Social Media Impact क्या कभी आपने सोचा है कि सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग का नकारात्मक प्रभाव भी रिश्ते में पड़ सकता है. आज हम आपको बताएंगे कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग भी एक स्वस्थ रिश्ता बिगाड़ सकता है.सोशल मीडिया जो आपको हमेशा अपने पार्टनर के पास रखता है, वह ही झगड़े का कारण बन जाता है. बहुत से बार हम ऑनलाइन देखने के बाद अपने पार्टनर पर संदेह करने लगते हैं बिना किसी कारण के जिससे दोनों के बीच झगड़ा होता है.आजकल लोगों की प्राइवेट लाइफ भी सोशल हो गई है, अपने फॉलोअर्स को अपडेट करने के लिए हम अक्सर जोखिम उठाते हैं. कई बार हम सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी साझा करते हैं जो हमारे रिश्ते की प्राइवेसी को खतरे में डाल सकती है.
सीमाएं तय करना और सीधा संवाद ज़रूरी है. Social Media Impact

कई बार हमारी बातचीत का टोन टेक्स्ट दूसरा व्यक्ति आपकी भावनाओं को गलत समझने लगता है. अपने पार्टनर के साथ एक स्वस्थ संबंध बनाए रखने के लिए अधिक फेस टू फेस कम्युनिकेशन ज्यादा रखें.आजकल सोशल मीडिया की लत ने हर युवा को प्रभावित करना शुरू कर दिया है. चाहे खाने के दौरान भी समय मिले, लोग इसे रील्स या शॉर्ट्स देखने में बिताते हैं. इतना सोशल मीडिया का उपयोग आपके पार्टनर को परेशान कर सकता है और आपके संबंध को भी बिगाड़ सकता है.ज्यादातर लोगों की सोशल मीडिया पर केवल अच्छी बातें दिखाई जाती हैं, जिसके बाद हम अपने पार्टनर को दूसरों के साथ तुलना करने लगते हैं.क्या कभी आपने सोचा है कि सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग का नकारात्मक प्रभाव भी रिश्ते में पड़ सकता है. आज हम आपको बताएंगे कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग भी एक स्वस्थ रिश्ता बिगाड़ सकता है.

सोशल मीडिया रिश्तों को कैसे नुकसान पहुँचाता है:
तुलना और ईर्ष्या (Comparison & Jealousy): दूसरे जोड़ों की ऑनलाइन चमक-दमक देखकर अपने रिश्ते से असंतुष्ट महसूस करना और ईर्ष्या करना.
अवास्तविक उम्मीदें (Unrealistic Expectations): सोशल मीडिया पर दिखने वाली परफेक्ट इमेज से अपने पार्टनर और रिश्ते से वैसी ही उम्मीदें पाल लेना, जो हकीकत में संभव नहीं.
अविश्वास और निगरानी (Mistrust & Surveillance): पार्टनर की ऑनलाइन एक्टिविटी पर लगातार नज़र रखना (कौन लाइक कर रहा है, क्या कमेंट कर रहा है), जिससे शक और अविश्वास बढ़ता है.
संचार की कमी (Lack of Communication): समस्या होने पर पार्टनर से बात करने के बजाय सोशल मीडिया पर पोस्ट करना या बहस करना, जिससे दूरी बढ़ती है.
निजी जीवन का अभाव (Lack of Privacy): रिश्ते की निजी बातों (लड़ाई-झगड़े, छोटी-मोटी बातें) को पब्लिक करना, जिससे अनावश्यक तनाव पैदा होता है.
भावनात्मक दूरी (Emotional Distance): आमने-सामने बात करने के बजाय फोन पर ज़्यादा समय बिताने से भावनात्मक जुड़ाव कम होना.
गलतफहमी (Misunderstanding): एक ‘लाइक’ या कमेंट भी बड़ी बहस का कारण बन सकता है, जिससे गलतफहमी पैदा होती है.

समाधान क्या है?
सीमित समय दें (Limit Screen Time): सोशल मीडिया पर बिताए जाने वाले समय को कम करें और पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं.
सीधा संवाद (Direct Communication): कोई भी समस्या हो तो पार्टनर से सीधे बात करें, ऑनलाइन नहीं.
सीमाएं तय करें (Set Boundaries): तय करें कि ऑनलाइन क्या साझा करना है और क्या नहीं, और पार्टनर के फोन/सोशल मीडिया को लेकर सम्मानजनक रहें.
डिजिटल डिटॉक्स (Digital Detox): समय-समय पर सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर रहें.
वास्तविकता समझें (Understand Reality): याद रखें कि सोशल मीडिया पर जो दिखता है, वह हमेशा सच नहीं होता; हर रिश्ते का अपना अलग समीकरण होता है

