स्ट्रोक के ये 5 लक्षण भी हैं खतरे की घंटी; मामूली समझने की न करें भूल

हमारा दिमाग शरीर का मुख्य कंट्रोल रूम है। चलने-फिरने, बोलने से लेकर हमारी याददाश्त, आंखों की रोशनी और शरीर के बैलेंस तक सब कुछ यहीं से कंट्रोल होता है। बता दें, जब दिमाग तक खून की सप्लाई अचानक रुक जाती है या कोई नस फट जाती है, तो कुछ ही मिनटों में ब्रेन सेल्स डैमेज होने लगते हैं। इसे ही मेडिकल भाषा में ‘स्ट्रोक’ कहा जाता है।

यह एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, लेकिन अगर सही समय पर इसके शुरुआती लक्षणों को पहचान लिया जाए, तो न सिर्फ मरीज की जान बचाई जा सकती है, बल्कि जीवन भर की विकलांगता के खतरे को भी कम किया जा सकता है। आइए, हर साल 29 अक्टूबर को मनाए जाने वाले World Stroke Day के मौक जानते हैं कि वे कौन-से संकेत हैं जिन पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है।

चेहरे या शरीर के एक हिस्से में अचानक कमजोरी

स्ट्रोक आने पर मरीज का चेहरा एक तरफ लटक सकता है, जिससे उसे ठीक से मुस्कुराने में भी दिक्कत होती है। इसके अलावा, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन महसूस हो सकता है। अगर आपको शक हो, तो मरीज को मुस्कुराने और अपने दोनों हाथ उठाने को कहें। अगर एक हिस्सा कमजोर दिखे, तो तुरंत मेडिकल हेल्प लें।

बोलने या बात समझने में परेशानी
अचानक जुबान का लड़खड़ाना, सही शब्द न खोज पाना, अजीब से वाक्य बोलना या आसान सी बातें भी न समझ पाना खतरे की घंटी है। व्यक्ति पूरी तरह जगा हुआ होने के बावजूद बात करने में संघर्ष कर सकता है। इन बदलावों को कभी भी थकान, स्ट्रेस या ध्यान भटकने का नाम देकर नजरअंदाज न करें।

आंखों की रोशनी में अचानक बदलाव आना
अगर किसी को अचानक धुंधला दिखने लगे, एक चीज दो-दो दिखाई दे या एक या दोनों आंखों की रोशनी अचानक चली जाए, तो यह दिमाग या उसकी ब्लड सप्लाई में आई किसी गंभीर परेशानी का सीधा संकेत है।

भयंकर सिरदर्द, चक्कर या बैलेंस बिगड़ना
एक बहुत ही तेज और अचानक उठा सिरदर्द, जो देखते ही देखते अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाए, दिमाग के अंदर या उसके आस-पास होने वाली ब्लीडिंग का इशारा हो सकता है। इसके साथ ही अचानक चक्कर आना, चलने में लड़खड़ाहट होना या बिना किसी वजह के गिर पड़ना भी गंभीर न्यूरोलॉजिकल परेशानी के लक्षण हैं।

अचानक कन्फ्यूजन या याददाश्त जाना
अगर कोई व्यक्ति अचानक बहुत ज्यादा कन्फ्यूज हो जाए, अपने आस-पास की चीजों को न समझ पाए या एकदम से उसकी याददाश्त चली जाए, तो यह स्ट्रोक का एक ऐसा लक्षण है जो आसानी से पकड़ में नहीं आता। अगर परिवार वालों को लगे कि मरीज अजीब व्यवहार कर रहा है या अपने रोजमर्रा के आसान काम भी नहीं कर पा रहा है, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें।

हमेशा याद रखें F.A.S.T. फॉर्मूला
स्ट्रोक के खतरे को पहचानने और तुरंत एक्शन लेने के लिए यह फॉर्मूला बेहद काम का है:

F – Face (चेहरा): क्या चेहरे का एक हिस्सा लटक रहा है?
A – Arms (हाथ): क्या एक हाथ कमजोर पड़ गया है या उठाने में दिक्कत हो रही है?
S – Speech (बोलचाल): क्या आवाज लड़खड़ा रही है या बात समझने में परेशानी है?
T – Time (समय): ऐसा होने पर तुरंत इमरजेंसी सर्विस को कॉल करें।

ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए?
भारत में स्ट्रोक का शक होने पर इमरजेंसी मदद के लिए तुरंत 112 नंबर डायल करें।

यह जरूर नोट करें कि लक्षण ठीक किस समय शुरू हुए थे।
लक्षणों के अपने आप ठीक होने का इंतजार बिल्कुल न करें।
अगर एम्बुलेंस उपलब्ध है, तो मरीज को खुद अपनी गाड़ी से ले जाने की कोशिश न करें।
जब तक मेडिकल प्रोफेशनल्स न कहें, मरीज को खाने-पीने की कोई भी चीज या दवा बिल्कुल न दें।

सबसे अहम बात यह है कि अगर ये सारे लक्षण कुछ मिनटों में गायब भी हो जाएं, तब भी अस्पताल जाकर चेकअप कराना बहुत जरूरी है। इसे ‘ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक’ या ‘मिनी-स्ट्रोक’ कहा जाता है, जो भविष्य में होने वाले किसी बड़े और जानलेवा स्ट्रोक की चेतावनी होता है।