उत्तराखंड से अनीता तिवारी की रिपोर्ट –

BINSAR MAHADEV TEMPLE उत्तराखंड में स्थित बिनसर महादेव मंदिर की बेहद मान्यता है. ऐसी लोक मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण एक रात में हुआ था. यह प्रसिद्ध और पौराणिक मंदिर रानीखेत से करीब 20 किमी की दूरी पर है. इस मंदिर के आसपास का क्षेत्र बेहद खूबसूरत है और मंदिर आध्यात्मिक शांति और ऊर्जा से परिपूर्ण है. यह मंदिर भगवान भोलेनाथ को समर्पित है. अगर आप शिव भक्त हैं, तो एक बार इस मंदिर में जरूर दर्शन करिये. आइये इस मंदिर की पौराणिक मान्यता और कथा के बारे में विस्तार से जानते हैं.
BINSAR MAHADEV TEMPLE जहां शिला को दूध चढ़ाती थी गाय

BINSAR MAHADEV TEMPLE कुंज नदी के तट पर स्थित है बिनसर महादेव मंदिर
- बिनसर महादेव मंदिर (BINSAR MAHADEV TEMPLE UTTARAKHAND) कुंज नदी के तट पर स्थित है. यह मंदिर समुद्र तल से करीब पांच हजार से ज्यादा फीट की ऊंचाई पर बना है. मंदिर हरे-भरे देवदार और चीड़ के जंगलों के बीच में स्थित है. ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण 10 वीं सदी में हुआ था. इस मंदिर में इस क्षेत्र के ही नहीं बल्कि समस्य कुमाऊं अंचल के लोगों की विशेष श्रद्धा है. हर साल यहां लाखों श्रद्धालु आते हैं और विशाल भंडारा भी लगता है.

- BINSAR MAHADEV TEMPLE मंदिर में शिवलिंग के साथ ही भगवान गणेश और गौरी की मूर्तियां हैं. प्राकृतिक तौर पर भी बिनसर बेहद सुंदर जगह है. ऐसी लोकमान्यता है कि यह क्षेत्र भगवान शिव और गौरी का है. मंदिर के निर्माण लेकर कोई स्पष्ट दस्तावेज नहीं हैं. लोक मान्यता के मुताबिक, यह मंदिर सबसे पहले पांडवों ने बनवाया था. ऐसा भी कहा जाता है कि मंदिर का निर्माण एक ही रात्रि में किया गया था. मंदिर को लेकर कहा जाता है कि इसका निर्माण राजा पीथू ने अपने पिता बिन्दू की याद में किया था जिस कारण मंदिर का नाम बिन्देश्वर हुआ और धीरे-धीरे यह नाम बिनसर हो गया.
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