Haridwar District Jail : जेल की दीवारों पर अनोखी कहानी 

Haridwar District Jail अगर आप जेल की ज़िंदगी के बारे में नहीं जानते फिर भी एक काल्पनिक सोच तो रखते ही होंगे की वहां के अंदर का जीवन कैसा होगा ? आपको अगर ये कहा जाये कि जेल के क़ैदी भी सकारात्मक सोच के साथ बदलाव कर सकते हैं तो कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए क्योंकि हरिद्वार की जेल में जो प्रयोग हुआ उसने सुखद इशारा किया है जी हाँ देवभूमि की जेलों से एक बेहतरीन सन्देश दिया जा रहा है।

 

जिला जेल की दीवारें बनी आकर्षण का केंद्र Haridwar District Jail


हरिद्वार में इस कारागार की दीवारें अन्य प्रदेशों की जेलों के लिए जहाँ एक सन्देश दे रही है वहीँ  ये रंगीन दीवारें अब आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं. जेल की ऊंची-ऊंची दीवारों पर महापुरुषों, वीर सैनिकों, देवी देवताओं और चिपको आंदोलन के चित्रों के साथ ही बैरकों को भी विशेष नाम दिए गए हैं. दो महीने की कड़ी मेहनत से जेल में बंद कैदी ने इन चित्रों को बनाकर अन्य कैदियों को व्यस्त रहने का सन्देश दिया और कैदियों की सोच सकारात्मक भी बनी रहेगी.


इसमें कोई दो राय नहीं है कि चार दीवारी में कैद अपने जुर्म की सजा काट रहे कैदियों को जेल की ऊंची-ऊंची दीवारों को देखकर नकारात्मक की सोच पैदा होती है. इसी को देखते हुए हरिद्वार जिला कारागार की दीवारों पर देवी देवताओं, महापुरुषों, वीर सैनिकों, चिपको आंदोलन से जुड़े चित्र बनाए गए हैं. इतना ही नहीं जेल की चारदीवारी में बनी बैरकों को गंगोत्री, यमुनोत्री, मानसरोवर और महिला बैरक को शारदा नाम दिया गया है. इसका उद्देश्य कैदियों की सोच सकारात्मक बनी रहे है जिसमें जेल प्रशासन को बेहद शानदार कामयाबी मिल रही है।


जेल की दीवारों पर चित्र बनाने वाले  चित्रकार कैदी  घनश्याम गुप्ता कहते हैं कि  इन चित्रों को बनाने में उन्हें  दो महीने का समय लगा है. इसका उद्देश्य यही है कि यहां आने वाले लोगों की सोच सकारात्मक बनी रहे. हरिद्वार की जिला कारागार के वरिष्ठ जेल अधीक्षक मनोज कुमार आर्या का कहना है कि जेल की दीवारों को देखकर नकारात्मक मनोवैज्ञानिक असर जेल में बंद लोगों पर पड़ता है. व्यक्ति पहले से ही परेशान रहता है. जेल प्रशासन के प्रयास से इन दीवारों पर ऐसे चित्र बनाए गए हैं, जिससे सकारात्मक सोच बनी रहे और नकारात्मकता से कैदी दूर रहें. खास बात यह है कि बैरक नंबर 1 को मानसरोवर तो वहीं महिला बैरक को शारदा नाम दिया गया है.उम्मीद की जानी चाहिए कि इस बदलाव का पॉजिटिव असर इन कैदियों के जीवन पर भी ज़रूर पड़ेगा।

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