Land Fraud Uttarakhand उत्तराखंड में लंबे समय से लैंड फ्रॉड के मामलों के सामने आने के बाद अब उत्तराखंड सरकार ऐसे गैंग और घोटालेबाजों पर सर्जिकल स्ट्राइक करने जा रही है जिसकी शुरुआत आयुक्त गढ़वाल विनय शंकर पांडे के ताबड़तोड़ निर्देशों और सामने आए विचित्र मामलों के खुलासों से हो गया है…. उन्होंने सख्ती अपनाते हुए अधिकारियों को दो टूक कह दिया है कि लैंड फ्रॉड के मामलों में जांच और रिपोर्ट पेश करने में देरी हुई तो अधिकारियों पर भी सख्त कार्यवाही की जाएगी… वहीं उन्होंने कहा है कि एक ही जमीन को कई लोगों को बेचने के मामले बेहद गंभीर और चुनौती बने हैं लिहाजा इन मामलों पर विशेष सख्ती बरती जाए….
भूमि धोखाधडी मामलों पर प्रशासन ने कसा शिकंजा Land Fraud Uttarakhand

51 मामलों का निस्तारण, 5 में एफआईआर दर्ज
गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की बैठक में 17 जून 2025 को आयोजित बैठक में दिए गए निर्देशों के बाद की रिपोर्ट्स की समीक्षा करते हुए समिति द्वारा लैंड फ्रॉड से संबंधित 11 लंबित मामलों और 51 नए शिकायतों पर सुनवाई की …. इस दौरान समिति द्वारा कुल 51 प्रकरणों का निस्तारण किया गया, जबकि 5 मामलों में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए । आयुक्त ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि भूमि धोखाधड़ी के मामलों को बेहद गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द निपटारा सुनिश्चित किया जाए। जिन मामलों में संयुक्त निरीक्षण की जरूरत है, उन्हें इसी सप्ताह पूरा कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। उन्होंने तहसील स्तर से प्राप्त रिपोर्टों की सख्त जांच पर बल देते हुए चेतावनी दी कि भविष्य में किसी भी प्रकार की त्रुटि या विवाद पाए जाने पर संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे।

लैंड फ्रांड पर गढ़वाल कमिश्नर सख्त
सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा हटाए जाने के मामलों में अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज कराने तथा पुलिस द्वारा प्रभावी जांच सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। आयुक्त ने कहा कि भूमि धोखाधड़ी के विरुद्ध विशेष अभियान चलाकर मामलों का शीघ्र निस्तारण किया जाए और प्रगति रिपोर्ट तत्काल साझा की जाए। जिन प्रकरणों में भूमि धोखाधड़ी स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रही है, उनमें एसआईटी जांच के निर्देश भी दिए गए।
आयुक्त ने उप जिलाधिकारी सदर एवं उप जिलाधिकारी ऋषिकेश द्वारा समिति की बैठक में अनुपस्थित रहने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की और संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब करने के निर्देश दिए। वहीं बैठक के दौरान भूमि धोखाधड़ी के एक प्रकरण में तहसीलदार द्वारा आवश्यक जानकारी प्रस्तुत न किए जाने पर आयुक्त ने कड़ा रुख अपनाते हुए तहसीलदार को तत्काल ऋषिकेश रवाना किया और एक घंटे के भीतर संपूर्ण विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। आयुक्त ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लैंड फ्रॉड से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही बिल्कुल भी सहन नहीं की जाएगी तथा सभी प्रकरणों में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

बैठक में चौंकाने वाले मामले भी सामने आए
एक प्रकरण में राजस्थान निवासी व्यक्तियों द्वारा रुद्रप्रयाग में आवासीय उद्देश्य से खरीदी गई भूमि पर होटल निर्माण कर उसे आगे बेचने तथा बाद में ऋषिकेश में भी भूमि क्रय-विक्रय करने का मामला प्रकाश में आया। विधिक परीक्षण में उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम की धारा-154 का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित भूमि को सरकार में निहित करने तथा धारा 166 व 167 के तहत कार्रवाई करते हुए दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए।
इसी प्रकार देहराखास निवासी एक अन्य मामले में विधिक राय के उपरांत आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई। बैठक में ऐसे प्रकरण भी सामने आए, जिनमें भूमाफिया द्वारा एक ही खसरे की भूमि दो अलग-अलग व्यक्तियों को बेचने तथा कहीं और की भूमि पर कब्जा दिलाने जैसे गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। इन मामलों में भी कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त कुछ मामलों में शिकायत निराधार पाई गई, जिन्हें जांच के उपरांत ड्रॉप किया गया।

आयुक्त ने न्यायालय में लंबित मामलों को छोड़कर अन्य सभी प्रकरणों में विभागीय स्तर पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा किसी भी भूमि संबंधी मामले को अनावश्यक रूप से लंबित न रखने के निर्देश दिए। साथ ही न्यायालय के आदेशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की बैठक में पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल राजीव स्वरूप, अपर आयुक्त उत्तम सिंह चौहान, एसपी (ग्रामीण) जया बलूनी, डीजीसी नितिन वशिष्ट, एसडीएम डोईवाला अपर्णा ढौंडियाल, एसडीएम कुमकुम जोशी, एसडीएम विकासनगर विनोद कुमार, संयुक्त सचिव एमडीडीए गौरव चटवाल, एसडीएम कर्णप्रयाग सोहन सिंह रांगड, एसडीएम रूद्रप्रयाग सोहन सिंह सैनी सहित वर्चुअल माध्यम से सभी संबंधित तहसीलों के वरिष्ठ अधिकारी व तहसीलदार उपस्थित थे।

