Harish Rawat शौच जाता हूँ तो पत्नी बंदूक लेकर खड़ी रहती है !

Harish Rawat उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बीते दिनों अपने सोशल मीडिया पर एक लम्बा लेख लिखा है जो कई मायनों में मौजूदा सरकार पर तंज कसता दिखता है। आइये आपको शब्दशः वो आर्टिकल पढ़ाते हैं –

 

दिग्गज हरदा लिखते हैं Harish Rawat

Harish Rawat
कल वर्षों बाद मुझे कनलगढ़ के मोहन सिंह मिले। बागेश्वर के कौथिक में बोले, मैं आप ही से भेंट करने आया हूँ। मैंने मज़ाक में कहा, अभी तो मैं कई बार उत्तरायणी में आऊँगा और मैंने कहा, आप तो अभी जवान हैं। बोले, नहीं-नहीं, मैं आपको याद होगा, मैं रिटायरमेंट के बाद आपके पास राय लेने आया था कि कहाँ बसूँ, कहाँ अपना पैसा इन्वेस्ट करूँ? जो रिटायरमेंट का मुझको मिला है। क्योंकि मैंने आपकी एक पोस्ट देखी थी जिसमें आपने लोगों से कहा था कि जब आप रिटायरमेंट होकर के आ रहे हैं तो गांव में ही अवसर बनाइए। मेरे पास बारह-चौदह नाली का एक खेत है। यह मैंने आपको बताया था।

आपने मुझे बताया था कि हमने एक स्कीम बनाई है “मेरा वृक्ष-मेरा धन योजना” की उसके तहत आप कनलघाटी में नींबू, माल्टा बहुत अच्छे होंगे, तो आप उसके वृक्ष लगाइए और कुछ तिमला व खड़क के वृक्ष भी लगाइए। हमने दुग्ध बोनस की योजना भी प्रारंभ की है। आप गाय भी पालिए और जितना पैसा आप नीचे ज़मीन खरीदने और उसके बाद मकान बनाने में लगाएँगे, तो आपके रिटायरमेंट का जितना बेनिफिट मिलें हैं, वह सब समाप्त हो जाएगा और वहाँ आपके बेनिफिट भी बने रहेंगे तथा आपकी पेंशन में इज़ाफा भी हो जाएगा। दूध भी बेच सकते हैं और नींबू-माल्टा भी अच्छी कीमत में बिक जाएगा। खैर, ठीक चल रहा था, आपकी राय का मुझे फ़ायदा भी दिखाई दिया।

मेरा लड़का फ़ौज में भर्ती है। बहू, मेरी पत्नी और मैं खेतों में जुटे रहते थे और गाय की सेवा करते थे। एक दिन गाय पर गुलदार ने हमला किया, उसके नाखून लगे, सेप्टिक हुआ और कुछ दिनों बाद गाय मर गई। हमने सोचा यहीं तक मामला है। लेकिन अब गुलदार घर-आँगन में आने लगा है। आस-पड़ोस में सूअरों व भालूओं का भी आतंक हो गया है। रात को जब पत्नी, बच्चों को शौच के ऊ जाना होता है तो मैंने पत्नी बंदूक चलाना सिखा दिया है। क्योंकि जो हमारा शौचालय है वह घर से थोड़ा अलग है। इसलिए जब उसे टॉयलेट के लिए जाना होता है तो मैं बंदूक लेकर खड़ा रहता हूँ और जब मुझे टॉयलेट जाना होता है तो वह बंदूक लेकर के खड़ी रहती है। जब बहु और बच्चों को टॉयलेट जाना होता है, तो बहू के लिए पत्नी बंदूक लेकर के खड़ी रहती है और बच्चों के लिए मैं खड़ा रहता हूं।

मैंने अपने मन में सोचा मोहन सिंह जी तो सूबेदार रहे, इसलिए बंदूक है। पत्नी को भी बंदूक चलाना सिखा दिया, बहु को भी बंदूक चलाना सिखा देंगे। मगर गांव के और मोहन सिंह जैसे लोगों की स्थिति क्या होगी? या रामलाल जी व मोहन दत्त जैसे लोगों की स्थिति क्या होगी? आज उत्तराखंड का गाँव-गाँव आतंकित हो गया है। मुझे डर है। मैं राज्य के नीति-नियंताओं और सामाजिक चेतना के लोगों को आगाह करना चाहता हूँ कि पहाड़ों से एक और पलायन की बाढ़ जो जंगली जानवरों से असुरक्षा के कारण बाढ़ शुरू हो चुकी है और इससे राज्य की डेमोग्राफी पर बड़ा गहरा असर पड़ेगा। हमारे मुख्यमंत्री जी बार-बार डेमोग्राफी की बात करते हैं, तो इसलिए मैं भी डेमोग्राफी शब्द का इस्तेमाल कर रहा हूं। हम एक बहुत ही असंतुलित राज्य बनने की तरफ़ अग्रसर हो चुके हैं। हमारा यह रंज और ज्यादा गहरा होता जाएगा, यदि हमने अभी से पर्याप्त बचाव के उपाय नहीं किए गये।

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