BAMS Essay Controversy 15 जून को 4 वर्षीय बीएएमएस डिग्री प्रोग्राम की परीक्षा के तहत काया चिकित्सा के पेपर में एक ऐसा सवाल पूछा गया जो कि विवादों के घेरे में आ गया है। स्टूडेंट से कहा गया कि वाजीकरण यानी कामोत्तेजक द्रव्य के रूप में स्त्री पर एक लघु निबंध लिखिए।
BAMS Essay Controversy : पेपर में महिलाओं को बताया-‘उत्तेजना बढ़ाने की दवा

- BAMS Essay Controversy स्टूडेंट को इस पूरे पेपर में 12 टॉपिक पर लघु निबंध लिखने के लिए दिए गए थे जिनमें से एक ‘वाजीकर द्रव्य के रूप में महिला’ का भी एक टॉपिक था … एक ट़्विटर यूजर ने इस पेपर का स्क्रीन शॉट द लीवर डॉक अकाउंट से शेयर किया है। यूजर ने इस विषय से जुड़ी टेक्स्ट बुक के स्क्रीन शॉट को भी शेयर किया है जो कि सेंट्रल काउंसिल ऑफ मेडिसिन से मंजूरी प्राप्त है। इस किताब में कहा गया है कि महिला सभी कामोत्तेजक दवाइयों में सर्वश्रेष्ठ है।

- लीवर डॉक सहित कई और यूजर ने पाठ्य पुस्तक में दी गई व्याख्या पर सवाल उठाए हैं। एक यूजर ने पूछा कि क्या हम महिलाओं को एक वस्तु मानकर युवा स्टूडेंट को रेप कल्चर का तरीका नहीं सिखा रहे हैं? बैचलर डिग्री प्राप्त करने जा रहे स्टूडेंट्स को प्रोग्रेसिव और साइंटिफिक तथ्यों को सिखाने की बजाय यह क्या पढ़ाया जा रहा है? क्या मानवता और समुदाय के हित में ऐसा ठीक है? इसमें यह भी कहा गया है कि महिलाएं बच्चा पैदा करने की मशीन हैं।
BAMS Essay Controversy यूनिवर्सिटी ने दी ये सफाई

- BAMS Essay Controversy राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ एंड साइंसेज (RGUHS) के रजिस्ट्रार डॉ. रामकृष्ण रेड्डी ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा कि क्वेश्चन पेपर सिलेबस के आधार पर बनाए गए थे। किसी भी पाठ्यपुस्तक से कोई भी तथ्य जोड़ने या हटाने के लिए यूनिवर्सिटी के पास कोई अधिकार नहीं है। इसकी जिम्मेदारी सेंट्रल काउंसिल फॉर इंडियन मेडिसिन की है। बता दें कि यह विवाद तब सामने आया जब स्कूल की पाठ्यपुस्तकों में सुधार का मुद्दा उठा है।
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