Course About Modi ”मोदी तत्व” में स्टूडेंट्स पढ़ेंगे मोदी के सीक्रेट्स

Course About Modi अगर आप ये जानना चाहते हैं कि कैसे बीते एक दशक से ज्यादा समय तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हवा देश में तूफ़ान बनकर लोगों को प्रभावित करती रही है ? कैसे एक के बाद एक राज्य में उनके जादू ने कमाल किया है ? तो एक खबर आपके लिए इस सवाल का जवाब लेकर आयी है। गुजरात के महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के करिश्माई नेतृत्व पर आधारित ”मोदी तत्व” नामक एक मॉड्यूल और आरएसएस के इतिहास को समाजशास्त्र पाठ्यक्रम में शामिल किया है, ताकि समाज पर उनके प्रभाव का अध्ययन किया जा सके।विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के प्रमुख डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि एमए के दो वर्षीय पाठ्यक्रम में ”देशभक्ति का समाजशास्त्र” नाम से नया कोर्स शुरू किया गया है।

सयाजीराव विश्वविद्यालय पढ़ायेगा मोदी तत्व Course About Modi

इसका उद्देश्य ”मोदी तत्व” और सामाजिक सुधारों में अग्रणी भूमिका निभाने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज तथा सयाजीराव गायकवाड़ तृतीय के कार्यों का वैज्ञानिक विश्लेषण करना है।उन्होंने कहा कि चाहे आपको पसंद हो या न हो, राजनीतिक क्षेत्र और नेतृत्व की भूमिका में प्रधानमंत्री मोदी पर चर्चा करनी ही होगी। वह एक ऐसा तत्व हैं, जो लंबे समय तक मौजूद रहेंगे। हम समाजशास्त्री मैक्स वेबर के करिश्माई नेतृत्व का अध्ययन करना चाहते थे। ऐसा व्यक्तित्व महात्मा गांधी और मार्टिन लूथर किंग में भी देखा गया था।

पीएम मोदी में भी उसी तरह का करिश्माई नेतृत्व दिखाई देता है। यह एक वैज्ञानिक विषय है, जिसकी पड़ताल आवश्यक है।डा. ¨सह नीति आयोग की सार्वजनिक परियोजनाओं के निगरानी कार्यक्रम से भी जुड़े रहे हैं।उन्होंने कहा कि ”मोदी तत्व” में मीडिया और डिजिटल राष्ट्रवाद, नागरिकता और असहमति तथा वैश्वीकरण और पहचान की राजनीति जैसे विषयों पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

इन तीनों भागों में ”मोदी तत्व” की अवधारणा का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा और इस बात पर चर्चा की जाएगी कि वह इतने प्रसिद्ध क्यों हो रहे हैं, उनकी स्वीकार्यता इतनी व्यापक कैसे है और भारत में सबसे लंबे समय तक सत्ता में बने रहने के पीछे उनमें ऐसी क्या खास बात है।प्रधानमंत्री की नीतियां, जैसे-नोटबंदी, डिजिटल क्रांति, फास्टैग, जल शक्ति मंत्रालय आदि दर्शाती हैं कि वह जनता की इच्छाओं को कितनी अच्छी तरह समझते हैं। शायद यही कारण है कि उन्हें जनता का इतना समर्थन प्राप्त है।

डॉ सिंह ने बताया कि इस मॉड्यूल का विचार तब आया, जब समाजशास्त्र विभाग के एमए के छात्र नीति आयोग की सार्वजनिक नीतियों के निगरानी कार्यक्रम के तहत गांवों में सर्वेक्षण कर रहे थे। हमने पाया कि कुछ समूह इन गांवों में परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए काम कर रहे थे और वे आरएसएस से जुड़े हुए थे। इस समूह का समाजशास्त्रीय अध्ययन आवश्यक था।