Special Story By : Priyanshu Dwivedi , Uttar Pradesh
- गधे पर दामाद और होली का रंग सुनकर आप चौंक जायेंगे लेकिन जनाब ये हमारे हिन्दुस्तान के एक इलाके की पुरानी परम्परा है।
Anokhi Holi Tradition होली की हर जगह की अपनी – अपनी परंपराएं हैं।
- यहाँ होली पर दामाद ससुराल आने से बचते हैं क्योंकि उन्हें साले और ससुर सहित पूरा गाँव मिलाकर फूलों से सजे गधे पर बिठा कर पुरे गांव में घुमाते हैं। Anokhi Holi Tradition इसके बदले में ससुरला पक्ष अपने दामाद को सोने की घडी उपहार में देते हैं।

- बुंदेलखंड की बात करें Shining Uttarakhand News आपको एक बेहद रोचक परम्परा के बारे में बताने जा रहा है। यहां फागें गाई जाती हैं। अशोकनगर के पास करीला का मेला भी विश्व प्रसिद्ध है। विदेशों से आकर लोग मेले में शामिल होते हैं। लेकिन क्या आपने किसी ऐसी परंपरा के बारे में सुना है। जहां घर के सबसे सम्मानीय व्यक्ति यानि दामाद को गधे की सवारी कराई जाती हो। इतना ही नहीं Anokhi Holi Tradition इन्हें गधे पर बिठाकर पूरा गांव भी घुमाया जाता हो। यदि नहीं तो चलिए शाइनिंग उत्तराखंड न्यूज़ की रिसर्च डेस्क आपके लिए ऐसी ही रोचक परम्परा से रूबरू कराने जा रहा है –
Anokhi Holi Tradition महाराष्ट्र के बीड जिले में दामाद को होली पर बिठाते हैं गधे पर

- रंगों के साथ हुल्लड़बाजी के लिए भी होली का त्योहार चर्चा में होता है। वैसे तो लोग इसे एंज्वाय करते हैं लेकिन इसकी अनोखी Anokhi Holi Tradition परंपराएं इसे और अधिक खास बना देती हैं। आज हम जिस विचित्र परंपरा के बारे में बताने जा रहे हैं वह है महाराष्ट्र के बीड जिले की। जहां दामाद को गधे की सवारी कराई जाती है। पर इसके पीछे कारण क्या है, चलिए आज हम आपको बताते हैं।
Anokhi Holi Tradition बुरा न मानों होली है लेकिन दामाद बेचारा क्या करे ?
- वैसे तो बुरा न मानो होली है कहकर लोग एक दूसरे को रंग लगा लेते हैं। लेकिन हद तो तब हो जाती है जब घर के दामाद को गधे पर बिठाकर पूरे गांव की सैर करा दी जाए। Anokhi Holi Tradition जी हां महाराष्ट्र के बीड में होने वाली इस परंपरा में दामाद को रंगों से सराबोर करके गधे पर बिठाया जाता है। इतना ही नहीं गधे को भी बकायदा पूरी तरह फूलों से सजाया जाता है।
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Anokhi Holi Tradition
Anokhi Holi Tradition रोचक है दामाद को गधे पर बिठाने की रिवाज़ का आगाज़ –
- इस अनोखी परंपरा के शुरू होने की पीछे की कहानी भी अजीब है। ऐसा माना जाता है कि होली के रंग से बचने के लिए करीब 80 साल पहले विडा येवता गांव के देशमुख परिवार में रंग लगवाने से मना करने पर इस परंपरा की शुरुआत हुई थी। Anokhi Holi Tradition उस समय परिवार द्वारा रंग लगवाने से मना किए जाने पर ससुर अनंतराव देशमुख द्वारा फूलों से सजा गधा मंगवाया गया। इसके बाद दामाद को रंगों से भिगाकर पूरे गांव में घुमाया गया।
Anokhi Holi Tradition दामाद को खिलाई गई मिठाई –

- इस दौरान दामाद को गधे की सैर कराकर उसकी पसंद के कपड़े दिलाकर उसे मिठाई भी खिलाई गई थी। माना जाता है तभी से ये परंपरा शुरू हुई होगी। करीब 80 साल यानि 8 दशक बाद भी आज से पूरे उत्साह के साथ यह परंपरा इस जगह पर निभाई जा रही है। कहते हैं होली से पहले ही दामादों की तलाश इस परंपरा के लिए शुरू कर दी जाती है। अगर दामाद न मिले तो किसी को इसकी उपाधि देकर ये परंपरा निभाई जाती है। ताकि इसमें रुकावट न आए।
- Anokhi Holi Tradition दामाद भाग जाते हैं गांव से –
होली से पहले इसकी तलाश शुरू कर दी जाती है। लेकिन कई बार इस परंपरा से बचने के लिए भी लोग गांव से भाग जाते हैं। इसके लिए दामादों को कड़े पहरे में रखा जाता है। ताकि होली पर ये रफूचक्कर न हो जाएं। -

Anokhi Holi Tradition
Anokhi Holi Tradition दामाद को गधे पर बैठने पर मिलती है सोने की घड़ी —
- Anokhi Holi Tradition ऐसा नहीं है कि ये परंपरा दामाद को बेइज्जत करती है। इसे केवल एक परंपरा के रूप में निभाया जाता है। इतना ही नहीं इस परंपरा के बाद दामाद को बेशकीमती तोहफों के साथ सोने की अंगूठी भी दी जाती है। इससे पहले दामाद की आरती उतारकर पूजा भी की जाती है। लेकिन रस्म है रिवाज़ है और अद्भुत भारत की अनोखी परम्परा है जिसको आज भी हमारे रंगीलो हिंदुस्तान में ख़ुशी ख़ुशी निभाई जाती है। आप सभी को शुभ रंगोत्सव 2022
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