Dehradun News राजनीति में अक्सर अपने बयानों से विपक्ष को घेरने और उन पर निशाना साधने वाले नेता भी आखिर इंसान ही होते हैं और उनमें भी मानवता और भावनाएं होती है जो एक दूसरे के दुख सुख में साथ खड़े होने से जाहिर की जाती है… यह एक ऐसा संदेश है जो मतभेद होने के बावजूद मानवता के लिए किसी भी नेता के अंदर होना बेहद जरूरी है तभी एक स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है… कुछ ऐसा ही सुखद नज़ारा उस वक्त देखने को मिला जब प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना भाजपा की महिला नेत्री अमित सिंह के घर पहुंचे और उन पर हुए जानलेवा साजिश और लूटकांड से पीड़ित परिजनों का हाल-चाल जानने उनके घर पहुंचे…. बेहद आत्मीयता और पारिवारिक वातावरण में दोनो नेताओं ने एक दूसरे से इस दिल दहला देने वाली घटना पर चर्चा की और जल्द से जल्द अपराधियों के पकड़े जाने की बात दोहराई…
धस्माना ने अमिता सिंह का लिया हेल्थ अपडेट Dehradun News

कॉंग्रेस उपाध्यक्ष ने जाना परिवार का हाल
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेत्री एवं विजय पार्क की पार्षद अमिता सिंह के बल्लीवाला चौक स्थित आवास पर पहुंचे और उनके परिवार का कुशलक्षेम जाना।आपको बता दें कि मंगलवार की रात अमिता सिंह के घर में कार्यरत घरेलू नौकर ने रात के खाने में नशीला पदार्थ मिला दिया। परिवार के सभी सदस्य अचेत हो गए जिसके बाद नौकर ने घर में रखी ज्वेलरी, नकदी, मोबाइल फोन सहित कीमती सामान लेकर फरार हो गया। नौकर द्वारा पहले यह सुनिश्चित किया गया कि परिवार के सभी लोग गहरी नींद में हैं, उसके बाद उसने इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया।

अपराधियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग
अमिता सिंह ने कॉंग्रेस उपाध्यक्ष धस्माना को बताया कि नौकर को उन्होंने कुछ समय पूर्व दिल्ली की एक एजेंसी के माध्यम से बतौर रसोइया रखा था।इस हृदयविदारक घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सूर्यकांत धस्माना ने देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक परमेंद्र सिंह डोभाल से वार्ता की और अपराधियों की अविलंब गिरफ्तारी की मांग की। साथ ही उन्होंने थाना वसंत विहार के थानाध्यक्ष से भी प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने धस्माना को आश्वस्त किया कि पुलिस हर हाल में अपराधियों को गिरफ्तार कर इस केस का शीघ्र अनावरण करेगी। धस्माना ने कहा कि राजधानी में लगातार बढ़ रही इस प्रकार की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं और पुलिस को घरेलू नौकरों को रखने वाली एजेंसियों का भी सत्यापन करना चाहिए।

