Satpal Maharaj on Badrinath देश ही नहीं दुनियाभर में अपनी संत की छवि रखने वाले हाईप्रोफाइल मंत्री सतपाल महाराज को शायद अपनी ही पार्टी के दिग्गज नेता डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी की पीड़ा का एहसास नहीं है और अब उन्होंने एक बार फिर कुछ ऐसा कहा कि उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत आग बबूला हो गई है.आपको याद दिला दें कि बीते कुछ दिनों से देवभूमि में ही नहीं देश भर में बदरीनाथ धाम में आयोजित ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल’ में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के स्वरूप, तेज डीजे संगीत पर ठुमके और मनोरंजन आधारित प्रस्तुति को लेकर खूब किरकिरी हो रही है.अब इसी में प्रदेश के पर्यटन और धर्मार्थ मंत्री सतपाल महाराज का विवादित बयान उन्हें ही उल्टा पड़ता दिख रहा है।
बदरीनाथ डीजे विवाद में कूदे मंत्री महाराज Satpal Maharaj on Badrinath

सबसे पहले आपको बताते हैं कि किस बयान की वजह से अब धर्माचार्यों और चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने मंत्री महाराज पर गहरी नाराजगी –
मैं बताना चाहूंगा कि एक नर पर्वत है और एक नारायण पर्वत है , नारायण पर्वत पर भगवान् बद्रीविशाल का मंदिर बना हुआ है जहाँ उनकी पूजा होती है। ये कहा गया है कि बद्रीनाथ में शंख नहीं बजता है मैं बताना चाहूंगा कि बाहर लोग शंख बजाते हैं , पर अंदर पूजा में शंख का उपयोग नहीं किया जाता है। क्योंकि मान्यता है कि शंख एक जानवर की हड्डी है , तो हड्डी का उपयोग पूजा में नहीं किया जाता है। वहीँ उन्होंने आगे ये भी दलील दी कि कपाट खुलने पर सेना का बैंड और म्यूजिक भी बजता है। ये उर्वशी पीठ है जहाँ गायन होता है। जितनी भी सरकारें रहीं सभी ने वहाँ कार्यक्रम आयोजित किये हैं। संगीत के माध्यम से वहां पूजा होती है यक्ष , गंधर्व किन्नर सब वहां संगीत बजाते हैं।

सतपाल महाराज के बयान पर उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के महासचिव बृजेश सती ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. बृजेश सती ने कहा कि सतपाल महाराज का यह कहना कि शंख जानवरों की हड्डी से बना होता है, बेहद हास्यास्पद है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “शायद महाराज को उम्र के इस पड़ाव में यह ‘दिव्य ज्ञान’ प्राप्त हुआ है. घरों के छोटे मंदिर हों, बड़े मंदिर हों, धर्मस्थल हों या तीर्थ स्थल, सनातन परंपरा में शुभ अवसरों एवं धार्मिक अनुष्ठानों में शंख बजाने की परंपरा रही है. ऐसे में मंत्री का यह बयान धार्मिक रूप से भी सवाल खड़े करता है.”
बृजेश सती ने सतपाल महाराज के ज्ञान और अध्ययन पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि “मंत्री महाराज को शास्त्रों और पुराणों का अध्ययन करना चाहिए और इस तरह के बयान देने से पहले अपने सलाहकारों से चर्चा करनी चाहिए.” …… इतना ही नहीं चारधाम महापंचायत ने महाराज के बयान को सीधे बदरीनाथ विवाद से जोड़ दिया. बृजेश सती ने आरोप लगाया कि ‘बदरीनाथ में हुए विवाद से लोगों का ध्यान हटाने के लिए शंख को लेकर इस तरह का बयान दिया गया है.’ यानी अब मामला सिर्फ धार्मिक मान्यता बनाम सांस्कृतिक कार्यक्रम का नहीं रह गया है, बल्कि मंत्री और तीर्थ पुरोहितों के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है.

बीती 19-20 सितंबर को बदरीनाथ में अराइवल प्लाजा पर हुए ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल 2026’ को लेकर विवाद जारी है. यह विवाद अब सिर्फ डीजे और तेज आवाज तक सीमित नहीं रह गया है. कार्यक्रम के वीडियो सामने आने के बाद बदरीनाथ धाम की धार्मिक मर्यादा को लेकर तीर्थ पुरोहितों और धार्मिक संगठनों ने सवाल उठाए थे इतना ही नहीं बल्कि खुद भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठतम नेता डॉ मुरली मनोहर जोशी ने अपना गुस्सा जाहिर किया था

