Mantra Therapy क्या आप पढ़ते हैं स्वास्थ्य मंत्र ?

Mantra Therapy उत्तराखण्ड संस्कृत संस्थानम् एवं श्री महन्त इन्दिरेश अस्पताल, देहरादून के संयुक्त तत्त्वावधान में सचिवालय परिसर में मन्त्र चिकित्सा क्रियात्मक अनुसंधान योजना के संचालन के संबंध में गोष्ठी हुई। देश व प्रदेश के संस्कृत विद्वानों ने मन्त्र चिकित्सा के लिए मन्त्रों के प्रयोग, प्रभाव, उच्चारण शुद्धता, विधि, नियम पालन आदि पर मन्तव्य प्रस्तुत किए।


सयुंक्त निदेशक, चिकित्सा शिक्षा, उत्तराखण्ड डॉ. रंगील सिंह रैना एवं प्राचार्य श्री महन्त इन्दिरेश चिकित्सा महाविद्यालय डॉ. उत्कर्ष शर्मा का मंतव्य था कि यदि मंत्र चिकित्सा से पूर्व में भी किसी भी बीमारी के निदान से संबंधित साहित्य उपलब्ध हो तो, उसके आधार पर अन्य बीमारियों में इसके प्रयोग की अनुमति दी जा सकती है।सचिव संस्कृत शिक्षा दीपक कुमार द्वारा बैठक में उपस्थित संस्कृत विद्वानो से आग्रह किया गया कि 10 दिन के अंदर संबंधित साहित्य नोडल अधिकारी को उपलब्ध करा दिया जाए ताकि अनुसंधान प्रक्रिया प्रारंभ की जा सके।

कैसे होता मंत्र चिकित्सा में इलाज ?

मंत्र चिकित्सा या जप चिकित्सा पुरानी भारतीय और वैदिक परंपरा है। इसमें पवित्र ध्वनियों और मंत्रों के लगातार जाप से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को ठीक करने का प्रयास किया जाता है। इसे वैज्ञानिक रूप से तनाव कम करने और मन को शांत करने का एक अच्छा तरीका माना गया है।

प्रमुख स्वास्थ्यवर्धक मंत्र

महामृत्युंजय मंत्र: “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥” यह अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए सबसे प्रसिद्ध वैदिक मंत्र है।

धन्वंतरि मंत्र: “ॐ तत्पुरुषाय विद्महे अमृता कलश हस्ताय धीमहि तन्नो धन्वंतरि प्रचोदयात्।” यह स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती पाने के लिए भगवान धन्वंतरि का मंत्र है।

महान आरोग्य मंत्र: “ॐ जूं स माम् पालय पाल य स: जूं ॐ” (लघु महामृत्युंजय मंत्र) बीमारियों से मुक्ति पाने के लिए जपा जाता है।

शांति मंत्र: “ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः” मन की शांति और तनाव दूर करने के लिए उपयोग होता है।

करने का तरीका

सुबह शांत जगह पर सुखासन या आराम से बैठें।गिनती के लिए तुलसी या रुद्राक्ष की माला का उपयोग करें।शब्दों का उच्चारण साफ और सही रखें।