ऐसे ही नहीं लोग खाते हैं मां की शपथ

मम्मी कसम मैं तुमसे झूठ नहीं बोल रहा हूँ ….. मां कसम, मैंने कुछ नहीं किया…”आम जीवन में आपने भी ये कसम कभी न कभी तो खाई ही होगी , हिंदी फिल्मों में आपने ये डायलॉग बहुत बार सुना होगा. हीरो कभी अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए मां की कसम खाता है तो कभी विलेन की उसकी मां की दुहाई देकर अपराध करने से रोक दिया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि मां की शपथ इतनी महत्वपूर्ण क्यों मानी जाती है. लोग मां की झूठी कसम खाने से इतना डरते क्यों हैं ? रोचक  ये जानकारी , तो चलिए आज हम माँ की कसम का सही मतलब और उसकी अहमियत को बताते हैं।

क्यों खाई जाती है मां की कसम ?

70 और 80 के दशक की फिल्मों में मां के किरदार को त्याग, न्याय और आशीर्वाद की देवी माना जाता था. जब हीरो कहता था- मां की कसम, मैं सच बोल रहा हूं, तो दर्शक भी मान लेते थे कि वो झूठ नहीं बोल रहा है. अगर फिल्म दीवार के एक डायलॉग की ही बात करें जिसमें जब अमिताभ बच्चन (विजय) अपने छोटे भाई शशि कपूर (रवि) को अपनी दौलत के घमंड में पूछते हैं- ‘आज मेरे पास बंगला है, गाड़ी है, पैसा है… तुम्हारे पास क्या है?” इस पर शशि कपूर जवाब में कहते हैं- मेरे पास मां है.

पुराणों के अनुसार मां का अपमान करने पर क्या मिलती है सजा?

क्योंकि मां सिर्फ एक शब्द नहीं बल्कि एक इमोशन है. हीरो अपने मां के सम्मान के लिए सारी दुनिया से लड़ जाता है. फिल्म बाहुबली, मदर इंडिया, KGF इसका बहुत बड़ा उदाहरण हैं. इसी बीच आइए जानते हैं कि हमारे शास्त्रों में अगर कोई मां का अपमान करता है तो उसके लिए हमारे पुराणों में क्या सजा दी गई है.

मां का अपमान करने पर क्या होता है?

ज्योतिष की बात करें तो मां का अपमान करने से कुंडली में चंद्र दोष लगता है, इस वजह से जातक को मानसिक तनाव, अनिंद्रा और डिप्रेशन की परेशानी का सामना करना पड़ता है. श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति अपनी मां और बड़ों का अपमान करता है, उसके जीवन में सफलता नहीं मिलती. धन और कीर्ति धीरे-धीरे नष्ट होने लगती है. जो अपनी मां को रुलाता है वो कभी खुश नहीं रह पाता.

मां का अपमान करने वाले को भोगनी पड़ती है नरक की सजा

गरुड़ पुराण के अनुसार, जो लोग अपने माता-पिता का सम्मान नहीं करते उनके मृत्यु के पश्चात नर्क की वैतरणी नदी में फेंक दिया जाता है.पापी व्यक्ति को उन्हीं के शरीर का मांस खाने के लिए विवश किया जाता है.

महाभारत में गांधारी का श्राप

महाभारत में जब गांधारी के 100 पुत्र मारे गए, तो दुख और क्रोध में उन्होंने श्रीकृष्ण को श्राप दिया. मान्यता है कि उसी श्राप की वजह से बाद में यादव वंश का विनाश हुआ. यानी एक मां के दर्द और श्राप को इतना शक्तिशाली माना गया कि उससे पूरा साम्राज्य खत्म हो गया. इसलिए लोग एक मां के श्राप और बद्दुआ से डरते हैं.

मां का सम्मान करने वाले के साथ क्या होता है ?

जो लोग अपने मां-बाप का सम्मान करते हैं उन्हें अपने जीवन में सफलता मिलती है. धन प्राप्ति होती है, सुख-समृद्धि मिलती है. उनका आशीर्वाद हर मुश्किल घड़ी में ढाल बनकर खड़ा रहता है. (नोट- इस आर्टिकल में धार्मिक इनपुट्स पौराणिक कथाओं पर आधारित हैं,