World End in November आखिर 66 साल पहले किस आधार पर वैज्ञानिकों और अर्थशास्त्रियों ने धरती के अंत का मॉडल तैयार किया था ? दिलचस्प ये कि वो मॉडल दुनिया की मशहूर पत्रिका साइंस मैगजीन में छपा था और तब भी इस पर व्यापक चर्चा हुई थी. आज 66 साल पुराना मॉडल फिर से क्यों चर्चा में आ गया है?उस मॉडल में वैज्ञानिकों ने धरती के अंत की संभावित वजहों में क्लाइमेट चेंज, जनसंख्या विस्फोट और बड़ी आबादी के सामने गंभीर खाद्य संकट के प्रभावों की गणना की थी. तो क्या 2026 में आज की दुनिया उसी वैज्ञानिक मॉडल के अनुमानों तक पहुंच चुकी है? दुनिया की आबादी आज 8.5 अरब हो चुकी है, तो जनसंख्या विस्फोट का आंकड़ा क्या है.
तो क्या ये दुनिया कुछ ही हफ्तों में खत्म हो जाएगी ? World End in November
66 साल पहले वैज्ञानिकों ने जब ये गणितीय मॉडल तैयार किया था, तब दुनिया की आबादी 3 अरब थी, आज 8.5 अरब. यानी करीब तीन गुना. तो आखिर वो आंकड़ा क्या है, जिसे 66 साल पुराने गणीतिय मॉडल में धरती के अंत वाला जनसंख्या विस्फोट बाताया गया? आज के जी स्पेशल में कयामत की इसी तारीख की पड़ताल करेंगे, जो धरती को विनाश के करीब ले जा सकता है.

इस धरती पर बसा जीव-जगत खत्म होगा, अब तक इसकी परिकल्पना दार्शनिक और अपने दौर के दूरदर्शी भविष्यवक्ताओं की मानी जाती थी. जैसे नास्त्रेदमस, जैसे बाबा वेंगा और कई बार ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर प्रलय जैसे हालात की भविष्यवाणी की थी. जैसे ये साल 2026 है, इसे भारतीय ज्योतिषशास्त्रियों ने शुरू में ही कह दिया था. ये प्राकृतिक आपदाओं और भयानक घटनाओं का साल होगा.
नास्त्रेदमस और बाबा वेंगा जैसे भविष्यवक्ताओं ने भी इस साल को प्रलय की तरफ बढ़ता निर्णायक साल कहा था.
1. प्राकृतिक आपदा. 2. महाजंग. 2. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)
इन दोनों भविष्यवक्ताओं ने तीन तरह से दुनिया के अंत की बात कही थी. कोई बड़ी प्राकृतिक आपदा, जैसे भूकंप, ज्वालामुखी या उल्कापिंडों का टकराव. दूसरा रूप महाजंग का हो सकता है, जो अबकी बार छिड़ा तो दुनिया बचेगी नहीं. तीसरी बात मौजूदा एआई को लेकर थी, जो इंसानों के लिए संकट पैदा कर सकता है.दुनिया के मशहूर भविष्यवक्ताओं के अलावा ये पहली बार है. जब 66 साल पुराना वैज्ञानिकों का एक तार्किक मॉडल चर्चा में है. इसमें ना सिर्फ प्रलय की तारीख बताई गई है, बल्कि संभावित वजहों का भी जिक्र किया गया है.

1960 में तीन अमेरिकी वैज्ञानिकों के मॉडल से पहले भी जनसंख्या विस्फोट को लेकर चेतावनी दी जा चुकी थी. साल 1798 में अर्थशास्त्री थॉमस माल्थस ने भी चेतावनी दी थी कि एक समय मानव आबादी इतनी बढ़ जाएगी कि खाद्य संकट की वजह से बड़ी तबाही हो सकती है.हालांकि, आज तक ऐसी स्थिति उस रूप में सामने नहीं आई. इसके बाद 1990 के दशक में एक वैज्ञानिक ने हेज वॉन फोर्स्टर ने एआई के खतरों को लेकर चेताया था, अगर मशीनें इंसानों की तरह सोचने लगें, तो धरती पर इंसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा.वैज्ञानिकों के मॉडल के मुताबिक, धरती पर 8.8 अरब इंसान अपने आप में ही एक दूसरे के लिए खतरा बन चुके हैं. ऊपर से इंसानों का बनाया ये मशीन, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता से आगे बढ़कर अपनी बुद्धि से काम करने लगा है.

