Uttarakhand Crime News मछली मारने की सजा घटाएगी सरकार !

Uttarakhand Crime News  उत्तराखंड में छोटे अपराधों से जुड़े नियमों में बदलाव की तैयारी की जा रही है. राज्य सरकार द्वितीय उत्तराखंड जन विश्वास (प्रविधानों में संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत पांच कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव लाई है. इसके तहत कुछ मामलों में जेल की सजा कम करने, जुर्माने की राशि बढ़ाने और कुछ अपराधों में कारावास का प्रावधान हटाने की सिफारिश की गई है. प्रस्ताव का उद्देश्य छोटे अपराधों के लिए आर्थिक दंड की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है. हालांकि, इन बदलावों को प्रस्तावित संशोधनों के रूप में ही देखा जाना चाहिए.

मछली मारने के नियम तोड़े तो लगेगा जुर्माना Uttarakhand Crime News 

उत्तराखंड मत्स्य अधिनियम, 2003 में संशोधन के तहत मछली पकड़ने से जुड़े कुछ अपराधों में जुर्माना बढ़ाने का प्रस्ताव है. धारा पांच के तहत जुर्माने को बढ़ाकर पहली दोषसिद्धि पर 5,000 रुपये और अगली दोषसिद्धि पर 10,000 रुपये करने की सिफारिश की गई है. वहीं, विस्फोटकों का इस्तेमाल कर मछलियों को नष्ट करने के मामलों में जुर्माना बढ़ाकर 10,000 रुपये और संबंधित प्रावधान के तहत 20,000 रुपये करने का प्रस्ताव है. विषाक्त पदार्थों से मछलियों को नुकसान पहुंचाने पर अधिकतम जेल की सजा तीन साल से घटाकर दो महीने करने और 20,000 रुपये तक जुर्माना लगाने की बात कही गई है.

जेल कम, जुर्माना ज्यादा..घटेगी अपराधों की सजा !

उत्तराखंड जल प्रबंधन एवं विनियामक अधिनियम, 2013 में भी बदलाव प्रस्तावित हैं. अधिनियम की धारा 20 के तहत नियमों का उल्लंघन करने पर अधिकतम एक साल की जेल को घटाकर छह महीने करने की सिफारिश की गई है. मौजूदा प्रावधान के अनुसार, ऐसे मामलों में एक लाख रुपये तक जुर्माना या जेल और जुर्माना दोनों लगाए जा सकते हैं. यदि अपराध जारी रहता है, तो पहली दोषसिद्धि के बाद हर दिन 20,000 रुपये का अतिरिक्त दंड भी निर्धारित है. प्रस्तावित बदलावों का असर कानून के उल्लंघन पर लागू होने वाली सजा की व्यवस्था पर पड़ सकता है.

सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर जुर्माना
सार्वजनिक स्थानों पर दीवारों या दूसरी संपत्तियों पर लिखने, रंगने अथवा विज्ञापन चिपकाने जैसे मामलों में भी सख्ती का प्रस्ताव है. उत्तराखंड लोक संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम, 2003 के तहत अधिकतम जेल की सजा एक साल से घटाकर तीन महीने करने और जुर्माना 10,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये करने की सिफारिश की गई है. इसके अलावा, दोषी व्यक्ति को संपत्ति को पहले जैसी स्थिति में बहाल करने की वास्तविक लागत भी चुकानी पड़ सकती है. यानी प्रस्तावित बदलावों में जेल की अवधि कम करने के साथ आर्थिक जिम्मेदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया है.

महंगी किताबें बेचने पर बढ़ेगा दंड
पाठ्य पुस्तकों को निर्धारित कीमत से अधिक पर बेचने के मामलों में अतिरिक्त वसूली गई राशि के दस गुना तक जुर्माने का प्रस्ताव है, जिसकी अधिकतम सीमा दो लाख रुपये होगी. संबंधित प्रावधान में कारावास हटाने की सिफारिश भी की गई है, जबकि धारा 10 के तहत जेल की अवधि तीन साल से घटाकर छह महीने और दो लाख रुपये तक जुर्माने का प्रस्ताव है. इसके साथ ही उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम, 2016 की धारा 131-यू की उपधारा (2) हटाने की बात कही गई है. इस उपधारा में बिना उचित कारण आधिकारिक कर्तव्य का उल्लंघन करने पर 250 रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है. इन संशोधनों के लागू होने की स्थिति और अंतिम नियमों की जानकारी के लिए विधेयक की आधिकारिक स्थिति देखना जरूरी होगा.