when to stay quiet कब रहना चाहिए चुप – हालात और समय जानिए

when to stay quiet  अति का भला न बोलना, अति की भली न चुप, अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप। भावार्थ: जरूरत से ज्यादा बोलना या चुप रहना दोनों ही अच्छी बात नहीं हैं। जैसे जरूरत से ज्यादा बारिश हो जाए या फिर धूप, दोनों ही दिक्कत देती हैं। उसी तरह अनावश्यक बोलने से भी काफी नुकसान होता है। अगर आपको कहीं चुप रहने से आर्थिक लाभ हो रहा है तो वहां चुप रहने से कोई समस्या नहीं है। आइए जानते हैं ऐसे 10 मौके जहां चुप रहने से लाभ और बोलने से होता है नुकसान….

बिना तथ्य के न बोलें – अगर आपके पास कोई तथ्य नहीं है तो वहां चुप रहने में ही भलाई है। चुप बैठने से दिमाग में नई कोशिकाओं का निर्माण होता है और इससे ज्ञान की वृद्धि होती है। बोलने में भलाई वहीं है, जहां आपको किसी चीज के बारे में पूरा ज्ञान हो।

शब्दों से न पहुंचे ठेस – अगर आपके शब्द किसी को मानसिक ठेस पहुंचा रहे हैं तो वहां चुप हो जाना चाहिए। कमजोर व्यक्ति के बारे में कुछ भी बोलकर आप महान नहीं बन सकते। महान आप किसी कमजोर का साथ देने में बनेंगे।

पवित्र वस्तुओं का न करें अपमान –  पवित्र वस्तुओं का न करें अपमानकोई वस्तु आपके लिए अपवित्र है और वही वस्तु दुसरों के लिए पवित्र है तो वहां आपका चुप रहना चाहिए। अनादर हमें किसी भी चीज का नहीं करना चाहिए, चाहे वह किसी इंसान को लेकर हो या फिर किसी धर्म को लेकर। अपमान करने से आप महान नहीं बन सकते।

क्रोध में रहें चुप – चुप रहना आदर या सम्मान देने की निशानी होती है। इससे न कोई छोटा होता है और न ही बड़ा। अगर आपको क्रोध आ रहा है तो आप या तो वहां से किसी का अनादर किए बिना चले जाएं या फिर चुप रहें। क्रोध करने से आपके रिश्ते खराब होंगे। क्रोध करने से हमेशा क्रोध करने वाले व्यक्ति का ही बुरा होता है।

मुद्दे से आपका कोई संबंध न हो – अगर आपका किसी मुद्दे से कोई संबंध न हो तो वहां आपका चुप रहना बनता है। बिना किसी वजह अगर आप दूसरों के मुद्दों पर बोलेंगे तो यह आपके लिए अनिष्टकारी रहेगा। इसमें केवल और केवल आपका ही नुकसान है।

शब्दों से किसी मित्र को हो हानि- अगर आपके शब्द सामने वाले के परिवार या फिर मित्र की प्रतिष्ठा के बारे में बुरी झलक दिखा रहे हैं तो वहां आपको चुप रहना चाहिए। किसी के परिवार या फिर मित्र के बारे में बुरा बोलने से केवल आप ही बुरे बनेंगे। जो चीज आसानी से खत्म की जा सकती है, उसे अपने शब्दों से बड़ा न करें।

बिना चिल्लाए न करें कोई बात- अगर आप बिना चिल्लाए कोई बात नहीं कह सकते तो वहां आपका चुप रहने में ही भलाई है। किसी पर चिल्लाने से आपके व्यवहार के बारे में पता चलता है। ज्यादा बोलने से चीजें हमेशा खराब ही हो जाती हैं।

किसी के बारे में न बोलें- नीति शास्त्र के अनुसार, जो अपने मुंह को बंद रखता है और बुद्धि से काम करता है। वही इंसान समझदार होता है। बिना जरूरत के बोलना, किसी के बारे में बोलना, किसी के बीच में बोलना, यह गलत है। कभी-कभी हमारे लिए बुद्धिमानी इसी में होती है कि हम अपना मुंह गलत जगह न खोलें और चुप रहें।

शब्दों से आपके दोस्तों को न हो हानि- कभी-कभी दोस्तों के साथ जब हम मजाक करते हैं तो ध्यान रहे कि आपके शब्दों से किसी का अनादर न हो। मजाक को भी हमेशा शब्दों के मायनों में ही रखें। जहां किसी को शब्दों से चोट लगे, वहां चुप हो जाएं। ज्यादा बोलने से हमेशा नुकसान होता है।

किसी और की प्रतिष्ठा को न पहुंचाएं हानि- यदि आपके शब्दों से किसी और की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंच रही है तो वहां आपको चुप हो जाना चाहिए। जब कोई व्यक्ति आपके सामने नहीं है तो आप उस व्यक्ति के बारे में बुरे शब्द किसी तीसरे व्यक्ति के सामने नहीं बोलें।