आशीष तिवारी की विशेष रिपोर्ट –

Dhami News उत्तराखंड की राजनीति में सत्ता में कभी कांग्रेस रही तो कभी बीजेपी , लेकिन मुख्यमंत्री के पांव के नीचे कांटे बोना और सत्ता की जमीन को गर्म करना जैसे यहां की सियासत में बीमारी सी बन गई थी, यह भी जग जाहिर है कि सरकार में मुख्यमंत्री कोई भी रहा हो आए दिन दिल्ली दौरे को लेकर प्रयास लगाना , मंत्रिमंडल में हटाना और जोड़ना और कभी सत्ता परिवर्तन का गुब्बारा फुलाना और फिर उसका जमकर अलग-अलग दावों के साथ दुष्प्रचार करने का प्रयास रहा हो बीते 25 सालों में उत्तराखंड ने यह सब देखा है…..लेकिन बीते लगभग चार सालों की पुष्कर सरकार ने जहाँ कई पोलिटिकल मिथ तोड़े हैं तो वहीँ कैबिनेट विस्तार के बिना सरकार चलाकर वो सबको साधने में भी सफल साबित हो रहे हैं।
संकट मोचन हनुमान के भक्त हैं मुख्यमंत्री धामी Dhami News

बीते कुछ सालों में जो उठापटक , दलबदल ,आवन जावन कांग्रेस सरकार में लोगों ने देखी तो वहीं भाजपा में भी आश्चर्यजनक फेरबदल भी हमने देखा है। भला कौन भूल सकता है जश्न की तैयारी में मशगूल तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का वो अचानक इस्तीफा देना और आश्चर्यजनक तरीके से तीरथ सिंह रावत का राजभवन में शपथ लेना और फिर चंद दिनों बाद एक युवा विधायक को अचानक भाजपा द्वारा मुख्यमंत्री बनाकर सबको हैरान कर देना…. यह सब कुछ उत्तराखंड ने देखा है यही नहीं इस पहाड़ी प्रदेश ने तो यह भी देख लिया कि कैसे एक चुनाव हार चुके मुख्यमंत्री को उनकी लोकप्रियता और छवि की वजह से एक बार फिर मुख्यमंत्री बनाया जाता है और वह उपचुनाव में रिकार्ड मतों से जीतकर अपनी सरकार बनाते हैं…..

देवभूमि को अपने फैसलों से दिलाई राष्ट्रीय पहचान
ताबड़तोड़ पहाड़ों के दौरे करने के साथ साथ आम लोगों के बीच पहुंचकर उनके रंग में रंग जाने की कला के पारंगत धामी कभी साईकिल से स्टेडियम आते हैं तो कभी खेत में धान बोते हैं मॉर्निंग वाक में लोगों से सड़कों पर चर्चा करते हैं तो विपक्ष के बड़े नेता हरीश रावत को चावल देने पहुँच जाते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को जानने वाले यह कहते हैं कि धामी न सिर्फ इरादों के पक्के हैं बल्कि अपने विपक्षियों को साधने में भी माहिर हैं, हवा को परख लेते हैं और बंद लिफाफे के दस्तावेजों को भी पढ़ लेते हैं । लिहाजा जब-जब उनको लेकर अलग-अलग सियासी अफवाहों का बाजार गर्म होता है तब तब वह और मजबूत होकर सामने आते हैं । यही नहीं जब-जब एक धड़ा बदलाव के गुब्बारे को फुलाता है तो मुख्यमंत्री धामी कभी प्रधानमंत्री तो कभी केंद्रीय आलाकमान के साथ अपने बेहतरीन तालमेल की तस्वीर पेश कर उस गुब्बारे की हवा निकाल देते हैं।

समान नागरिक संहिता कानून ने बनाई राष्ट्रीय छवि
हिंदुत्व की नई युवा पहचान बन रहे मुख्यमंत्री धामी पर शिव की भक्ति के साथ-साथ हनुमान की कृपा भी कहीं ना कहीं इन अड़चनों को दूर करती रही है और एक बार फिर जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हनुमान मंदिर में ध्वजा पताका उठाकर बजरंगबली की जय बोलते और उनकी आरती करते नजर आए तो सियासी पंडितों को इस बात का इशारा मिल गया की 2027 तक मुख्यमंत्री की यह पारी बिना किसी रूकावट के चलती रहेगी और केंद्र का आशीर्वाद बजरंगबली के आशीर्वाद के साथ उनके सर पर बना रहेगा । लेकिन यह सियासत है जहां संभावनाओं के सभी दरवाजे खुले रहते हैं लिहाजा दावा करना तो मुश्किल है लेकिन आज के मजबूत हालात को देखकर भविष्य की रूपरेखा को जरूर समझा जा सकता है।

कांग्रेस में दम नहीं – धामी का विकल्प नहीं – राजीव नयन बहुगुणा
वहीँ शाइनिंग समाचार के सम्पादक आशीष तिवारी से मौजूदा सियासी हालात और 2027 विधान सभा चुनाव में संभावनाओं पर बात करते हुए देश के जानेमानेवरिष्ठ पत्रकार और लेखक राजीव नयन बहुगुणा कहते हैं कि आज की स्थिति में भाजपा के लिए मौजूदा सीएम पुष्कर सिंह धामी एक मात्र जिताऊ फेस हैं जिनका कोई विकल्प नहीं दिखता है और प्रदेश में कांग्रेस एक मलबे का ढेर है जिसका संगठन बिखरा हुआ है और वो 2027 में कोई चुनौती पेश कर भी पायेगी इसमें संदेह लगता है।

मुख्यमंत्री चेहरे के सवाल पर बहुगुणा कहते हैं कि एक अंकिता भंडारी केस को छोड़ दें तो धामी सरकार पर कोई लांछन या आरोप नहीं है और सीधे मुख्यमंत्री पर अब तक भ्र्ष्टाचार या किसी घोटाले की बात सामने नहीं आयी है जबकि अब तक मुख्यमंत्रियों पर आरोप लगते रहे हैं। मंत्रिमंडल विस्तार के सवाल पर वो कहते हैं कि धामी को अब इसकी जरुरत ही क्या है क्योंकि 4 के लिए 14 खड़े हो जायेंगे लिहाज़ा अच्छा यही है की निर्णय लिया ही न जाये और इंतजार में सरकार का समय पूरा हो जाये।

