क्या आप भी गुस्से में बाल नोचते हैं ?

जब मन में बहुत ज्यादा चिंता, उदासी या घबराहट भर जाती है, तो कई बार लोग अपने इमोशंस को संभाल नहीं पाते. ऐसे समय में हर इंसान का शरीर अलग-अलग तरह से रिएक्ट करता है. कुछ लोग तनाव में अपने ही सिर, पलकों के बाल खींचने लगते हैं. ऊपर से देखने पर यह सिर्फ एक अजीब या बुरी आदत लग सकती है, लेकिन मेडिकल साइंस में इसे ट्रिकोटिलोमेनिया कहा जाता है. यह कोई ऐसी मामूली आदत नहीं है जिसे कोई इंसान सिर्फ अपने मन से एक झटके में रोक ले. आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि यह क्या है, क्यों होता है और इससे कैसे बाहर निकला जा सकता है?

ट्रिकोटिलोमेनिया क्या है?

जब किसी व्यक्ति को यह समस्या होती है, तो बाल खींचने से ठीक पहले उसके अंदर एक अजीब सा खिंचाव या भारीपन बनता है. जैसे ही वह बाल खींचता है, उसे तुरंत एक हल्की सी राहत या सुकून महसूस होता है, लेकिन यह राहत बहुत थोड़े समय के लिए होती है. जैसे ही वह सुकून गायब होता है, मन में दोबारा वही खिंचाव पैदा होता है और व्यक्ति फिर से बाल खींचने लगता है. इस तरह यह एक कभी न खत्म होने वाला गोल चक्र बन जाता है, जिसे तोड़ पाना काफी मुश्किल होता है.

यह आदत कैसे और कब शुरू होती है?

बिना सोचे-समझे: जब इंसान बोर हो रहा हो, टीवी देख रहा हो, किताब पढ़ रहा हो या गाड़ी चला रहा हो. इसमें उसका ध्यान बाल खींचने पर नहीं होता, हाथ अपने आप वहां चला जाता है.
जानबूझकर: जब इंसान बहुत ज्यादा गुस्सा, अकेलापन, डर या निराशा महसूस कर रहा हो और उस मानसिक दर्द से ध्यान हटाना हो तब ऐसा करता है.

दिमाग में क्या चलता है?
जब यह आदत पुरानी हो जाती है, तो हमारे दिमाग का वह हिस्सा जो रोजमर्रा के पैटर्न संभालता है, इसे एक ऑटोमैटिक रूटीन बना लेता है. वहीं, इमोशंस को कंट्रोल करने वाला हिस्सा तनाव को सही तरीके से हैंडल नहीं कर पाता, जिससे इंसान को बाल खींचकर ही राहत का अहसास होता है.

डॉक्टर की मदद जरूरी है?

सिर या भवों से इतने बाल गायब हो जाना कि खाली जगह साफ दिखने लगे.
इंसान बार-बार रोकने की कोशिश करे, लेकिन खुद पर कंट्रोल न रहे.
शर्म या झिझक के कारण लोगों से मिलना-जुलना, हेयरकट करवाना या बाहर जाना बंद कर देना.
यह पक्का होना कि बाल झड़ने की वजह कोई स्किन इंफेक्शन या बीमारी नहीं है.