देहरादून में से अनीता तिवारी की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट…..

Bharat Jodo Yatra Uttarakhand बीते 100 दिनों में देशभर के अलग-अलग राज्यों और अलग-अलग प्लेटफार्म पर हार झेलने के बावजूद कांग्रेस की चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि उसके सबसे बड़े नेता राहुल गांधी भारत जोड़ने निकले हैं । मकसद क्या है यह पार्टी जाने और उसके रणनीतिकार , लेकिन चर्चा में यह यात्रा जरूर है। शुरुआत हुई राहुल गांधी के महंगे टीशर्ट से और बात उनकी दाढ़ी तक पहुंची। लेकिन जैसे-जैसे यात्रा आगे बढ़ी उसको मिल रहे जनसमर्थन और तस्वीरों में उमड़ रही भीड़ को देखकर विपक्षियों को भी लगने लगा है कि यह कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित हो सकती है। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कई राज्यों के मुख्यमंत्री सहित हजारों की संख्या में कांग्रेसी रोजाना पैदल चल रहे हैं और स्थानीय मुद्दों को उठाकर मीडिया से रूबरू हुई हो रहे हैं। इस दौरान लगातार सोशल मीडिया पर तस्वीरें भी नजर आ रही हैं ।
Bharat Jodo Yatra Uttarakhand सूत्रधार बनकर उभरे कांग्रेसी लीडर यशपाल आर्य

- इन सब का मकसद है 2024 से पहले भाजपा के रास्ते में एक बड़ी चुनौती बनकर देश के ज्वलंत विषयों को उठाना और राजनीतिक ताक़त बढ़ाना। लेकिन इसका एक दूसरा पहलू भी है ।अगर आप उत्तराखंडी है और उत्तराखंड में रहते हुए इस यात्रा को देख रहे हैं तो यह खबर आपके लिए है। दरअसल राहुल गांधी भारत जोड़ने की बात तो करते हैं लेकिन उनके पार्टी के अंदर ही तमाम गुट है जो पार्टी को छिन्न-भिन्न करने पर तुले रहते हैं । बड़े मठाधीश नेता हो या उभरते हुए युवा नेता , पार्टी में अपना दबदबा रसूख और कुर्सी हासिल करने के लिए वह लगातार जोड़-तोड़ में लगे रहते हैं। जिसका नुकसान पार्टी को चुनाव में उठाना पड़ता है। इतिहास की बात करें तो बीते विधानसभा के तमाम चुनाव इस बात की गवाही देते हैं कि गुटबाजी और महत्वाकांक्षा ने कांग्रेस को उन्हीं के नेताओं के हाथों हाशिए पर पहुंचा दिया है। लेकिन देवभूमि उत्तराखंड के नेताओं की इस वक्त जो तस्वीर भारत जोड़ो यात्रा में दिखाई दे रही है वह एक सुखद संकेत माना जा सकता है। और इसके सूत्रधार बनकर उभरे हैं उत्तराखंड के नेता विपक्ष और दिग्गज कांग्रेसी लीडर यशपाल आर्य…..

- Bharat Jodo Yatra Uttarakhand उत्तराखंड की राजनीति में एक बड़ा चेहरा माने जाते हैं बाजपुर से विधायक और कई बार के कैबिनेट मंत्री रहे पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और मौजूदा नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य। जिनकी भूमिका केंद्रीय मंच पर आजकल बेहद महत्वपूर्ण नजर आ रही है। ऐसा माना जा रहा है कि 2024 लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी यशपाल आर्य पर पूरी तरह से भरोसा जताते हुए उन्हें पहाड़ में पंजे को मजबूत करने की खुली छूट दे रही है । यही वजह है कि पार्टी के सबसे बड़े नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ कदमताल करते हुए वरिष्ठ कांग्रेसी लीडर यशपाल आर्य पूरे जोशो के साथ भारत जोड़ो यात्रा में अपना पसीना बहा रहे हैं।

- Bharat Jodo Yatra Uttarakhand दरअसल उत्तर प्रदेश में लगभग खत्म हो चुकी कांग्रेस गुजरात में जिस तरह से दम तोड़ती नजर आ रही है उसके बाद हिमाचल से लगे सटे राज्य उत्तराखंड में कांग्रेस को लगता है संजीवनी मिल सकती है । अगर उसके नेता एकजुटता के साथ विपक्ष पर हमलावर हो , लेकिन यहां पर जिस तरह की गुटबाजी बीते 10 सालों में नजर आई हैं उसने पार्टी को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। यहां प्रीतम , हरीश , करन माहरा और अनेक ऐसे बड़े नेता हैं जिनके अपने अपने खेमे हैं और उनकी अपनी अपनी महत्वाकांक्षा, लिहाजा भाजपा भी कहती है कि कांग्रेस चुनाव में खुद अपने नेताओं से ही लड़ते हुए हार जाती है। ऐसे में भारत जोड़ो यात्रा के इस महा अभियान में अगर पार्टी के नेताओं को एकजुट करते हुए एक साथ देखा जा रहा है तो उसकी कहीं ना कहीं बड़ी वजह यशपाल आर्य की रणनीति है । वही यह दिखाने की कोशिश है कि अब वक्त बदल चुका है और पार्टी एकजुटता और एक विचार के साथ उत्तराखंड में 2024 का चुनाव जीतने के लिए भाजपा का मुकाबला करने को तैयार है।

- Bharat Jodo Yatra Uttarakhand इसके पीछे लोगों का यह भी सोचना है कि अगर 2024 में विपक्ष के नेता यशपाल आर्य बेहतर नतीजा दे पाते हैं तो कहीं ना कहीं 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में वह पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा बन चुके होंगे। तब पार्टी उन्हें अपने मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में भी पेश कर सकती है। क्योंकि उम्र जोड़-तोड़ और अनुभव के आधार पर 2027 में यशपाल आर्य बेहतरीन विकल्प बनकर उभर सकते हैं। ऐसा पहाड़ की जादुई राजनीति को समझने वाले भी मान रहे हैं।

- Bharat Jodo Yatra Uttarakhand उत्तराखंड कांग्रेस की राजनीति को लंबे समय से देख रहे वरिष्ठ मतदाताओं से जब हमने बात की तो उन्होंने भी कहा कि अगर पार्टी में एकजुटता और साफ-सुथरी राजनीति नजर आएगी तो लोग जरूर कांग्रेस की तरफ वापस लौटेंगे। जिसके लिए एक भरोसेमंद नेतृत्व का होना बेहद जरूरी है। जिस तरह से हरीश रावत समय-समय पर अपने रिटायरमेंट की बात कहते हैं , और अन्य नेता दिग्गज यशपाल आर्य के सामने अनुभव में काफी पीछे हैं , ऐसे में अगर उत्तराखंड में 2024 और 2027 के चुनाव नतीजे पार्टी को अपने पक्ष में करना है तो आर्य को खुली छूट के साथ पूरा सहयोग देकर पार्टी आलाकमान अपने संघर्ष के दिनों को जीत में भी बदल सकती है।
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