Heaven Of Uttarakhand उत्तराखंड में प्रकृति और परमात्मा बसते हैं

Heaven Of Uttarakhand उत्तराखंड में गंगा और यमुना नदियों के उत्पत्ति स्थल हैं. वहीं मसूरी उत्तराखंड का सबसे लोकप्रिय हिल स्टेशनों में से एक है. यहां पर पहाड़, नदियां और मैदान जैसी खूबसूरत जगहों पर शांति से समय बिताने का मौका मिलता है. लोग गंगा स्नान के लिए दूर-दूर से हरिद्वार और ऋषिकेश पहुंचते हैं. इसके अलावा भी यहां पर बहुत ही पवित्र नदियां और संगम हैं जहां पर लोग स्नान के लिए पहुंचते हैं , उत्तराखंड के टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली में पंच प्रयाग मौजूद हैं. हिन्दू परंपरा में ‘प्रयाग’ या ‘संगम’ दो या दो से अधिक नदियों के मिलन को दर्शाता है, जहां पूजा और स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है

देवप्रयाग , रुद्रप्रयाग और कर्ण प्रयाग में संगम Heaven Of Uttarakhand

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देवप्रयाग में अलकनंदा और भागीरथी नदियों का संगम होता है. यहां से ये दो नदियां मिलकर गंगा नदी का निर्माण करती हैं. जो उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में है. यब भी सबसे प्रसिद्ध संगमों से एक माना जाता है. देवप्रयाग ऋषिकेश के पास स्थित है. यहां पर रघुनाथ मंदिर, चंद्रबदनी मंदिर और कई मंदिरों के दर्शन कर सकते हैं. साथ ही सस्पेंशन ब्रिज और तीन धारा भी यहां घूमने के लिए काफी प्रसिद्ध है.

रुद्रप्रयाग में अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का संगम होता है. यह अलकनंदा नदी के पांच संगमों में से एक है. जिसे पंच प्रयागों में भी गिना जाता है. मंदाकिनी नदी, केदारनाथ मंदिर से लगभग 1 किलोमीटर ऊपर स्थित चौराबारी ग्लेशियर की बर्फ पिघलने से और अलकनंदा नदी अलकापुरी ग्लेशियर से निकलती है.

रुद्रप्रयाग, बद्रीनाथ और केदारनाथ के बीच स्थित है.कर्णप्रयाग में अलकनंदा और पिंडर नदियों का संगम होता है. यह जगह उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है. यह अलकनंदा नदी के पांच प्रयागों में से तीसरा प्रयाग है. यह बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है. यह शहद पिंडर नदी के दोनों किनारों पर बसा है और छोटी पहाड़ियों से घिरा है. अलकनंदा नदी बद्रीनाथ से होते हुए यहां पहुंचती है और पिंडर नदी से मिलती है. यहां आप उमा देवी मंदिर और कर्ण मंदिर के दर्शन के लिए जा सकते हैं. साथ ही नौटी गांव और नंदप्रयाग जैसी खूबसूरत जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं.