Special Story By : Abilash Khanduri , Dehradun –
Border Modern Village उत्तराखंड के सीमाओं पर बसे गाँव से पलायन की खबरें आपने बहुत सुनी और पढ़ी होंगी। गाँव को फिर से आबाद करने और रिवर्स पलायन को बढ़ावा देने के लिए पलायन आयोग का भी गठन किया गया था। लेकिन खाली होते गाँव न सिर्फ स्थानीय बुजुर्गों के लिए तकलीफदेह साबित हो रहे है बल्कि सुरक्षा के लिहाज़ से भी चुनौती बना हुआ है।

Border Modern Village 15 गांव होंगे बॉर्डर मॉर्डन विलेज में तब्दील
- Border Modern Village लेकिन अब एक नयी पहल से उम्मीद जगने लगी है। चीन और नेपाल से सटे इलाकों को आबाद और खुशहाल करने के लिए सेना सामने आयी है जिसके सहयोग से अब बड़े प्रयास शुरू होने जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने भी इस दिशा में आगे बढ़ते हुए इन गाँव को सेना को देने की तैयारियां कर ली है।

- देवभूमि की उच्च हिमालयी क्षेत्र में मौजूद 15 गांवों को Border Modern Village बॉर्डर मॉडर्न विलेज में भी तब्दील किया जाना है…. नए प्लान से साफ है कि इंटरनेशनल बॉर्डर में आने वाले दिनों में सेना का जमावड़ा तो बढ़ेगा ही, साथ इन इलाकों से पलायन भी खत्म होगा ….
- पहाड़ में आपदा हो या कोई और चुनौती उत्तराखंड में भारतीय सेना ने हर मौके पर अपनी अहमियत और ज़ज़्बे से पहाड़ को बचाया और संवारा है। अब पलायन को खत्म करने के लिए सरकार और स्थानीय प्रशासन ने एक बार फिर सेना पर भरोसा जताया है और व्यास और दारमा घाटी में कई इलाकों को सेना को दिए जाने है।

- चीन और नेपाल बॉर्डर से सटी व्यास घाटी के गुंजी, कालापानी और ज्योलिंगकॉग में सेना की अग्रिम चौकियों बनाई जानी है.… Border Modern Village यही नहीं, मुनस्यारी और मिलम में भी अग्रिम चौकियों को स्थापित किया जाना है…. देश की सुरक्षा के लिहाज से अहम इलाकों को सेना को दिए जाने से पहले अधिग्रहण, हस्तान्तरण और लीज भूमि के किराए को लेकर सेना और प्रशासन में बीच अहम मीटिंग भी हो गई है….

- डीएम पिथौरागढ़ आशीष चौहान ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि सेना और प्रशासन के बीच Border Modern Village पर कई मुद्दों पर आम राय तैयार हो गई है…. दोनों पक्षों के बीच काफी पॉजिटिव मीटिंग रही है…
- सेना और प्रशासन के बीच बॉर्डर इलाकों में भूमि अधिग्रहण के साथ ही नदियों के किनारे सुरक्षा दीवार लगाए जाने पर सहमति बनी हैं… पहले चरण में धारचूला, गुंजी और कूटी-यांगती नदी के किनारे सुरक्षा दीवार बनाई जानी है… Border Modern Village मिलम, जौहार, दारमा और व्यास घाटियों को रोड के साथ ही संचार कनेक्टिविटी भी दी जानी है….

- जबकि नई नीति के मुताबिक बॉर्डर के 15 गांवों को Border Modern Village बॉर्डर मॉर्डन विलेज के रूप मे भी स्थापित किया जाना है…. सामरिक रूप से अहम इन इलाकों में अगर जरूरी सुविधाओं की ढांचा खड़ा होता है तो बॉर्डर पर जारी पलायन की रफ्तार भी थमेगी और देश का सुरक्षा तंत्र भी मजबूत होगा….

- लेकिन तमाम सरकारी वादों और दावों के बीच आज पहाड़ की ये दुर्दशा क्यों हुई ? गाँव खाली और पलायन अभिशाप कैसे बन गया ? ये सवाल खड़ा है नयी सरकार के सामने भी क्योंकि अगर गाँव गाँव तक सडकें समय पर पहुंचा दी जाती , सामुदायिक स्वास्थ केन्द्रों की स्थिति म सुधार किया जाता, उचित शिक्षा की व्यवस्था कर दी जाती और रोजगार उपलबध्ता और कृषि विकास की तरफ सरकारों ने ध्यान दिया होता तो आज भारतीय सेना से हम और आप यूँ Border Modern Village गाँव बसाने के लिए अनुरोध न कर रहे होते
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