Adult Friendship बचपन में दोस्त बनाना बहुत आसान होता है। स्कूल में साथ पढ़ना, खेलना, घूमना और छोटी-छोटी बातें साझा करना दोस्ती की शुरुआत बन जाता है। लेकिन जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, नए दोस्त बनाना और पुरानी दोस्ती को बनाए रखना मुश्किल होने लगता है। पढ़ाई, नौकरी, परिवार की जिम्मेदारियां और व्यस्त जीवनशैली के कारण लोगों के पास दोस्तों के लिए समय कम बचता है।बड़े होने के बाद व्यक्ति की जिंदगी में कई बदलाव आते हैं। पढ़ाई पूरी करने, नौकरी करने, करियर बनाने और परिवार की जिम्मेदारियां निभाने में अधिक समय लगने लगता है।बचपन में दोस्तों से रोज मुलाकात होती थी, लेकिन बड़े होने के बाद कई बार महीनों तक मुलाकात नहीं हो पाती। यही दूरी धीरे-धीरे दोस्ती को प्रभावित कर सकती है।
दोस्ती करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है Adult Friendship

मेंटल हेल्थ एजुकेटर और सर्टिफाइड एनएलपी कोच देविना कौर के अनुसार, स्कूल और कॉलेज से नौकरी वाली जिंदगी में आने के बाद दोस्त बनाने का तरीका बदल जाता है. पहले क्लास, ट्यूशन और खेलकूद जैसी एक्टिविटी के चलते लोगों के साथ समय ज्यादा बिता सकते है. इससे दोस्ती अपने आप बन जाती थी, लेकिन नौकरी शुरू होने के बाद नई दोस्ती बनाने के लिए अक्सर खुद पहल करनी पड़ती है.
लोगों से मिलने-जुलने का समय
जब हम बड़े हो जाते हैं, तो नौकरी, परिवार की जिम्मेदारियां और दूसरे काम अधिक बढ़ जाते हैं, जिसके चलते नए लोगों से मिलने या रिश्ते बनाने के लिए समय और एनर्जी कम हो जाती है, लेकिन स्कूल और कॉलेज में दोस्तों से मिलना अपने आप हो जाता था, लेकिन बड़े होने के बाद लोगों से जुड़ने के मौके खुद बनाने पड़ते हैं.

रिजेक्शन का डर
उम्र बढ़ने के साथ लोग नए रिश्ते बनाने को लेकर ज्यादा सतर्क हो जाते हैं. अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि अगर सामने वाला बात नहीं करना चाहता हो, क्या मैं जरूरत से ज्यादा उत्साहित तो नहीं लगूंगा. यही झिझक कई बार दोस्ती की शुरुआत को रोक देती है, क्योंकि हर कोई दूसरे के पहल करने का इंतजार करता रहता है.
बड़े होने के बाद दोस्त बनाना मुश्किल जरूर हो सकता है, लेकिन असंभव नहीं है। बदलती जिम्मेदारियां, समय की कमी और अलग-अलग जीवनशैली दोस्ती को प्रभावित करती हैं। फिर भी यदि हम नए लोगों से मिलने, बातचीत करने और रिश्तों को समय देने की कोशिश करें, तो किसी भी उम्र में अच्छे और भरोसेमंद दोस्त बनाए जा सकते हैं।

