भारत मंदिरों का देश कहा जाता है. यहां हर राज्य में बहुत से प्राचीन और रहस्यमयी मंदिर देखने को मिल जाते हैं, जिनकी प्राचीनता और रहस्य लोगों को आकर्षित करता है. मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले में एक ऐसा ही रहस्यमयी मंदिर है. ये मंदिर अपनी अनोखी मान्यता और रहस्यमयी घटना की वजह से दूर-दूर तक प्रसिद्ध है. मंदिर का नाम है गड़ियाघाट माता मंदिर.
ये मंदिर आगर मालवा जिले के नलखेड़ा क्षेत्र के पास गाड़िया गांव में स्थित है. यह मंदिर कालीसिंध नदी के किनारे पर है. कहा जाता है कि इस मंदिर में दीपक घी या तेल से नहीं, बल्कि पानी से जलता है. इस चमत्कार को देखने के लिए यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में आते हैं. यहां के शांत वातावरण और नदी के किनारे पर लोग अध्यात्मिक शांति पाते हैं.

पानी से जलने वाले दीपक की कहानी
मंदिर में नदी के पानी से जलने वाले इस दीपक की कहानी बड़ी दिलचस्प है. कहा जाता है कि पहले यहां हमेशा तेल का दीपक जला करता था. फिर एक दिन माता ने मंदिर के पुजारी को दर्शन दिए और नदी के पानी से दीपक जलाने का संकेत दिया. अगले दिन पुजारी कालीसिंध नदी का पानी लाए और दीपक में डाल दिया. फिर जलती माचिस पास ले गए तो दीपक जल उठा.

कैसे शुरू हुई ये परंपरा?
इस घटना से मंदिर के पुजारी को डरा दिया. दो महीने तक पुजारी ने ये बात किसी को नहीं बताई. बाद में गांव के कुछ लोगों को इसके बारे में बताया. शुरुआत में लोग पुजारी की बात नहीं माने, लेकिन फिर उन्होंंने पानी डालकर दीपक जलाया तो ज्योति जल उठी. इसके बाद इस बात को इलाके में फैलने में दर न लगी. कहा जाता है कि तब से ही इस मंदिर में कालीसिंध नदी के पानी से ही दीपक जलाने की परंपरा शुरू हो गई.बरसात के मौसम में ये मंदिर नदी का जलस्तर बढ़ने की वजह से उसमें डूब जाता है. ऐसे में वहां पूजा-पाठ बंद हो जाता है. फिर शारदीय नवरात्रि की घटस्थापना के दिन दोबारा ज्योति प्रज्वलित की जाती है.

