Special Story By : Anita Tiwari , Dehradun

Badrinath Temple History बद्रीनाथ धाम, उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है| यह भगवान बद्रीनारायण से संबंधित एक बहुत श्रद्धेय धार्मिक स्थल है जो भगवान बद्रीनाथ को समर्पित है, जो अन्य कोई और देवता नहीं भगवान विष्णु ही है। मंदिर समुद्र तल से 3133 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। बद्रीनाथ धाम छोटा चार धाम भी कहलाता है यह हिन्दुओं के चार धाम में से एक है,और वैष्णवतियों का सबसे पवित्र मंदिर है। यह वैष्णव के 108 दिव्य देसम में प्रमुख है।

Badrinath Temple History मंदिर की पूजा बौद्ध मंदिर के रूप में की गयी
- Badrinath Temple History बद्रीनाथ के मंदिर में स्थित मुख्य देवता भगवान बद्रीनाथ 3.3ft की शालीग्राम की शिला प्रतिमा है, जो भगवान विष्णु है, और जो भगवान की सबसे शुभ स्वयं-प्रकट मूर्तियों में से एक है। बद्रीनाथ की यात्रा का मौसम हर साल छह महीने लंबा होता है, जो अप्रैल से शुरू होता है और नवंबर के महीने में समाप्त होता है। बद्रीनाथ धाम का नाम स्थानीय शब्द बद्री से बना है जो की एक प्रकार के जंगली फल बेरी का प्रकार है।

- ऐसा कहा जाता है जब भगवान विष्णु बद्रीनाथ धाम के इन पहाड़ो में तपस्या में बैठे थे तो उन्हें कठोर सूरज की गर्मी से बचाने के लिए उनकी पत्नी माँ देवी लक्ष्मी ने बेरी के पेड़ का रूप लिया था। यह न केवल भगवान विष्णु का निवास स्थान है बल्कि ज्ञान की खोज में आये अनगिनत तीर्थयात्रियों, साधु, संतो का घर भी है।
Badrinath Temple History मंदिर की पूजा बौद्ध मंदिर के रूप में की गयी

Badrinath Temple History मंदिर की पूजा बौद्ध मंदिर के रूप में की गयी - Badrinath Temple History स्कंद पुराण के अनुसार, आदिगुरू शंकराचार्य को नारद कुंड से भगवान् विष्णु की मूर्ति प्राप्त हुई थी और फिर 8 वीं शताब्दी ए.डी. में उस मूर्ति को उन्होंने मंदिर में स्थापित किया। स्कंद पुराण में बद्रीनाथ धाम के बारे में उल्लेख किया गया है की: “स्वर्ग में, पृथ्वी पर और नरक में कई पवित्र मंदिर हैं; लेकिन बद्रीनाथ की तरह कोई मंदिर नहीं है। “

Badrinath Temple History मंदिर की पूजा बौद्ध मंदिर के रूप में की गयी - Badrinath Temple History पौराणिक कथाओं के अनुसार बद्रीनाथ धाम एक प्राचीन भूमि है जिसका कई पवित्र ग्रंथो में उल्लेख किया गया। इसके साथ कई पौराणिक कहानियां भी जुडी है जिनमे से पांडव भाइयों की द्रौपदी के साथ, बद्रीनाथ के पास एक चोटी की ढलानों पर चढ़कर स्वर्गोहिनी या ‘चढ़ाई के स्वर्ग’ की कहानी सबसे महतवपूर्ण मानी जाती है. इनमे से कुछ और कहानियां है की भगवान् कृष्ण और अन्य महान संत तीर्थ यात्रा के दौरान अपनी आखिरी तीर्थ यात्रा के लिए बद्रीनाथ ही आये थे. ये कुछ कहानियां ऐसी है जिन्हें इस पवित्र तीर्थ स्थान से जोड़ा जाता है।

Badrinath Temple History मंदिर की पूजा बौद्ध मंदिर के रूप में की गयी Badrinath Temple History वामन पुराण के अनुसार, ऋषि नर और नारायण (भगवान विष्णु का पांचवां अवतार) बद्रीनाथ धाम में आकर तपस्या करते हैं। ऐसा कहा जाता है की, कपिल मुनी, गौतम, कश्यप जैसे महान ऋषि मुनियों ने बद्रीनाथ धाम में तपस्या की है जबकि भक्त नारद ने यहाँ मोक्ष प्राप्त किया और भगवान कृष्ण ने इस क्षेत्र को प्यार किया. मध्ययुग के धार्मिक विद्वान, आदि शंकराचार्य, रामानुजचार्य, श्री माधवचार्य, श्री नित्यानंद बद्रीनाथ धाम में शांत चिंतन और ज्ञान की प्राप्ति के लिए यहाँ आया करते थे जिसे आज भी बहुत से लोग जारी रखे हुए है।
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