anokhi shadi एक अनोखी शादी ने अपनी सादगी और बड़े सामाजिक संदेश के कारण पूरे देश के लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। दहेज प्रथा और फिजूलखर्ची से कोसों दूर रहे इस विवाह समारोह में स्वास्थ्य जागरूकता, शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी को सर्वोपरि प्राथमिकता दी गई। विवाह बंधन में बंधने से पहले नवदंपति ने अपनी मर्जी से एचआईवी (HIV) टेस्ट करवाया। जब टेस्ट की रिपोर्ट पूरी तरह सामान्य आ गई, उसके बाद ही उन्होंने समाज सुधारक और संविधान निर्माता डॉक्टर बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की तस्वीर के सामने खड़े होकर एक-दूसरे को जीवनसाथी के रूप में स्वीकार किया।
बिना बैंड-बाजा और फेरों के रस्में हुईं पूरी anokhi shadi

इस अनूठे विवाह की सबसे खास बात यह रही कि पूरा समारोह पूरी तरह से सादगीपूर्ण और पारंपरिक दिखावे से मुक्त रहा। शादी में न तो कोई बैंड-बाजा बजा और न ही भारी-भरकम फिजूलखर्ची की गई। यहाँ तक कि पारंपरिक फेरों का आयोजन भी नहीं किया गया। शादी के मुख्य स्टेज पर जब दूल्हा और दुल्हन आमने-सामने आए, तो उन्होंने गुलाब का फूल या महंगे तोहफे देने के बजाय एक-दूसरे को ‘कलम’ भेंट की। कलम का यह आदान-प्रदान समाज में शिक्षा के महत्व को बढ़ावा देने और रूढ़िवादी सोच को बदलने के लिए एक प्रतीकात्मक पहल के रूप में किया गया।

युवाओं और समाज को दिखाया आईना
समारोह के दौरान दूल्हा मनेंद्र दहिया ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि भविष्य को सुरक्षित और स्वस्थ रखने के लिए बिना किसी झिझक के विवाह से पूर्व स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए। वहीं दुल्हन मोनिका तंवर ने कहा कि समाज में आज भी एचआईवी जैसे गंभीर विषयों पर खुलकर बात नहीं की जाती, जबकि जागरूकता ही इससे बचने का सबसे बड़ा माध्यम है। इस दौरान मनेंद्र के पिता कृष्ण दहिया ने भी युवाओं से ऐसी सकारात्मक सोच अपनाने का आह्वान किया। समारोह में शामिल सामाजिक कार्यकर्ता संजय रामफल ने कहा कि आज शादियां सिर्फ दिखावे का जरिया बन चुकी हैं, ऐसे दौर में यह सादगीपूर्ण विवाह समाज को आईना दिखाने और नई सोच जगाने का काम करेगा।

