John Lang मसूरी में सो रहा है वफादार अंग्रेज़ !

John Lang प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नवंबर 2014 की आस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान वहां के तत्कालीन प्रधानमंत्री टोनी एबाट को एक विशेष भेंट दी थी। यह उपहार ऑस्ट्रेलियाई मूल के पहले उपन्यासकार जान लैंग से सबंधित फोटो कोलाज था।खास बात यह है कि भारत प्रेमी लैंग ने रानी लक्ष्मीबाई को अंग्रेजों से उनका अधिकार दिलाने को गर्वनर जनरल के यहां याचिका दाखिल की थी। उन्होंने मेरठ से अंग्रेजों के विरुद्ध तेवर वाला अखबार भी निकाला था। जिसने अपनी पूरी ज़िंदगी भारतीयों की आवाज़ बनने में लगा दी और अंत में भारत की ही मिट्टी में दफन हो गया।

 

 मसूरी में दफन है रानी झांसी का वकील John Lang

 

 John Lang

इस वीर अंग्रेज का नाम था जॉन लैंग पेशे से वकील, दिल से क्रांतिकारी, और लेखनी से ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ धारदार हथियार थे। जॉन लैंग का जन्म 19 दिसंबर 1816 को सिडनी, ऑस्ट्रेलिया में हुआ। वह ऑस्ट्रेलिया के पहले उपन्यासकारों में से एक थे, लेकिन किस्मत ने उन्हें भारत की मिट्टी से जोड़ दिया।

इतिहासकार बताते है कि  1857 की क्रांति में रानी लक्ष्मीबाई ने झांसी बचाने के लिए एक अंग्रेज वकील की मदद ली थी। उस वकील का नाम था जॉन लैंग, जो ऑस्ट्रेलिया में पैदा हुए थे, लेकिन भारत से इतना जुड़ गए कि यहीं के होकर रह गए। जॉन लैंग ने रानी लक्ष्मीबाई का केस कोलकाता हाईकोर्ट में लड़ा। भले ही केस हार गए, लेकिन उन्होंने ब्रिटिश सरकार की नीतियों का डटकर विरोध किया।

वे एक पत्रकार भी थे। उन्होंने मफसिलाइट नाम से अखबार शुरू किया, जिसमें अंग्रेजों के खिलाफ खुलकर लिखा। इसी कारण उन्हें खतरा मानकर कई बार धमकाया गया। 1864 में मसूरी में उनकी रहस्यमयी मौत हो गई। हत्या का शक था, पर जांच दबा दी गई। उनकी कब्र आज भी मसूरी के कैमल्स बैक रोड पर मौजूद है। 1964 में लेखक रस्किन बॉन्ड ने उनकी कब्र खोजकर दुनिया को फिर से उनकी याद दिलाई।

जॉन लैग ने कोलकाता हाई कोर्ट में रानी झांसी का लड़ा था। उस समय लॉर्ड डलहौजी ने जो नियम बनाया था कि ज‍िन राज्‍यों का कोई वारिस न हो उनका ईस्‍ट इंड‍िया में विलय हो जाएगा। रानी ने एक बच्‍चा गोद ले लिया था। लेकिन अंग्रेजों ने उसे नहीं माना। रानी लक्ष्‍मी बाई ने अपनी बात केस के रूप में कोलकाता हाई कोर्ट में रखी। जॉन लैंग ने रानी लक्ष्मीबाई का केस लड़ा। भले ही केस हार गए, लेकिन उन्होंने ब्रिटिश सरकार की नीतियों का डटकर विरोध किया।  इसी कारण उन्हें खतरा मानकर कई बार धमकाया गया।