Sexual Assault यह कहानी किसी हॉरर फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं, बल्कि एडिलेड की उन खूबसूरत, शांत गलियों की कड़वी हकीकत है, जहां लोग सुकून की तलाश में जाते थे। यह कहानी है उस ‘मसाज थेरेपिस्ट’ की, जिसने इलाज के नाम पर 61 महिलाओं के जिस्म और रूह को जख्मी किया। यह कहानी है सुमित रस्तोगी की एक ऐसा नाम जो आज ऑस्ट्रेलिया के इतिहास में ‘भरोसे के सबसे बड़े कातिलों’ में दर्ज हो चुका है। साउथ ऑस्ट्रेलिया का ग्लेन एल्ग इलाका अपनी खूबसूरत बीच और शांत माहौल के लिए जाना जाता है। इसी इलाके के एक नामी मसाज पार्लर में 39 साल का सुमित रस्तोगी काम करता था। चेहरे पर एक कृत्रिम शालीनता और आवाज में पेशेवर ठहराव,पहली नजर में सुमित ऐसा शख्स लगता था जिस पर कोई भी आंख मूंदकर भरोसा कर ले।
थेरेपिस्ट का गाउन पहनकर अपने शिकार का इंतजार करता था Sexual Assault

अक्टूबर 2021 का महीना था। पार्लर के उस केबिन में हल्की खुशबूदार मोमबत्तियां जल रही थीं, मद्धम संगीत बज रहा था। थेरेपी के लिए आने वाली महिलाओं को लगता था कि वे एक सुरक्षित जगह पर हैं, जहां वे अपने दिनभर के तनाव को पीछे छोड़ सकती हैं। लेकिन उन्हें क्या पता था कि इस सुकूनदेह माहौल के पीछे एक बीमार और विकृत दिमाग काम कर रहा था। सुमित के पास न तो मसाज की कोई पेशेवर डिग्री थी और न ही कोई वैध योग्यता। वह महज एक बहरूपिया था, जो थेरेपिस्ट का गाउन पहनकर अपने शिकार का इंतजार करता था।कहानी का खौफनाक पहलू यह था कि सुमित सिर्फ महिलाओं का यौन शोषण ही नहीं कर रहा था, बल्कि वह उनकी बेबसी और नग्नता को अपने कैमरे में कैद कर रहा था। केबिन के गुप्त कोनों में छिपे कैमरों के लेंस उन महिलाओं के जिस्म को देख रहे थे, जो पूरी तरह बेखबर थीं।

जुलाई 2022 तक, यानी महज 9 महीनों के भीतर, सुमित ने एक या दो नहीं, बल्कि 61 महिलाओं को अपनी हवस और मानसिक विकृति का शिकार बनाया। उसके फोन और लैपटॉप में 97 ऐसे वीडियो और तस्वीरें मिलीं, जिन्हें देखकर पुलिस अधिकारी भी दहल गए। बाद में जब इस मामले की जांच हुई, तो एक मनोचिकित्सक ने अदालत में खुलासा किया कि सुमित रस्तोगी ‘वॉयरिस्टिक डिसऑर्डर’ नाम की एक मानसिक बीमारी से ग्रस्त था। यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें इंसान को दूसरों को छिपकर देखने या उनकी मर्जी के बिना उनकी आपत्तिजनक तस्वीरें लेने में विकृत आनंद मिलता है। लेकिन क्या बीमारी के नाम पर इस जुर्म को माफ किया जा सकता था? बिल्कुल नहीं।

इस पूरी कहानी का सबसे दर्दनाक हिस्सा वह ‘खामोशी’ थी, जिसने सुमित को इतने महीनों तक बचने का मौका दिया। अदालत के बाहर एक पीड़ित महिला ने जो कहा, वह आज के समाज का एक कड़वा सच है।हम में से किसी ने भी पहले आवाज नहीं उठाई। सबको अहसास था कि अंदर कुछ तो गलत हो रहा है। हम जब भी वहां से निकलते, हमें एक अजीब सी बेचैनी होती थी। लेकिन हम सब यह सोचकर चुप रहे कि शायद यह हमारा वहम है… शायद यह थोड़ा अजीब था, पर असल में किसी ने कुछ नहीं कहा।” इसी खामोशी का फायदा उठाकर सुमित हर दिन एक नए भरोसे का कत्ल करता रहा। महिलाएं वहां से आत्मग्लानि और उलझन में बाहर निकलती थीं, यह सोचकर कि क्या वाकई उनके साथ कुछ गलत हुआ है? लेकिन जुलाई 2022 में एक महिला की हिम्मत ने इस खामोशी के चक्रव्यूह को तोड़ दिया। उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, और जब पुलिस ने सुमित के केबिन और डिजिटल डिवाइस की तलाशी ली, तो पाप का वह घड़ा फूट गया जिसे सुमित ने छिपाकर रखा था।

मई 2026 के इस दौर में, जब एडिलेड की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में जज कारमेन माटेओ के सामने सुमित रस्तोगी को खड़ा किया गया, तो कोर्ट रूम का माहौल बेहद भारी था। सुमित के चेहरे पर अब भी अपने किए का कोई पछतावा या शर्मिंदगी नहीं थी। वह चुपचाप खड़ा था, जैसे उसने कोई मामूली गलती की हो।शुक्रवार को पूरे तीन घंटे तक दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। जज माटेओ ने सुमित की तरफ देखा, उनकी आंखों में उस दरिंदे के लिए सख्त नफरत और पीड़ितों के लिए गहरी सहानुभूति थी। जज ने सुमित को संबोधित करते हुए जो शब्द कहे, वे इस पूरी कहानी का सबसे प्रभावशाली हिस्सा हैं। तुमने उन महिलाओं का अपमान किया जो तुम पर भरोसा करती थीं। वे किसी भी अनहोनी से पूरी तरह बेखबर थीं और तुम्हारी इस जगह पर सुरक्षा की हकदार थीं। तुमने न सिर्फ उनके भरोसे को तोड़ा, बल्कि उनके साथ बेहद अपमानजनक और गरिमाहीन व्यवहार किया। तुमने उन्हें गलत तरीके से छुआ और चुपके से उनके निजी अंगों की तस्वीरें लीं।”

जज ने आगे कहा तुम्हारी खींची गई हर एक तस्वीर भरोसे का घोर उल्लंघन थी। और जब तुमने इस हरकत को शारीरिक यौन शोषण के साथ मिलाया, तो तुम्हारी यह विकृति और पीड़ितों के प्रति तुम्हारा अपमान एक ऐसे स्तर पर पहुंच गया, जिसकी माफी मुमकिन नहीं है। अदालत ने सुमित रस्तोगी को 13 साल और 10 महीने जेल की सख्त सजा सुनाई। कानून की भाषा में इसे एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला माना गया। अदालत ने यह भी तय किया कि सुमित को कम से कम १० साल और १० महीने तक कोई पैरोल (नॉन-पैरोल अवधि) नहीं मिलेगी। चूंकि उसकी सजा उस दिन से लागू मानी गई जब उसे पहली बार गिरफ्तार किया गया था, इसलिए वह साल 2035 से पहले जेल की सलाखों से बाहर आने का सपना भी नहीं देख सकता। इसके अलावा, कोर्ट रूम में एक और बड़ी घोषणा हुई जैसे ही सुमित की सजा पूरी होगी, उसे ऑस्ट्रेलिया की धरती से डिपोर्ट देश से बाहर कर दिया जाएगा और वापस भारत भेज दिया जाएगा।

ऑस्ट्रेलिया ने साफ कर दिया कि ऐसे अपराधियों के लिए उनकी धरती पर कोई जगह नहीं है। अदालत के बाहर जब फैसला आया, तो पीड़ित महिलाओं की आंखों में आंसू थे, लेकिन इस बार ये आंसू कमजोरी के नहीं, बल्कि सुकून के थे। एक पीड़िता ने मीडिया के कैमरों के सामने आकर जो संदेश दिया, वह इस कहानी का असली अंत है। उसने कहा, मैं इस सजा से बेहद खुश हूं। आज हमें न्याय मिला है। मैं दुनिया की हर उस महिला से कहना चाहती हूं जो किसी भी तरह के शोषण का सामना करती है,कृपया आगे आइए और बोलिए। हमारी खामोशी ही इन दरिंदों की सबसे बड़ी ताकत होती है। सुमित रस्तोगी आज सलाखों के पीछे अपने कर्मों की सजा भुगत रहा है। यह कहानी हमें सिखाती है कि ‘थर्ड आई’ यानी कैमरे चाहे जितने भी छिपे हों, और गुनाह चाहे जितने भी अंधेरे कमरों में किए जाएं, कानून की नजरों और पीड़ितों की एकजुट हिम्मत के आगे उन्हें एक न एक दिन घुटने टेकने ही पड़ते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित लेख समाज में न जागरूकता और महिलाओं को सचेत करने के लिए महज प्रस्तुत किया गया है।

