Sexual Harrasment Swati दिल्ली महिला आयोग (DCW) की प्रमुख स्वाति मालीवाल (Swati Maliwal) ने अपने पिता पर बचपन में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए आज अपनी आपबीती कही है. यह बात उन्होंने दिल्ली महिला आयोग (Delhi Commission for Women) के द्वारा आयोजित डीसी अवार्ड्स (DCW Awards) के कार्यकम के बाद कही है.स्वाति मालीवाल ने अपने पिता पर बचपन में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए हुए कहा, “जब मैं बच्ची थी तब मेरे पिता ने मेरा यौन उत्पीड़न किया था. वह मुझे मारते थे, मैं बिस्तर के नीचे छिप जाती थी.”
Sexual Harrasment Swati जानिए अपने खुलासे में क्या बिली
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Sexual Harrasment Swati DCW चीफ स्वाति मालीवाल ने सुनाई आपबीती- ‘पापा ने किया यौन शोषण, डरकर छिप जाती थी बिस्तर के नीचे’. .. DCW चीफ स्वाति मालीवाल ने सुनाई आपबीती- ‘पापा ने किया यौन शोषण, डरकर छिप जाती थी बिस्तर के नीचे’दिल्ली महिला आयोग (DCW) की प्रमुख स्वाति मालीवाल ने अपने पिता पर बचपन में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है
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Sexual Harrasment Swati स्वाति मालीवाल ने अपने पिता पर बचपन में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए हुए कहा, “जब मैं बच्ची थी तब मेरे पिता ने मेरा यौन उत्पीड़न किया था. वह मुझे मारते थे, मैं बिस्तर के नीचे छिप जाती थी.”
Sexual Harrasment Swati दिल्ली महिला आयोग के अवार्ड्स कार्यक्रम को लेकर पूछे गए एक मीडियाकर्मी के सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वाति मालीवाल ने कहा, जी काफी भवुक तो हुई, क्योंकि जो सारे के सारे अवार्डी हैं, वो सारे पॉवरफुल स्टोरीज तो है हीं…और उन्होंने बहुत ही संघर्ष किया है. मेरे अपने फादर मेरा यौनशोषण करते थे, जब मैं छोटी थी. बहुत मारते थे, बहुत पीटते थे. जब वो घर में आते थे, तो बहुत डर लगता था. मैं कई बार बिस्तर के नीचे छिप जाती थी और पूरी रात प्लानिंग करती थी कि किस प्रकार महिलाओं को उनका हक़ दिलाऊंगी और इस तरीके के आदमी जो महिलाओं के साथ शोषण करते हैं, बच्चियों के साथ शोषण करते हैं, उनको सबक सिखाऊंगी.
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Sexual Harrasment Swati स्वाति मालीवाल ने कहा, मुझे अभी तक याद है कि वो जब मारने पर आते तो चोटी से मुझे पकड़ते थे और दीवार से जोर से पटकते थे. खून बहता रहता था और बहुत तड़प होती थी. लेकिन मेरा ये मानना है कि एक इंसान जब बहुत अत्याचार सहता है, तभी वह दूसरे का का दर्द समझता है, तभी उसके अंदर एक आग जाग्रत होती है, जिससे कि एक पूरा सिस्टम हिला पता है. शायद मेरे साथ भी यही हुआ और हमारे जितने भी अवार्डी हैं, उन सबकी कहानी भी ऐसी है. संघर्ष के साथ जिंदगी को कैसे जीना है, और एक सकारात्मक सोच कैसे आगे ले चलनी है, ये सारे अवार्डी हैं, आज हमको प्रेरणा दी है.यह वाकया कब का है, जब मालीवाल से पूछा गया तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा, मैं बहुत छोटी थी, जब तक रही मैं उनके साथ, क्लास 4th तक मैं उनके साथ रही, तब तक यह काफी बार होता था.
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