क्या आप जानते हैं कि खांसने, छींकने या बात करने से भी एक गंभीर बीमारी आपको अपनी चपेट में ले सकती है? जी हां, हम बात कर रहे हैं टीबी की।
हाल ही में दिल्ली से जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद डराने वाले हैं। राष्ट्रीय राजधानी में टीबी एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है। आइए, जानते हैं दिल्ली में टीबी की मौजूदा स्थिति क्या है (Delhi TB cases) और इस गंभीर बीमारी के लक्षण पहचानकर आप खुद को कैसे बचा सकते हैं।
दिल्ली में टीबी के चौंकाने वाले आंकड़े
राजधानी दिल्ली में चलाए गए एक हालिया स्क्रीनिंग अभियान के नतीजे बेहद डराने वाले हैं। 24 मार्च से 5 मई के बीच, यानी केवल 42 दिनों के भीतर 12,078 नए मरीज सामने आए हैं। यह कोई अचानक हुई बढ़ोतरी नहीं है, बल्कि पिछले तीन सालों का रिकॉर्ड बताता है कि हर साल टीबी के एक लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए जा रहे हैं।
टीबी से होने वाली मौतों के आंकड़े
दिल्ली सरकार के जन्म-मृत्यु आंकड़ों के अनुसार, साल 2005 से 2024 के बीच दिल्ली में टीबी से 65,985 मौतें दर्ज की गईं। इनमें सबसे ज्यादा 5,093 मौतें अकेले साल 2024 में हुईं। इसी खतरे को देखते हुए दिल्ली के 11 जिलों के 38 उच्च जोखिम वाले वार्डों को विशेष निगरानी के लिए चुना गया है, जहां जांच और मॉलिक्यूलर टेस्ट तेजी से बढ़ाए जा रहे हैं।
टीबी आखिर क्या है और यह कैसे फैलता है?
मेयो क्लीनिक के अनुसार, टीबी एक गंभीर बीमारी है जो मुख्य रूप से फेफड़ों पर असर डालती है। यह ‘माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस’ नामक बैक्टीरिया के कारण होती है।
यह बीमारी हवा के जरिए बहुत आसानी से फैलती है। जब टीबी से संक्रमित व्यक्ति खांसता, छींकता या यहां तक कि गाता है, तो बैक्टीरिया वाली छोटी-छोटी बूंदें हवा में फैल जाती हैं। कोई भी स्वस्थ व्यक्ति जब इसी हवा में सांस लेता है, तो वह संक्रमित हो सकता है। भीड़भाड़ वाले इलाकों में और जहां लोग बंद या छोटी जगहों में लंबे समय तक एक साथ रहते हैं, वहां टीबी तेजी से फैलता है।
कैसे पहचानें टीबी के लक्षण?
टीबी का बैक्टीरिया शरीर में जाकर किस स्टेज में है, इसके आधार पर इसके लक्षण (Tuberculosis symptoms) अलग-अलग होते हैं:
लेटेंट टीबी: इसमें बैक्टीरिया शरीर में रहता तो है, लेकिन आपका इम्यून सिस्टम उसे एक दीवार में घेर कर रखता है। इस स्थिति में मरीज को कोई लक्षण महसूस नहीं होते और न ही यह दूसरों में फैलता है।
एक्टिव टीबी: जब इम्यून सिस्टम बैक्टीरिया को कंट्रोल नहीं कर पाता, तो यह बीमारी का रूप ले लेता है। इसके मुख्य लक्षण हैं:
लगातार खांसी आना।
खांसी के साथ खून या बलगम आना।
सीने में दर्द या सांस लेने और खांसने पर दर्द होना।
बुखार और ठंड लगना।
रात में सोते समय पसीना आना।
वजन कम होना और भूख न लगना।
बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी महसूस होना।
जब टीबी फेफड़ों से निकलकर शरीर के अन्य हिस्सों, जैसे किडनी, लिवर, दिमाग और रीढ़ की हड्डी के फ्लूइड, दिल, हड्डियों या लिम्फ नोड्स में फैल जाता है। इसके लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि शरीर का कौन-सा हिस्सा संक्रमित हुआ है।
किसे है सबसे ज्यादा खतरा?
वैसे तो टीबी किसी को भी हो सकता है, लेकिन जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, उन्हें इसका खतरा सबसे ज्यादा होता है। एचआईवी/एड्स, डायबिटीज, गंभीर किडनी रोग, कुपोषण और कैंसर के मरीजों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है।
इसके अलावा उम्र का भी इस पर असर पड़ता है। 5 साल से कम उम्र के बच्चों और 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों में टीबी के एक्टिव होने और गंभीर रूप लेने का खतरा कहीं ज्यादा रहता है।
इलाज और बचाव के सही तरीके
टीबी एक जानलेवा बीमारी हो सकती है, लेकिन एंटीबायोटिक्स दवाओं से इसका पूरा इलाज संभव है। मरीज को 4, 6 या 9 महीने तक लगातार दवा खानी पड़ती है।
सबसे जरूरी बात है कि डॉक्टर द्वारा दी गई दवा का कोर्स बीच में कभी न छोड़ें और सही तरीके से लें। अगर दवाएं पूरी नहीं खाई जाती हैं, तो बैक्टीरिया दवाओं के प्रति रेजिस्टेंट हो जाता है। इसका मतलब है कि पुरानी दवाएं काम करना बंद कर देती हैं और बीमारी बहुत ज्यादा खतरनाक हो जाती है।
अगर किसी को एक्टिव टीबी है, तो शुरुआती कुछ हफ्तों तक उसे घर पर रहना चाहिए, कमरे की खिड़कियां खुली रखनी चाहिए और हमेशा मास्क पहनना चाहिए।

