Uttarakhand Minority Education अल्पसंख्यक शिक्षा का उद्देश्य केवल साक्षरता नहीं, बल्कि एक बहुआयामी और समावेशी भारत का निर्माण करना है। अल्पसंख्यकों के लिए आधुनिक शिक्षा (तकनीकी, वैज्ञानिक और व्यावसायिक) सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण, समानता, और राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए आवश्यक है। यह कौशल विकास, गरीबी उन्मूलन, सांस्कृतिक संरक्षण, और आत्मविश्वास बढ़ाकर समुदाय को रूढ़िवादिता से मुक्त कर आत्मनिर्भर बनाती है।

अल्पसंख्यक शिक्षा का महत्व:
सशक्तीकरण (Empowerment): बेहतर रोजगार के अवसर, कौशल विकास और आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान करना।
संवैधानिक अधिकार: अनुच्छेद 21A के अंतर्गत 6-14 वर्ष के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा, साथ ही अनुच्छेद 30 के तहत भाषाई/धार्मिक संस्थानों की स्थापना।
सामाजिक न्याय: हाशिए पर पड़े समुदायों को मुख्यधारा में लाकर सामाजिक असमानता को दूर करना।
शैक्षिक आधुनिकीकरण: मदरसा/मकतबों में आधुनिक शिक्षा (गणित, विज्ञान, अंग्रेजी) को शामिल कर तकनीकी कौशल बढ़ाना।
सांस्कृतिक संरक्षण: अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति को बनाए रखने का अधिकार (अनुच्छेद 29)।

मदरसा बोर्ड ख़त्म – शुरू हुआ नया दौर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार अल्पसंख्यक समुदाय को भी प्रत्येक क्षेत्र में रोजगार से जोड़ने और आधुनिक शिक्षा देने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने के लिए अब एक और क्रांतिकारी फैसला लेते हुए मदरसा बोर्ड को ख़त्म कर नया दरबाजा खोलने जा रही है…..उत्तराखण्ड सरकार जुलाई, 2026 से मदरसा बोर्ड खत्म करने जा रही है। नई व्यवस्था में उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन कर दिया गया है।
विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते बताते कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिछले विधानसभा सत्र में मदरसा बोर्ड खत्म करने की घोषणा करते हुए इस वर्ष जुलाई से सभी अल्पसंख्यक संस्थाओं को उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अंब्रेला के नीचे लाने और उनकी मान्यता उत्तराखण्ड शिक्षा बोर्ड से किए जाने की बात कही थी।

मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार अब बोर्ड में प्रोफेसर, विद्वान को मनोनीत किया गया है, जोकि अल्पसंख्यक विद्यार्थियों के लिए शैक्षिक पाठ्यक्रम निर्धारित करेंगे। इसमें सभी अल्पसंख्यक समुदाय के शिक्षाविदों को सम्मिलित किया गया है। उन्होंने बताया कि इसमें डॉ. सुरजीत सिंह गांधी को अध्यक्ष और प्रो. राकेश जैन, डॉ. सैय्यद अली हमीद, प्रो. पेमा तेनजिन, डॉ. एल्बा मेड्रिले, प्रो. रोबिना अमन, प्रो. गुरमीत सिंह को सदस्य बनाया गया है। साथ ही समाज सेवी श्री राजेंद्र बिष्ट और सेवानिवृत्त अधिकारी श्री चंद्रशेखर भट्ट भी सदस्य होंगे। निदेशक महाविद्यालय शिक्षा, निदेशक राज्य शैक्षिक अनुसंधान व निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण भी सदस्य सूची में रहेंगे।

बदलवा के इस नए दौर में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार ने राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन का फैसला लिया है। हमारी सरकार ने मदरसा बोर्ड खत्म करने का निर्णय लिया था। अब ये प्राधिकरण तय करेगा कि अल्पसंख्यक बच्चों को कैसी शिक्षा दी जाएगी। ये प्राधिकरण सिलेबस तय करेगा। सभी अल्पसंख्यक संस्थाएं उत्तराखण्ड शिक्षा बोर्ड से मान्यता लेंगी।

