Astronauts Brain अक्सर हम अंतरिक्ष यात्रा को रोमांच और नए नजरिए के साथ जोड़कर देखते हैं. वैज्ञानिक अब इस धारणा को पूरी तरह बदल रहे हैं. हालिया रिसर्च से पता चला है कि अंतरिक्ष की यात्रा केवल आपके सोचने का तरीका नहीं बदलती. यह आपकी खोपड़ी के भीतर आपके दिमाग की भौतिक स्थिति को भी बदल देती है. एमआईटी के रिसर्चर्स ने अंतरिक्ष यात्रियों के दिमाग का गहराई से अध्ययन किया है. इसमें सामने आया कि बिना गुरुत्वाकर्षण के दिमाग अपनी जगह छोड़ देता है. यह ऊपर और पीछे की ओर खिसक जाता है. यह बदलाव केवल थोड़े समय के लिए नहीं होता है. धरती पर लौटने के कई महीनों बाद भी दिमाग अपनी सही जगह पर नहीं लौटता.

मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी एमआईटी ने इस पर एक विस्तृत अध्ययन किया है. वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष यात्रियों के साथ उन लोगों की भी तुलना की जो धरती पर थे. धरती पर रहने वाले लोगों को 60 दिनों तक बिस्तर पर लिटाकर रखा गया था. इन लोगों का सिर थोड़ा नीचे की ओर झुकाकर रखा गया था. यह प्रयोग शरीर में तरल पदार्थों के ऊपर की ओर बहाव को समझने के लिए था. रिसर्च में पाया गया कि अंतरिक्ष यात्रियों का दिमाग बिस्तर पर लेटे लोगों की तुलना में ज्यादा खिसका. अंतरिक्ष में एक साल बिताने वाले यात्रियों में यह बदलाव 2.52 मिलीमीटर तक देखा गया. यह संख्या सुनने में छोटी लग सकती है लेकिन दिमाग के लिए बहुत बड़ी है. वैज्ञानिकों ने पाया कि दिमाग ऊपर की तरफ संकुचित हो जाता है. साथ ही नीचे के हिस्सों में खिंचाव पैदा होता है. यह डेटा लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने के खतरों को स्पष्ट करता है.

जब अंतरिक्ष यात्री धरती पर वापस आते हैं तो उन्हें चलने में दिक्कत होती है. कई यात्री संतुलन नहीं बना पाते और लड़खड़ाने लगते हैं. वैज्ञानिकों ने इसका संबंध दिमाग के खिसकने से जोड़ा है. कान के भीतर का हिस्सा हमें दिशा और संतुलन का अहसास कराता है. अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण न होने से यह प्रणाली ठीक से काम नहीं करती. रिसर्च के अनुसार दिमाग के संवेदी क्षेत्रों में बदलाव आने से संतुलन बिगड़ता है. जिन यात्रियों का दिमाग ज्यादा खिसका उन्हें चलने में उतनी ही ज्यादा परेशानी हुई. आमतौर पर एक हफ्ते में अंतरिक्ष यात्री चलना सीख जाते हैं. लेकिन दिमाग के भीतर की शारीरिक क्षति इतनी जल्दी ठीक नहीं होती है. यह रिसर्च बताता है कि संतुलन की समस्या केवल कान की नहीं बल्कि दिमाग की है. भविष्य में चांद और मंगल मिशन के लिए यह जानकारी बहुत महत्वपूर्ण साबित होगी.

