Mobile Addiction स्मार्टफ़ोन के जुनून में माया मर गयी !

Mobile Addiction  आज के युवा पहली पीढ़ी हैं जो अपना जीवन निरंतर ऑनलाइन ही व्यतीत करते हैं, एक ऐसी दुनिया में जहाँ सीमाएँ समाप्त हो चुकी हैं और समय बहुत तेज़ी से बीतता है। पहली बार, डिजिटल मीडिया का अत्यधिक उपयोग एक नए प्रकार की लत के रूप में उभरा है , जिसकी तुलना धूम्रपान, नशीली दवाओं और शराब जैसी पारंपरिक बुराइयों से की जा सकती है। 

स्मार्टफ़ोन के “अच्छे उपयोग” और दुरुपयोग के बीच एक बहुत ही बारीक, लगभग अदृश्य, रेखा होती है। स्मार्टफ़ोन का उपयोग व्यावहारिक और सामाजिक उद्देश्यों के लिए करना ज़रूरी है, लेकिन कुछ छूट जाने का डर और लगातार लॉग इन रहने का तनाव भी इसमें बाधा डालता है।ऐसे में क्या होता है जब यह रेखा पार हो जाती है और स्मार्टफ़ोन पर नियंत्रण रखने की इच्छा जीवन के हर पहलू पर हावी हो जाती है? यह एक मूलभूत प्रश्न है, क्योंकि स्मार्टफ़ोन की लत के मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और शारीरिक प्रभाव, विशेष रूप से युवाओं पर, बहुत गंभीर हो सकते हैं।

Mobile Addiction

जालौन से एक ऐसी खबर आई है जिसे सुनकर किसी का भी कलेजा कांप जाएगा. आज के दौर में बच्चों के बीच महंगे गैजेट्स और स्मार्टफोन का क्रेज किस कदर सिर चढ़कर बोल रहा है, इसकी एक खौफनाक बानगी उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में देखने को मिली है. यहाँ एक 16 साल की मासूम बच्ची ने सिर्फ इसलिए अपनी जान दे दी क्योंकि उसके पिता उसकी ‘आईफोन’ (iPhone) वाली जिद पूरी नहीं कर पाए.

क्या है पूरा मामला? Mobile Addiction

मामला जालौन के डकोर थाना क्षेत्र के कुसमीलिया गांव का है. यहाँ रहने वाली माया, जो 11वीं क्लास की छात्रा थी, पिछले काफी समय से अपने घर वालों से आईफोन दिलाने का दबाव बना रही थी. एक तरफ पढ़ाई का बोझ और दूसरी तरफ दिखावे की ये अंधी दौड़, शायद माया इस बात को समझ नहीं पाई कि उसके पिता की आर्थिक स्थिति क्या है.
परिजनों के मुताबिक, माया पिछले कई दिनों से जिद पर अड़ी थी. हद तो तब हो गई जब दो दिन पहले उसने अपने पिता को अल्टीमेटम देते हुए कहा, “अगर मुझे दो दिन के अंदर आईफोन नहीं मिला, तो मैं मर जाऊंगी.” उस वक्त परिवार को लगा होगा कि बच्ची गुस्से में कह रही है, लेकिन किसे पता था कि वो इतना बड़ा कदम उठा लेगी.

घर पर कोई नहीं था, तभी खाया जहर

शनिवार का दिन था, माया के माता-पिता हमेशा की तरह अपने काम पर चले गए थे. घर में माया अकेली थी. जिद और गुस्से में अंधी हो चुकी इस छात्रा ने घर में रखा कोई जहरीला पदार्थ खा लिया. जब परिवार के लोग वापस लौटे, तो माया की हालत बेहद खराब थी. आनन-फानन में उसे उरई मेडिकल कॉलेज ले जाया गया. वहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया. लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था; इलाज के दौरान माया ने दम तोड़ दिया.

मातम में बदला घर

रविवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा. माया के पिता तुलसीराम का रो-रोकर बुरा हाल है. जिस बेटी के उज्जवल भविष्य के सपने उन्होंने देखे थे, वो एक फोन की खातिर उन्हें हमेशा के लिए छोड़कर चली गई. फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच जारी है, लेकिन इस घटना ने समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.