुमान जी के सिद्ध विग्रह को शिफ्ट करने की नौबत क्यों आई?असल में 2028 में उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ होना है. इसके लिए कंठाल चौराहे से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है. यह प्राचीन मंदिर ठीक सड़क के बीच आ रहा था. इसीलिए इसे हटाने का फैसला लिया गया. लेकिन, जैसा कि हमने आपको बताया था, आसपास के हनुमान भक्तों ने ये शर्त रखी कि भले ही मंदिर हटा दें, लेकिन विग्रह को अखंड रूप में शिफ्ट करना होगा.
विशेषज्ञों का मानना है कि जमीन के बहुत गहरे अंदर तक एक विशाल आधारशिला हो सकता है, जिसके साथ मुख्य प्रतिमा के निचले हिस्से को खांचा बनाकर मजबूती से जोड़ा गया है. दूसरा तर्क ये है कि ये प्रतिमा बेसाल्ट चट्टान से बनी है, जिसका घनत्व अत्यधिक होता है. वास्तविकता में इसका वजन और गुरुत्वाकर्षण केंद्र इसे उठाने के काम को कई गुना ज्यादा मुश्किल बना देते हैं.विज्ञानवीर जो भी तर्क दे रहे हैं, लेकिन जिन लोगों को इस विग्रह में असीम आस्था है, वो किष्किंधाकांड के आखिरी हिस्से में जामवंत-हनुमान जी के बीच हुए संवाद की एक चौपाई दोहरा रहे हैं.

